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यूक्रेन से लौटे छात्रों को भविष्य की चिंता, सरकार से मदद की आस

Sun, 13 Mar 2022 11:34 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 13 Mar 2022 11:34 PM IST
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Students returned from Ukraine worry about the future, hope for help from the government
बहराइच। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते पढ़ाई बीच में छोड़कर घर वापस लौटे जिले के मेडिकल छात्र अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं। छात्रों को पढ़ाई बाधित होने व युद्ध के चलते यूक्रेन में उत्पन्न हुई विषम परिस्थितियों के चलते भविष्य अंधकारमय लग रहा है। सभी छात्र केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर आसा भरी नजरों से देख रहे हैं। वहीं बच्चों की पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च कर चुके उनके अभिभावक भी बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। कई अभिभावक तो युद्ध समाप्त होने के बाद भी बच्चों को भेजने के पक्ष में नजर नहीं आ रहे है। वहीं कुछ ऐसे अभिभावक जिन्होंने बैंक से लोन लेकर बच्चे का भविष्य संवारने का ठाना था, वह और भी ज्यादा चिंतित हैं। यूक्रेन से सकुशल जिला वापस आए 15 छात्रों में से कुछ छात्रों से उनके भविष्य को लेकर बातचीत की है, प्रस्तुत है रिपोर्ट-
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बस पूरी होने वाली थी पढ़ाई और अंधेरे में हो गया भविष्य
यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे फखरपुर निवासी एमबीबीएस छात्र अंकित अवस्थी ने बताया कि उनकी पढ़ाई पूरी होने वाली थी। उनका आठवां सेमेस्टर था। पढ़ाई पूरी होने को लेकर घर-परिवार में खुशी का माहौल था। लेकिन अचानक शुरू हुए युद्ध ने सब बदल दिया। सारी खुशियां गम में बदल गई है। जब से वापस आए हैं, बस यही लगता है, कि अब भविष्य में क्या होगा। केंद्र सरकार को चाहिए कि देश में ही सभी छात्रों के लिए कोई व्यवस्था करे। ताकि हमारा भविष्य संवर सके।
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सरकार यूनिवर्सिटी ट्रांसफर करवाए या कहीं सीट दे
यूक्रेन के खारकीव नेशनल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे शहर क्षेत्र के घसियारीपुरा निवासी छात्र युवराज सोनी ने बताया कि उनका चौथा सेमेस्टर चल रहा है। परिवार के लोगों ने पाई-पाई जोड़कर उम्मीद के साथ उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद देकर पढ़ाई के लिए भेजा था, लेकिन अब लग रहा है, कि सब बर्बाद हो गया। युद्ध लगातार जारी है। ऐसे में यूक्रेन के हालात निकट भविष्य में और भी खराब होते दिख रहे हैं। इसलिए सरकार को चाहिए कि यूनिवर्सिटी को ट्रांसफर करवाए या यूक्रेन से लौटे सभी छात्रों को सहीं मेडिकल सीट दिलवाए।
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डीएम ने दिया है मदद का आश्वासन
हुजुरपुर निवासी यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्र रवीन्द्र शुक्ला ने बताया कि भविष्य को लेकर चिंताएं हैं, लेकिन सरकार पर भरोसा भी है। उन्होंने बताया कि यूक्रेन से आने के बाद जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने सभी छात्रों को बुलाकर बातचीत की और हम सभी को भविष्य को लेकर आश्वस्त किया है। डीएम ने केंद्र व प्रदेश सरकार से बातचीत कर यहीं कॉलेज की व्यवस्था करवाने को भी कहा है। वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी सरकार बनने पर भविष्य के लिए कार्य करने का आश्वासन दिया था, अब सरकार बन गई है तो उनसे भी उम्मीदें हैं।
अगले हफ्ते से ऑनलाइन क्लास का मेल आया, फिर भी चिंता
मोतीपुर तहसील के बलसिंहपुर निवासी एमबीबीएस छात्र आदित्य वर्मा ने बताया कि अभी भविष्य को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं है। दिन रात बस चिंता में कट रहा है। कॉलेज प्रशासन की ओर से अगले हफ्ते से ऑनलाइन कक्षाएं चलने का मेल आया है, लेकिन वहां जारी बमबारी को देखते हुए ऐसा मुमकिन नहीं लग रहा है। सरकार भी अभी कुछ स्पष्ट नहीं कर रही है, इसलिए चिंता और बढ़ गई है।

छात्रों से ज्यादा उनके अभिभावक चिंतित
हर मां-बाप का सपना होता है कि उनका बेटा उनसे अधिक नाम कमाए और तरक्की करे। ऐसा ही सपना संजोकर जिले के 15 अभिभावकों ने अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए यूक्रेन भेजा था, लेकिन युद्ध ने उनके सपने को झकझोर दिया है। सभी अभिभावक बच्चों के भविष्य को लेकर परेशान हैं। मोतीपुर निवासी छात्र आदित्य वर्मा के पिता प्रहलाद वर्मा ने बताया युद्ध बंद होने पर हालात अगर सही हुए तो बेटे को आगे की पढ़ाई के लिए भेजने की सोच रहे हैं, लेकिन मन में डर भी है। वहां के हालातों को देखते हुए बच्चे का भविष्य सुरक्षित नहीं लग रहा। हुजूरपुर निवासी छात्र रवींद्र के पिता योगेंद्र शुक्ला ने बताया कि बैंक से लोन लेकर बेटे को पढ़ाई के लिए भेजा था। अब तक लगभग 21 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। सरकार पर पूरा भरोसा है, कि वह बच्चों का भविष्य अंधकारमय होने नहीं देगी। जैसे केंद्र सरकार ने अभियान चलाकर सभी बच्चों को उनके अभिभावकों से मिलाया है, उसी तरह उनके भविष्य को संवारने के लिए भी अभियान चलाएगी। घसियारी पुरा निवासी छात्र युवराज सोनी की मां सरलेश सोनी ने बताया कि सरकार से बहुत उम्मीदें हैं, बेटे को भेजने में अब डर लग रहा है। सरकार को चाहिए कि यहीं बच्चों के लिए सीट उपलब्ध करवाए। छात्र अंकित अवस्थी के बड़े भाई गौरव अवस्थी ने बताया कि सरकार बच्चों की आगे की पढ़ाई यहीं भारत में पूरा करवाए। यूक्रेन के हालात अभी ठीक नहीं लग रहे। समय बीतने के साथ ही बच्चों का भविष्य अंधकार मय होता जाएगा।
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