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झोलाछाप के इलाज से गर्भवती की मौत
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Sun, 14 May 2017 11:22 PM IST
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आंबा गांव निवासी एक गर्भवती को प्रसव पीड़ा होने पर दो दिन पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। यहां से शुक्रवार की शाम को स्टाफ नर्स ने गर्भवती को प्रसव के लिए झोलाछाप पति के अस्पताल पर भेज दिया। वहां पर ड्रिप लगने के बाद गर्भवती की तबीयत और बिगड़ गई।
इस पर शनिवार की सुबह परिवारीजन फिर से महिला को पीएचसी लेकर पहुंचे। इसके बाद भी गर्भवती को जिला अस्पताल रेफर नहीं किया गया। देर शाम को हालत काफी बिगड़ने पर परिवारीजन गर्भवती को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोतीपुर पहुंचे। सीएचसी में इलाज शुरू होते ही गर्भवती की मौत हो गई।
परिवारीजनों ने महिला का अंतिम संस्कार कर दिया। इस मामले में परिवारीजनों ने चिकित्सक और स्टाफ नर्स की लापरवाही बताते हुए सीएमओ को पत्र भेजा है। सीएमओ ने मिहींपुरवा सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक को जांच सौंपी है।
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मिहींपुरवा अंतर्गत आंबा गांव कतर्नियाघाट सेंक्चुरी परिक्षेत्र में बसा हुआ है। गांव निवासी राजेंद्र मौर्या की पत्नी चुन्नी देवी (35) को गुरुवार देर रात प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इस पर परिवारीजनों ने शुक्रवार की भोर में चुन्नी को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आंबा में भर्ती करवाया।
वहां पर पीएचसी के चिकित्सक डॉ. आरके सिंह, स्टाफ नर्स संगीता और आशा बहू ने इलाज शुरू किया। स्टाफ नर्स ने प्रसव में देर होने की बात कहते हुए चुन्नी को इलाज के लिए अपने झोलाछाप पति पवन चौधरी के क्लीनिक पर शुक्रवार शाम को भेज दिया। क्लीनिक पर स्टाफ नर्स के पति ने चुन्नी को ड्रिप लगा दी। एक घंटे बाद गर्भवती के पूरे शरीर में सूजन आ गई और असहनीय पीड़ा शुरू हो गई।
इस पर परिवारीजनों ने स्टाफ नर्स से संपर्क किया तो उसने पति की क्लीनिक पर बेहतर इलाज का दावा किया। कोई लाभ न होने पर परिवारीजन चुन्नी को फिर से पीएचसी ले आए और जिला अस्पताल रेफर करने की मांग करने लगे। इसके बाद भी चिकित्सक और स्टाफ नर्स ने इस पर ध्यान नहीं दिया। परिवारीजन शनिवार देर शाम को हालत बिगड़ने पर बेहोशी की हालत में चुन्नी को लेकर सीएचसी मोतीपुर पहुंचे।
सीएचसी में डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन कुछ ही देर में चुन्नी ने दम तोड़ दिया। पति राजेंद्र का कहना है कि चिकित्सक और स्टाफ नर्स की लापरवाही के चलते जच्चा-बच्चा की मौत हुई है। उसने इस मामले में सीएमओ और अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को पत्र भेजकर शिकायत की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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इस पर शनिवार की सुबह परिवारीजन फिर से महिला को पीएचसी लेकर पहुंचे। इसके बाद भी गर्भवती को जिला अस्पताल रेफर नहीं किया गया। देर शाम को हालत काफी बिगड़ने पर परिवारीजन गर्भवती को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोतीपुर पहुंचे। सीएचसी में इलाज शुरू होते ही गर्भवती की मौत हो गई।
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परिवारीजनों ने महिला का अंतिम संस्कार कर दिया। इस मामले में परिवारीजनों ने चिकित्सक और स्टाफ नर्स की लापरवाही बताते हुए सीएमओ को पत्र भेजा है। सीएमओ ने मिहींपुरवा सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक को जांच सौंपी है।
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मिहींपुरवा अंतर्गत आंबा गांव कतर्नियाघाट सेंक्चुरी परिक्षेत्र में बसा हुआ है। गांव निवासी राजेंद्र मौर्या की पत्नी चुन्नी देवी (35) को गुरुवार देर रात प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इस पर परिवारीजनों ने शुक्रवार की भोर में चुन्नी को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आंबा में भर्ती करवाया।
वहां पर पीएचसी के चिकित्सक डॉ. आरके सिंह, स्टाफ नर्स संगीता और आशा बहू ने इलाज शुरू किया। स्टाफ नर्स ने प्रसव में देर होने की बात कहते हुए चुन्नी को इलाज के लिए अपने झोलाछाप पति पवन चौधरी के क्लीनिक पर शुक्रवार शाम को भेज दिया। क्लीनिक पर स्टाफ नर्स के पति ने चुन्नी को ड्रिप लगा दी। एक घंटे बाद गर्भवती के पूरे शरीर में सूजन आ गई और असहनीय पीड़ा शुरू हो गई।
इस पर परिवारीजनों ने स्टाफ नर्स से संपर्क किया तो उसने पति की क्लीनिक पर बेहतर इलाज का दावा किया। कोई लाभ न होने पर परिवारीजन चुन्नी को फिर से पीएचसी ले आए और जिला अस्पताल रेफर करने की मांग करने लगे। इसके बाद भी चिकित्सक और स्टाफ नर्स ने इस पर ध्यान नहीं दिया। परिवारीजन शनिवार देर शाम को हालत बिगड़ने पर बेहोशी की हालत में चुन्नी को लेकर सीएचसी मोतीपुर पहुंचे।
सीएचसी में डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन कुछ ही देर में चुन्नी ने दम तोड़ दिया। पति राजेंद्र का कहना है कि चिकित्सक और स्टाफ नर्स की लापरवाही के चलते जच्चा-बच्चा की मौत हुई है। उसने इस मामले में सीएमओ और अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को पत्र भेजकर शिकायत की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।