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Bahraich News: बच्चों को खिलाए फल गुरुजी को पड़ गए महंगे
Sun, 26 Feb 2023 11:36 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sun, 26 Feb 2023 11:36 PM IST
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बहराइच के एक प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को वितरित किए गए फल (फाइल फोटो)। संवाद
बहराइच। परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को सेहतमंद बनाने के लिए शिक्षकों ने अपनी जेब से महीनों तक फल खिलाए। वर्ष भर बाद जब भुुगतान का समय आया तो विभाग की ओर से कटौती कर दी गई। इसमें दो प्रतिशत की कटौती डीएम के आदेश के नाम पर की गई है। इसके अलावा भी धनराशि काटी गई है जिसका कारण नहीं बताया जा रहा है। अब शिक्षक कह रहे हैं कि ये फल तो बड़े महंगे पड़ गए। हालांकि, विभागीय हाकिमों के डर से वे चुप्पी साधे हैं। बीते वर्ष अप्रैल माह से छात्र-छात्राओं को सप्ताह में एक दिन फल वितरण की शुुरुआत की गई थी। बजट न होने की वजह से शिक्षक अपनी जेब से फल खरीदकर बच्चों को खिलाते रहे। अब अप्रैल से सितंबर माह तक बांटे गए फलों की भुगतान राशि स्कूल के खातों में भेजी गई है। शिक्षकों की ओर सेे भेजे गए बिल व भुुगतान की धनराशि में काफी अंतर दिख रहा है।
जिले में परिषदीय विद्यालयों की संख्या 2803 है। वर्तमान में छह लाख से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। पयागपुर विकास खंड के एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि साल भर विद्यालय के छात्र-छात्राओं को नियमानुसार फल वितरण करते रहे। इसके बाद भी भुुगतान में कटौती कर दी गई। यही हाल सभी विद्यालयों का है। उनका कहना है कि इससे शिक्षकों को काफी नुकसान हुआ है। आगे फल वितरण योजना भी प्रभावित होने की आशंका है।
कटे फल देने की है मनाही
परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को कटे फल वितरित करने की अनुमति नहीं है। समूचे व साफ फल वितरित करने का ही आदेश है। फल वितरण के लिए प्रति छात्र चार रुपये की धनराशि निश्चित है। किसी भी समूचे फल की कीमत चार रुपये से अधिक ही पड़ती है।
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आखिर डीएम ने क्यों करवाई कटौती
शिक्षकों ने फलों के भुगतान के लिए बिल भेजे थे। शासन से पैसा जिले में आने पर डीएम के आदेश पर भुगतान में दो प्रतिशत की कटौती के आदेश दिए गए। यह कटौती करने के बाद फिर से मनमानी कटौती कर दी गई। डीएम को दो प्रतिशत की कटौती करवाने का आदेश किसने दिया, यह नहीं बताया जा रहा है। शिक्षकों के लिए भी यह कटौती पहेली बनी हुई है क्योंकि ऐसा कोई शासनादेश ही नहीं है।
इस तरह की कटौती
विशेश्वरगंज के प्राथमिक विद्यालय, पटना का अप्रैल से सितंबर माह तक फल वितरण का भुगतान 11844 रुपये बना। दो प्रतिशत की कटौती के बाद धनराशि घटकर 11,607 रुपये रह गई। विभाग ने महज 10,186 रुपये ही विद्यालय के खाते में भेजे। इसी प्रकार चित्तौरा अंतर्गत के प्राथमिक विद्यालय, निहालसिंह पुरवा का भुगतान 19,940 रुपये बना। दो प्रतिशत की कटौती के बाद धनराशि 19,541 रुपये रह गई। विद्यालय को महज 17,148 रुपये ही दिए गए।
साहब बोले, कई कारण हैं कटौती के...
इस संबंध में जब बीएसए एआर तिवारी से जानकारी मांगी गई तो वह कुछ भी साफ बोलने से बचते रहे। सिर्फ इतना बोले कि कई कारणों से कटौती की गई है। डीएम के आदेश के नाम पर कटौती बात सामने आने पर कुछ भी बोलने से इन्कार कर दिया।
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जिले में परिषदीय विद्यालयों की संख्या 2803 है। वर्तमान में छह लाख से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। पयागपुर विकास खंड के एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि साल भर विद्यालय के छात्र-छात्राओं को नियमानुसार फल वितरण करते रहे। इसके बाद भी भुुगतान में कटौती कर दी गई। यही हाल सभी विद्यालयों का है। उनका कहना है कि इससे शिक्षकों को काफी नुकसान हुआ है। आगे फल वितरण योजना भी प्रभावित होने की आशंका है।
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कटे फल देने की है मनाही
परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को कटे फल वितरित करने की अनुमति नहीं है। समूचे व साफ फल वितरित करने का ही आदेश है। फल वितरण के लिए प्रति छात्र चार रुपये की धनराशि निश्चित है। किसी भी समूचे फल की कीमत चार रुपये से अधिक ही पड़ती है।
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आखिर डीएम ने क्यों करवाई कटौती
शिक्षकों ने फलों के भुगतान के लिए बिल भेजे थे। शासन से पैसा जिले में आने पर डीएम के आदेश पर भुगतान में दो प्रतिशत की कटौती के आदेश दिए गए। यह कटौती करने के बाद फिर से मनमानी कटौती कर दी गई। डीएम को दो प्रतिशत की कटौती करवाने का आदेश किसने दिया, यह नहीं बताया जा रहा है। शिक्षकों के लिए भी यह कटौती पहेली बनी हुई है क्योंकि ऐसा कोई शासनादेश ही नहीं है।
इस तरह की कटौती
विशेश्वरगंज के प्राथमिक विद्यालय, पटना का अप्रैल से सितंबर माह तक फल वितरण का भुगतान 11844 रुपये बना। दो प्रतिशत की कटौती के बाद धनराशि घटकर 11,607 रुपये रह गई। विभाग ने महज 10,186 रुपये ही विद्यालय के खाते में भेजे। इसी प्रकार चित्तौरा अंतर्गत के प्राथमिक विद्यालय, निहालसिंह पुरवा का भुगतान 19,940 रुपये बना। दो प्रतिशत की कटौती के बाद धनराशि 19,541 रुपये रह गई। विद्यालय को महज 17,148 रुपये ही दिए गए।
साहब बोले, कई कारण हैं कटौती के...
इस संबंध में जब बीएसए एआर तिवारी से जानकारी मांगी गई तो वह कुछ भी साफ बोलने से बचते रहे। सिर्फ इतना बोले कि कई कारणों से कटौती की गई है। डीएम के आदेश के नाम पर कटौती बात सामने आने पर कुछ भी बोलने से इन्कार कर दिया।