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6.5 डिग्री पर लुढ़का पारा, गलन से लोग बेहाल
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Thu, 17 Dec 2015 09:53 PM IST
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बहराइच। तराई का पारा गिरता जा रहा है। बुधवार रात में पारा अब तक के सबसे न्यूनतम स्तर 6.5 डिग्री सेल्यिस पहुंच गया है। इसके चलते गलन बढ़ गई है।
गुरुवार सुबह कोहरे के बीच हुई और फिर पूरे दिन धुंध की चपेट में तराई रही। दोपहर में हल्की धूप निकली, लेकिन राहत नहीं मिली।
बुधवार रात से ही घना कोहरा शुरू हो गया। एक बजे के आसपास न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह नौ बजे तक लोग घने कोहरे से परेशान रहे।
इस बीच लोग लाइट जलाकर गाड़ी चलाते हुए धीमी रफ्तार में गुजरे। प्रात:कालीन ट्रेनें भी कोहरे के चलते देरी से संचालित हुईं। कोहरा छंटने के बाद भी धुंध पूरे दिन बरकरार रही।
11 बजे के आसपास मामूली धूप निकली लेकिन ठिठुरन और गलन से बेहाल लोगों को राहत नहीं मिली। पछुवा हवाएं पांच किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलीं। सबसे अधिक दिक्कत सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों और मजदूरीपेशा वर्ग के लोगों को हुई।
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फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि तराई का तापमान और गिरेगा। उन्होंने कहा कि हल्की बदली और कोहरे का दौर जारी रहने के आसार हैं। ठंड और बढ़ेगी।
नहीं जले अलाव, कांप रहे लोग
शहर में 18 चौराहों पर ठंड शुरू होते ही प्रतिवर्ष अलाव की व्यवस्था जिला प्रशासन और नगर पालिका की ओर से की जाती थी लेकिन अब तक शहर और कस्बों में अलाव नहीं जलवाए गए हैं।
इस कारण सबसे अधिक दिक्कत रात में राहगीरों व सड़क किनारे रात बिताने वाले रिक्शा चालकों तथा मजदूरी पेशा वर्ग के लोगों को हो रही है।
आलम यह है कि ठंड से कांपने वाले लोग कूड़े के ढेर को इकट्ठा कर पॉलीथिन, कागज व कूड़े की अन्य सामग्री जलाकर ठंड दूर करने की कोशिश करते हैं।
रैन बसेरे में भी लटक रहे ताले
अब तक रैन बसेरे के ताले नहीं खुल सके हैं न ही वैकल्पिक रैन बसेरे की व्यवस्था सार्वजनिक स्थलों पर की गई है। इसके चलते रेलवे स्टेेशन, बस अड्डा और जिला अस्पताल आदि स्थानों पर लोग कांपने को मजबूर हैं। गौरतलब हो कि प्रतिवर्ष शहर में आधा दर्जन रैन बसेरे स्थापित किए जाते थे।
नगर पंचायत व पालिका प्रशासन को दिए गए निर्देश
अपर जिलाधिकारी विद्याशंकर सिंह का कहना है कि तराई में ठंड को देखते हुए नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत प्रशासन को अलाव की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। रात में निरीक्षण भी किया जाएगा।
अगर अलाव जलता नहीं मिला तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि स्थायी रैन बसेरे में भी ठंड से बचाव का इंतजाम करवाने के लिए क्षेत्रीय उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
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गुरुवार सुबह कोहरे के बीच हुई और फिर पूरे दिन धुंध की चपेट में तराई रही। दोपहर में हल्की धूप निकली, लेकिन राहत नहीं मिली।
बुधवार रात से ही घना कोहरा शुरू हो गया। एक बजे के आसपास न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह नौ बजे तक लोग घने कोहरे से परेशान रहे।
इस बीच लोग लाइट जलाकर गाड़ी चलाते हुए धीमी रफ्तार में गुजरे। प्रात:कालीन ट्रेनें भी कोहरे के चलते देरी से संचालित हुईं। कोहरा छंटने के बाद भी धुंध पूरे दिन बरकरार रही।
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11 बजे के आसपास मामूली धूप निकली लेकिन ठिठुरन और गलन से बेहाल लोगों को राहत नहीं मिली। पछुवा हवाएं पांच किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलीं। सबसे अधिक दिक्कत सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों और मजदूरीपेशा वर्ग के लोगों को हुई।
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फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि तराई का तापमान और गिरेगा। उन्होंने कहा कि हल्की बदली और कोहरे का दौर जारी रहने के आसार हैं। ठंड और बढ़ेगी।
नहीं जले अलाव, कांप रहे लोग
शहर में 18 चौराहों पर ठंड शुरू होते ही प्रतिवर्ष अलाव की व्यवस्था जिला प्रशासन और नगर पालिका की ओर से की जाती थी लेकिन अब तक शहर और कस्बों में अलाव नहीं जलवाए गए हैं।
इस कारण सबसे अधिक दिक्कत रात में राहगीरों व सड़क किनारे रात बिताने वाले रिक्शा चालकों तथा मजदूरी पेशा वर्ग के लोगों को हो रही है।
आलम यह है कि ठंड से कांपने वाले लोग कूड़े के ढेर को इकट्ठा कर पॉलीथिन, कागज व कूड़े की अन्य सामग्री जलाकर ठंड दूर करने की कोशिश करते हैं।
रैन बसेरे में भी लटक रहे ताले
अब तक रैन बसेरे के ताले नहीं खुल सके हैं न ही वैकल्पिक रैन बसेरे की व्यवस्था सार्वजनिक स्थलों पर की गई है। इसके चलते रेलवे स्टेेशन, बस अड्डा और जिला अस्पताल आदि स्थानों पर लोग कांपने को मजबूर हैं। गौरतलब हो कि प्रतिवर्ष शहर में आधा दर्जन रैन बसेरे स्थापित किए जाते थे।
नगर पंचायत व पालिका प्रशासन को दिए गए निर्देश
अपर जिलाधिकारी विद्याशंकर सिंह का कहना है कि तराई में ठंड को देखते हुए नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत प्रशासन को अलाव की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। रात में निरीक्षण भी किया जाएगा।
अगर अलाव जलता नहीं मिला तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि स्थायी रैन बसेरे में भी ठंड से बचाव का इंतजाम करवाने के लिए क्षेत्रीय उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है।