{"_id":"5749ccdb4f1c1b544b690bab","slug":"sitapur-eye-hospital-sealed","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीतापुर आंख अस्पताल सील","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीतापुर आंख अस्पताल सील
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Sat, 28 May 2016 10:22 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विवादों से घिरा छह दशक पुराना सीतापुर आंख अस्पताल शनिवार को सील कर दिया गया। एसडीएम सदर व नगर मजिस्ट्रेट की अगुवाई में तहसीलदार ने अस्पताल कार्यालय, ओपीडी व मेन गेट पर ताला जड़ दिया। यह कार्रवाई डीएम के आदेश पर हुई। इससे हड़कंप मच गया है। कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
सीतापुर आंख अस्पताल नगर के चांदपुरा मोहल्ले में स्थित है। यह डिस्ट्रिक्ट आई रिलीव सोसायटी के तहत संचालित है। यह अस्पताल नवंबर 2012 से विवादों में था। कभी यहां तैनात कर्मियों के बकाया वेतन को लेकर तो कभी बॉयलाज व रजिस्ट्रेशन की वजह से।
पूर्व डीएम किंजल सिंह के निर्देश पर तत्कालीन सीएमओ डॉ आरके टंडन ने जिला अंधता निवारण अधिकारी डॉ. संजीव को जांच की जिम्मेदारी भी सौंपी थी। मामला कुछ दिनों तक ठप रहा। वर्ष 2014 में एक बार फिर से जांच का मुद्दा गरमाया।
विज्ञापन
तत्कालीन सीएमओ डॉ. केबी जैन ने डीएम अभय के निर्देेश पर जांच शुरु कराई लेकिन कुछ नतीजा नहीं निकला। इस बीच 19 दिसंबर 2015 को अस्पताल के संचालक डॉ. मनोहर सिंह का निधन हो गया। इसके बाद कर्मियों के दो गुट बन गए।
एक गुट ने शिकायतें करना शुरु किया तो दूसरे गुट पर बेहतर इलाज की आस में अस्पताल आने वाले मरीजों से वसूली के आरोप लगे। ऐसी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए डीएम अभय ने कड़े तेवर दिखाए।
शनिवार दोपहर दलबल के साथ मौके पर पहुंचे एसडीएम सदर बच्चेलाल, नगर मजिस्ट्रेट बीएन पांडेय, तहसीलदार धीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने अस्पताल भवन पर ताला लगा दिया। इस कार्रवाई अस्पताल कर्मियों में हड़कंप मच गया है।
विज्ञापन
सीतापुर आंख अस्पताल नगर के चांदपुरा मोहल्ले में स्थित है। यह डिस्ट्रिक्ट आई रिलीव सोसायटी के तहत संचालित है। यह अस्पताल नवंबर 2012 से विवादों में था। कभी यहां तैनात कर्मियों के बकाया वेतन को लेकर तो कभी बॉयलाज व रजिस्ट्रेशन की वजह से।
विज्ञापन
पूर्व डीएम किंजल सिंह के निर्देश पर तत्कालीन सीएमओ डॉ आरके टंडन ने जिला अंधता निवारण अधिकारी डॉ. संजीव को जांच की जिम्मेदारी भी सौंपी थी। मामला कुछ दिनों तक ठप रहा। वर्ष 2014 में एक बार फिर से जांच का मुद्दा गरमाया।
विज्ञापन
तत्कालीन सीएमओ डॉ. केबी जैन ने डीएम अभय के निर्देेश पर जांच शुरु कराई लेकिन कुछ नतीजा नहीं निकला। इस बीच 19 दिसंबर 2015 को अस्पताल के संचालक डॉ. मनोहर सिंह का निधन हो गया। इसके बाद कर्मियों के दो गुट बन गए।
एक गुट ने शिकायतें करना शुरु किया तो दूसरे गुट पर बेहतर इलाज की आस में अस्पताल आने वाले मरीजों से वसूली के आरोप लगे। ऐसी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए डीएम अभय ने कड़े तेवर दिखाए।
शनिवार दोपहर दलबल के साथ मौके पर पहुंचे एसडीएम सदर बच्चेलाल, नगर मजिस्ट्रेट बीएन पांडेय, तहसीलदार धीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने अस्पताल भवन पर ताला लगा दिया। इस कार्रवाई अस्पताल कर्मियों में हड़कंप मच गया है।