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रुद्राभिषेक के साथ करें पार्थिव पूजन
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Fri, 31 Jul 2015 10:10 PM IST
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बहराइच। ऋतुओं में पावन माना जाने वाला सावन माह आज से शुरू हो रहा है। इसके लिए शहर व ग्रामीण अंचलों में स्थित शिवालयों में पूजन-अर्चन की विशेष व्यवस्था की गई है।
नियमित पूजन के साथ ही शिवभक्त रुद्राभिषेक और पार्थिव पूजन कर सकेंगे।
श्रावण माह भगवान शिव को प्रसन्न करने का विशेष महीना माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि सावन में भगवान शिव की आराधना और साधना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। शिवभक्तों में भी खासा उत्साह है।
भगवान की विशेष कृपा पाने के लिए भक्तों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। वहीं, शिव मंदिरों में भी पूजन अर्चन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
शहर के सिद्धनाथ मंदिर को पांडवकालीन माना जाता है। यहां के महंत रवि गिरि महाराज ने बताया कि भक्तों के लिए सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे।
जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पार्थिव पूजन की व्यवस्थाएं की गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था भी मुस्तैद रहेगी, जिससे भक्तों को कोई तकलीफ न हो।
उधर, मटेरा में स्थित अति प्राचीन जंगलीनाथ मंदिर भी पांडवकालीन है। यहां साफ-सफाई का काम पूरा हो गया है। सुबह से भगवान शिव की आराधना शुरू होगी। वहीं, पयागपुर में स्थित बगेश्वरनाथ मंदिर में भी तैयारियां पूरी हो गई हैं।
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नियमित पूजन के साथ ही शिवभक्त रुद्राभिषेक और पार्थिव पूजन कर सकेंगे।
श्रावण माह भगवान शिव को प्रसन्न करने का विशेष महीना माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि सावन में भगवान शिव की आराधना और साधना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। शिवभक्तों में भी खासा उत्साह है।
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भगवान की विशेष कृपा पाने के लिए भक्तों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। वहीं, शिव मंदिरों में भी पूजन अर्चन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
शहर के सिद्धनाथ मंदिर को पांडवकालीन माना जाता है। यहां के महंत रवि गिरि महाराज ने बताया कि भक्तों के लिए सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे।
जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पार्थिव पूजन की व्यवस्थाएं की गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था भी मुस्तैद रहेगी, जिससे भक्तों को कोई तकलीफ न हो।
उधर, मटेरा में स्थित अति प्राचीन जंगलीनाथ मंदिर भी पांडवकालीन है। यहां साफ-सफाई का काम पूरा हो गया है। सुबह से भगवान शिव की आराधना शुरू होगी। वहीं, पयागपुर में स्थित बगेश्वरनाथ मंदिर में भी तैयारियां पूरी हो गई हैं।
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