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तराई में साइबेरियन मेहमानों की दस्तक
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 30 Oct 2016 05:34 PM IST
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तराई में ठंड की आहट के साथ ही साइबेरियन मेहमानों की भी आमद शुरू हो गई है। नेपाल सीमा से सटे कतर्निया घाट की गेरुआ नदी व जंगल के मध्य झीलों में विदेशी मेहमानों की गूंज सुनाई देने लगी है। जिले की अन्य झील और तालाब भी साइबेरियन मेहमानों की आमद से गुलजार होने लगे हैं। फरवरी माह तक यह मेहमान नदी, तालाब और झीलों में प्रवास करेंगे।
तराई की आबोहवा साइबेरियन मेहमानों के लिए बेहतर मानी जाती है। ठंड की शुरुआत के साथ साइबेरियन मेहमान तराई में दस्तक देने लगते हैं। अक्तूबर माह के अंत में साइबेरियन मेहमानों की आमद शुरू हो जाती है। नवंबर से फरवरी तक साइबेरियन पक्षी हिमालय के तराई क्षेत्र के सीमावर्ती तालाब और झीलों में प्रवास करते हैं।
सबसे अधिक साइबेरियन पक्षी बहराइच के कतर्नियाघाट से होकर बहने वाली नदियों, नहरों व जंगल के निकट झीलों में प्रवास काल बिताते हैं। गर्मी की शुरुआत होते ही यह पक्षी पुन: हिमालय पार कर वतन लौट जाते हैं। चार महीने का यह प्रवास काल तराई के वातावरण को खुशनुमा बनाता है।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभारी प्रभागीय वनाधिकारी जेएन सिंह के मुताबिक कतर्नियाघाट व कोठियाघाट में इक्का दुक्का साइबेरियन पक्षियों की आमद होने लगी है। कलरव की गूंज सुनाई पड़ने लगी है। नवंबर माह के प्रथम सप्ताह तक बड़े पैमाने पर साइबेरियन मेहमानों की आमद से नदी और जंगल के तालाब गुलजार हो जाएंगे।
बताया कि साइबेरियन देशों के अलावा चीन व अन्य ठंडे देशों से 25 प्रजातियों के पक्षी भारतीय क्षेत्र में चार माह तक प्रवास करते हैं। इनमें लालसर, नीलसर, ब्राह्मीडक, सुरखाब, पिनटेन, फिशलिंग टिल्स, कामनकूट पक्षी लोगों के आकर्षण का केंद्र होते हैं।
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तराई की आबोहवा साइबेरियन मेहमानों के लिए बेहतर मानी जाती है। ठंड की शुरुआत के साथ साइबेरियन मेहमान तराई में दस्तक देने लगते हैं। अक्तूबर माह के अंत में साइबेरियन मेहमानों की आमद शुरू हो जाती है। नवंबर से फरवरी तक साइबेरियन पक्षी हिमालय के तराई क्षेत्र के सीमावर्ती तालाब और झीलों में प्रवास करते हैं।
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सबसे अधिक साइबेरियन पक्षी बहराइच के कतर्नियाघाट से होकर बहने वाली नदियों, नहरों व जंगल के निकट झीलों में प्रवास काल बिताते हैं। गर्मी की शुरुआत होते ही यह पक्षी पुन: हिमालय पार कर वतन लौट जाते हैं। चार महीने का यह प्रवास काल तराई के वातावरण को खुशनुमा बनाता है।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभारी प्रभागीय वनाधिकारी जेएन सिंह के मुताबिक कतर्नियाघाट व कोठियाघाट में इक्का दुक्का साइबेरियन पक्षियों की आमद होने लगी है। कलरव की गूंज सुनाई पड़ने लगी है। नवंबर माह के प्रथम सप्ताह तक बड़े पैमाने पर साइबेरियन मेहमानों की आमद से नदी और जंगल के तालाब गुलजार हो जाएंगे।
बताया कि साइबेरियन देशों के अलावा चीन व अन्य ठंडे देशों से 25 प्रजातियों के पक्षी भारतीय क्षेत्र में चार माह तक प्रवास करते हैं। इनमें लालसर, नीलसर, ब्राह्मीडक, सुरखाब, पिनटेन, फिशलिंग टिल्स, कामनकूट पक्षी लोगों के आकर्षण का केंद्र होते हैं।