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Bahraich News: मोबाइल कोर्ट में विसंगतियां देख भड़के राज्य आयुक्त
Fri, 20 Jun 2025 01:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Fri, 20 Jun 2025 01:13 AM IST
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बहराइच। जिले के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले दिव्यांगजनों की समस्याओं का निस्तारण कराए जाने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट के जनता दर्शन हाल में मोबाइल कोर्ट का आयोजन किया गया। इस मौके पर दिव्यांगजनों की समस्याओं की सुनवाई कर संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए गए।
मोबाइल कोर्ट में ज्यादातर मामले बधिर दिव्यांगता प्रमाणपत्र को लेकर सामने आए। सुनवाई के दौरान पाया गया कि दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए ओपीडी अथवा अन्य माध्यमों से आने वाले दिव्यांगजनों को केजीएमयू लखनऊ को संदर्भित किया जा रहा है जहां पूरे प्रदेश से आने वाले प्रकरणों की बहुलता के कारण दिव्यांगजनों को वर्षों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है जबकि मेडिकल बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत होने वाले प्रकरणों को जनपद श्रावस्ती के लिए रेफर किया जा रहा है।
इस स्थिति का कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य आयुक्त व उपायुक्त ने सीएमओ को निर्देश दिया कि दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने से संबंधित प्रकरणों को एक सप्ताह में निस्तारित कराया जाए। मोबाइल कोर्ट की मंशानुरूप सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने तत्काल सीएमओ श्रावस्ती से मोबाइल पर वार्ता कर दिव्यांगता जांच के लिए तिथि निर्धारित करने को कहा।
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सीएमओ श्रावस्ती द्वारा जांच के लिए 20 जून 2025 की तिथि निर्धारित करने पर निर्णय लिया गया कि सीएमओ कार्यालय बहराइच से एक वाहन बधिर दिव्यांगजनों को श्रावस्ती ले जाएगा।
राज्य आयुक्त, दिव्यांगजन, उत्तर प्रदेश प्रोफेसर हिमांशु शेखर झा ने कहा कि मोबाइल कोर्ट के आयोजन का मुख्य उद्देश्य यही है कि दिव्यांगजनों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर समयबद्ध ढंग से उनका गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कराया जाए।
इस अवसर पर सिटी मजिस्ट्रेट राजेश प्रसाद, डीडीओ राज कुमार, बीएसए आशीष कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता विद्युत शैलेंद्र कुमार, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग प्रदीप कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी श्रद्धा पांडेय, डीपीआरओ सर्वेश कुमार पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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मोबाइल कोर्ट में ज्यादातर मामले बधिर दिव्यांगता प्रमाणपत्र को लेकर सामने आए। सुनवाई के दौरान पाया गया कि दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए ओपीडी अथवा अन्य माध्यमों से आने वाले दिव्यांगजनों को केजीएमयू लखनऊ को संदर्भित किया जा रहा है जहां पूरे प्रदेश से आने वाले प्रकरणों की बहुलता के कारण दिव्यांगजनों को वर्षों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है जबकि मेडिकल बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत होने वाले प्रकरणों को जनपद श्रावस्ती के लिए रेफर किया जा रहा है।
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इस स्थिति का कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य आयुक्त व उपायुक्त ने सीएमओ को निर्देश दिया कि दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने से संबंधित प्रकरणों को एक सप्ताह में निस्तारित कराया जाए। मोबाइल कोर्ट की मंशानुरूप सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने तत्काल सीएमओ श्रावस्ती से मोबाइल पर वार्ता कर दिव्यांगता जांच के लिए तिथि निर्धारित करने को कहा।
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सीएमओ श्रावस्ती द्वारा जांच के लिए 20 जून 2025 की तिथि निर्धारित करने पर निर्णय लिया गया कि सीएमओ कार्यालय बहराइच से एक वाहन बधिर दिव्यांगजनों को श्रावस्ती ले जाएगा।
राज्य आयुक्त, दिव्यांगजन, उत्तर प्रदेश प्रोफेसर हिमांशु शेखर झा ने कहा कि मोबाइल कोर्ट के आयोजन का मुख्य उद्देश्य यही है कि दिव्यांगजनों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर समयबद्ध ढंग से उनका गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कराया जाए।
इस अवसर पर सिटी मजिस्ट्रेट राजेश प्रसाद, डीडीओ राज कुमार, बीएसए आशीष कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता विद्युत शैलेंद्र कुमार, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग प्रदीप कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी श्रद्धा पांडेय, डीपीआरओ सर्वेश कुमार पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।