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Bahraich News: कछुआ चाल से चल रही स्नातक कक्षाओं की प्रवेश प्रक्रिया
Fri, 27 Jun 2025 01:15 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Fri, 27 Jun 2025 01:15 AM IST
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बहराइच। शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की एक और योजना लागू होने से पहले ही दम तोड़ रही है। यह योजना समर्थ पोर्टल पर स्नातक प्रथम सेमेस्टर की प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित है। प्रवेश की गति बेहद धीमी होने से नाराज कुलपति ने 28 जून को कॉलेज के प्राचार्यों की ऑनलाइन मीटिंग बुलाई है। इस आशय का आदेश मां पाटेश्वरी राज्य विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने कॉलेजों को भेजा है।
मां पाटेश्वरी राज्य विश्वविद्यालय की ओर से स्नातक व परास्नातक प्रथम सेमेस्टर के प्रवेश समर्थ पोर्टल के माध्यम से कराने का निर्णय लिया गया है। 14 जून को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने किसान पीजी कॉलेज में जिले के सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ बैठक कर समर्थ पोर्टल के माध्यम से प्रवेश कराने के निर्देश दिए थे। लगभग 12 दिन बाद प्रवेश प्रक्रिया की गति काफी धीमी है।
इन कारणों से नहीं हो पा रहे प्रवेश
स्थानीय स्तर पर प्रवेश प्रक्रिया में बाधा आने का कारण तकनीकी मामले बताए जा रहे हैं। इनमें कहीं उम्र कम होने के कारण तो कहीं सर्वर आदि की समस्या के कारण छात्र-छात्राओं को निराश होना पड़ रहा है। कई छात्र-छात्राओं ने इस वर्ष इंटरमीडिएट उत्तीर्ण होने के बाद प्रवेश के लिए आवेदन किया, लेकिन उनका जन्म वर्ष 2009 होने के कारण वे अर्हता पूरी नहीं करते हैं। इस वजह से वे ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
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कॉलेजों की अधिकता भी है कम प्रवेश का कारण
जिले में तीन अनुदानित कॉलेज और 42 स्ववित्तपोषित महाविद्यालय हैं। सभी स्ववित्तपोषित महाविद्यालय किस्तों में फीस लेते हैं, ऐसे में शुल्क जमा करने में आसानी होने पर प्रवेशार्थी स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों की ओर रुख रहे हैं। वहीं, अनुदानित महाविद्यालयों में शिक्षक ग्रीष्मावकाश पर हैं, यहां प्रवेशार्थियों को प्रवेश के संबंध में कोई सही जानकारी देने वाला नहीं है।
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मां पाटेश्वरी राज्य विश्वविद्यालय की ओर से स्नातक व परास्नातक प्रथम सेमेस्टर के प्रवेश समर्थ पोर्टल के माध्यम से कराने का निर्णय लिया गया है। 14 जून को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने किसान पीजी कॉलेज में जिले के सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ बैठक कर समर्थ पोर्टल के माध्यम से प्रवेश कराने के निर्देश दिए थे। लगभग 12 दिन बाद प्रवेश प्रक्रिया की गति काफी धीमी है।
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इन कारणों से नहीं हो पा रहे प्रवेश
स्थानीय स्तर पर प्रवेश प्रक्रिया में बाधा आने का कारण तकनीकी मामले बताए जा रहे हैं। इनमें कहीं उम्र कम होने के कारण तो कहीं सर्वर आदि की समस्या के कारण छात्र-छात्राओं को निराश होना पड़ रहा है। कई छात्र-छात्राओं ने इस वर्ष इंटरमीडिएट उत्तीर्ण होने के बाद प्रवेश के लिए आवेदन किया, लेकिन उनका जन्म वर्ष 2009 होने के कारण वे अर्हता पूरी नहीं करते हैं। इस वजह से वे ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
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कॉलेजों की अधिकता भी है कम प्रवेश का कारण
जिले में तीन अनुदानित कॉलेज और 42 स्ववित्तपोषित महाविद्यालय हैं। सभी स्ववित्तपोषित महाविद्यालय किस्तों में फीस लेते हैं, ऐसे में शुल्क जमा करने में आसानी होने पर प्रवेशार्थी स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों की ओर रुख रहे हैं। वहीं, अनुदानित महाविद्यालयों में शिक्षक ग्रीष्मावकाश पर हैं, यहां प्रवेशार्थियों को प्रवेश के संबंध में कोई सही जानकारी देने वाला नहीं है।