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दिमागी बुखार से छह की मौत, नौ लाचार
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Thu, 26 Nov 2015 09:45 PM IST
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बहराइच। दिमागी बुखार बहराइच में जानलेवा बना है लेकिन स्वास्थ्य महकमा इससे मौत होने की बात से किनारा करता रहा।
अब शासन ने इंटीग्रेटेड सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) से क्रॉस चेकिंग करवाई तो दिमागी बुखार से छह मौतों का खुलासा हुआ है, जबकि इसके कहर से नौ बच्चे निशक्त हो गए।
इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। महकमे ने पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिलाने के लिए शासन में पैरवी शुरू की है।
तराई में प्रतिवर्ष जून से अक्तूबर तक जापानी इंसेफेलाइटिस व एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (जेई, एईएस) का कहर मासूमों पर बरपता है। वर्ष 1995 से शुरू यह सिलसिला बदस्तूर जारी है।
इस वर्ष भी दिमागी बुखार की चपेट में आकर मासूमों की जान जाती रही लेकिन महकमे के जिम्मेदार मामला छिपाते रहे। जब शिकायत हुई और मामला शासन स्तर पर गूंजा तो विभाग ने जांच शुरू करवाई।
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विभाग ने तीन चक्रों में 83 पीड़ित बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया। इस दौरान 55 बच्चे दिमागी बुखार से पीड़ित मिले लेकिन मौत के तथ्यों को नकार दिया गया।
संक्रमण काल बीतने के 30 दिन पहले शासन के निर्देश पर इंटीग्रेटेड सर्विलांस प्रोग्राम के तहत विभाग की विशेष टीम ने पीड़ित बच्चों की मौजूदा हालत का आंकलन करने के लिए फॉलोअप शुरू किया।
करीब एक महीने तक चले इस सर्वे में दिमागी बुखार से छह बच्चों की मौत सामने आई। एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से पांच और एक मौत जापानी इंसेफेलाइटिस से हुई है।
वहीं, विभाग के मुताबिक नौ ऐसे बच्चे मिले हैं, जो तेज बुखार के प्रकोप सेे उबर तो गए लेकिन मानसिक व शारीरिक रूप से अक्षम हो गए हैं। इनकी निशक्तता भी 60 से 90 फीसदी से अधिक है।
तथ्यों को छिपाने की खूब हुई कोशिश
दिमागी बुखार की रोकथाम के लिए न तो एहतियात के तौर पर पहले कोई कदम उठाया गया और न ही इलाज के लिए समुचित इंतजाम। यहां तक कि दिमागी बुखार से पीड़ितों की जांच में भी भारी हीलाहवाली बरती गई।
रिपोर्ट में ऐसे कई नाम सामने आए हैं, जिन्हें अस्पताल ने ठीक बताकर डिस्चार्ज कर दिया लेकिन जांच के दौरान उनकी मौत की पुष्टि हुई है।
अब सवाल ये है कि जब उनकी बीमारी ठीक नहीं हुई थी, तो अस्पताल प्रबंधन ने डिस्चार्ज क्यों कर दिया। वहीं, कुछ अभिभावक अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं से मुंह मोड़कर निजी अस्पताल गए लेकिन फिर भी वे अपने बच्चो को स्वस्थ नहीं करा पाए। ये बच्चे मानसिक व शारीरिक रूप से अक्षम हो गए हैं।
निशक्तों को मिलेंगे एक लाख रुपये
इंसेफेलाइटिस या दिमागी बुखार की चपेट में आकर मौत का शिकार हुए रोगियों के परिवारीजनों को पचास हजार रुपये सहायता के रूप में दिए जाएंगे। जो बच्चे निशक्त हो गए उन्हें एक लाख रुपये मिलेंगे।
विभाग ने स्वास्थ्य निदेशालय को 12 लाख रुपये की डिमांड भेजी है। लेकिन, कब दिए जाएंगे, यह अभी तक साफ नहीं हो सका है।
शीघ्र मिलेगा मुआवजा : सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. केबी जैन ने बताया कि जेई व एईएस की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। छह बच्चों की मौत हुई है और 9 बच्चे निशक्त हुए हैं। शीघ्र ही पीड़ितों के परिवार वालों को मुआवजा दिया जाएगा। शासन स्तर पर इसकी कवायद चल रही है।
दिमागी बुखार से इनकी हुई मौत
* मोहित (5) पुत्र राम मूरत निवासी तकिया, रामगांव
* अजीत कुमार (8) पुत्र रंगीलाल निवासी कोटवा बाजार, नानपारा
* किशन (6) पुत्र दिनेश निवासी शेखनपुरवा, खैरीघाट
* उमा (7) पुत्री सतीश कुमार निवासी कोल्हुवा, पयागपुर
* सुनील (5) आशाराम निवासी मंगलपुरवा, हरदी
* परी (1.8) पुत्री मस्तराम निवासी डोकनाहीपुरवा, पयागपुर
ये हो गए निशक्त
* अशरफ (3.5) पुत्र राजू निवासी नाजिरपुरा, नगर कोतवाली
* सुभाष (9) रिक्खीलाल निवासी बिसवां जैतापुर, बौंडी
* अभिषेक (10) पुत्र बसंतलाल निवासी गोलागंज, बौंडी
* रोहित (8) पुत्र रामू निवासी खैरिहा, विशेश्वरगंज
* बुधराम (10) पुत्र कंधईराम निवासी भया बेहटा, रामगांव
* गीता (12) पुत्री दिनेश कुमार निवासी शेखनपुरवा, खैरीघाट
* रजनी (7) पुत्री राजेंद्र प्रसाद निवासी बरदहा बाजार, खैरीघाट
* रोहित (10) पुत्र सुभाष निवासी सिरसई सलार, रिसिया
* सुनील (4) पुत्र राजू निवासी कटघरा, रिसिया
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अब शासन ने इंटीग्रेटेड सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) से क्रॉस चेकिंग करवाई तो दिमागी बुखार से छह मौतों का खुलासा हुआ है, जबकि इसके कहर से नौ बच्चे निशक्त हो गए।
इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। महकमे ने पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिलाने के लिए शासन में पैरवी शुरू की है।
तराई में प्रतिवर्ष जून से अक्तूबर तक जापानी इंसेफेलाइटिस व एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (जेई, एईएस) का कहर मासूमों पर बरपता है। वर्ष 1995 से शुरू यह सिलसिला बदस्तूर जारी है।
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इस वर्ष भी दिमागी बुखार की चपेट में आकर मासूमों की जान जाती रही लेकिन महकमे के जिम्मेदार मामला छिपाते रहे। जब शिकायत हुई और मामला शासन स्तर पर गूंजा तो विभाग ने जांच शुरू करवाई।
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विभाग ने तीन चक्रों में 83 पीड़ित बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया। इस दौरान 55 बच्चे दिमागी बुखार से पीड़ित मिले लेकिन मौत के तथ्यों को नकार दिया गया।
संक्रमण काल बीतने के 30 दिन पहले शासन के निर्देश पर इंटीग्रेटेड सर्विलांस प्रोग्राम के तहत विभाग की विशेष टीम ने पीड़ित बच्चों की मौजूदा हालत का आंकलन करने के लिए फॉलोअप शुरू किया।
करीब एक महीने तक चले इस सर्वे में दिमागी बुखार से छह बच्चों की मौत सामने आई। एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से पांच और एक मौत जापानी इंसेफेलाइटिस से हुई है।
वहीं, विभाग के मुताबिक नौ ऐसे बच्चे मिले हैं, जो तेज बुखार के प्रकोप सेे उबर तो गए लेकिन मानसिक व शारीरिक रूप से अक्षम हो गए हैं। इनकी निशक्तता भी 60 से 90 फीसदी से अधिक है।
तथ्यों को छिपाने की खूब हुई कोशिश
दिमागी बुखार की रोकथाम के लिए न तो एहतियात के तौर पर पहले कोई कदम उठाया गया और न ही इलाज के लिए समुचित इंतजाम। यहां तक कि दिमागी बुखार से पीड़ितों की जांच में भी भारी हीलाहवाली बरती गई।
रिपोर्ट में ऐसे कई नाम सामने आए हैं, जिन्हें अस्पताल ने ठीक बताकर डिस्चार्ज कर दिया लेकिन जांच के दौरान उनकी मौत की पुष्टि हुई है।
अब सवाल ये है कि जब उनकी बीमारी ठीक नहीं हुई थी, तो अस्पताल प्रबंधन ने डिस्चार्ज क्यों कर दिया। वहीं, कुछ अभिभावक अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं से मुंह मोड़कर निजी अस्पताल गए लेकिन फिर भी वे अपने बच्चो को स्वस्थ नहीं करा पाए। ये बच्चे मानसिक व शारीरिक रूप से अक्षम हो गए हैं।
निशक्तों को मिलेंगे एक लाख रुपये
इंसेफेलाइटिस या दिमागी बुखार की चपेट में आकर मौत का शिकार हुए रोगियों के परिवारीजनों को पचास हजार रुपये सहायता के रूप में दिए जाएंगे। जो बच्चे निशक्त हो गए उन्हें एक लाख रुपये मिलेंगे।
विभाग ने स्वास्थ्य निदेशालय को 12 लाख रुपये की डिमांड भेजी है। लेकिन, कब दिए जाएंगे, यह अभी तक साफ नहीं हो सका है।
शीघ्र मिलेगा मुआवजा : सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. केबी जैन ने बताया कि जेई व एईएस की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। छह बच्चों की मौत हुई है और 9 बच्चे निशक्त हुए हैं। शीघ्र ही पीड़ितों के परिवार वालों को मुआवजा दिया जाएगा। शासन स्तर पर इसकी कवायद चल रही है।
दिमागी बुखार से इनकी हुई मौत
* मोहित (5) पुत्र राम मूरत निवासी तकिया, रामगांव
* अजीत कुमार (8) पुत्र रंगीलाल निवासी कोटवा बाजार, नानपारा
* किशन (6) पुत्र दिनेश निवासी शेखनपुरवा, खैरीघाट
* उमा (7) पुत्री सतीश कुमार निवासी कोल्हुवा, पयागपुर
* सुनील (5) आशाराम निवासी मंगलपुरवा, हरदी
* परी (1.8) पुत्री मस्तराम निवासी डोकनाहीपुरवा, पयागपुर
ये हो गए निशक्त
* अशरफ (3.5) पुत्र राजू निवासी नाजिरपुरा, नगर कोतवाली
* सुभाष (9) रिक्खीलाल निवासी बिसवां जैतापुर, बौंडी
* अभिषेक (10) पुत्र बसंतलाल निवासी गोलागंज, बौंडी
* रोहित (8) पुत्र रामू निवासी खैरिहा, विशेश्वरगंज
* बुधराम (10) पुत्र कंधईराम निवासी भया बेहटा, रामगांव
* गीता (12) पुत्री दिनेश कुमार निवासी शेखनपुरवा, खैरीघाट
* रजनी (7) पुत्री राजेंद्र प्रसाद निवासी बरदहा बाजार, खैरीघाट
* रोहित (10) पुत्र सुभाष निवासी सिरसई सलार, रिसिया
* सुनील (4) पुत्र राजू निवासी कटघरा, रिसिया