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23 दिन में हुई महज 7.78 फीसदी धान खरीद
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बहराइच के रिसिया में क्रय केंद्र पर हो रही धान की तौल।
- फोटो : BAHRAICH
बहराइच। किसानों से धान खरीद के लिए जिले में क्रय केंद्रों की स्थापना की गई है। इन क्रय केंद्रों को 1.5 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य दिया गया है। जिसके सापेक्ष अभी तक 8169 मीट्रिक टन खरीद ही की जा सकी है। लक्ष्य के सापेक्ष महज 7.78 फीसदी खरीद 23 दिन में हो सकी है। ऐसे में लक्ष्य के पूरा होने पर संकट मंडरा रहा है। वहीं किसान भी धान खरीद की धीमी रफ्तार से परेशान हैं।
मूल्य समर्थन योजना के तहत बहराइच जनपद में धान खरीद के लिए सात क्रय एजेंसियों के माध्यम से 89 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। शासन की ओर से जिले को धान खरीद के लिए एक लाख पांच हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया है। जिसके सापेक्ष अभी तक किसानों से महज 8169.70 मीट्रिक टन धान खरीद की जा सकी है।
किसानों का 6887 मीट्रिक टन कॉमन धान और 1282 मीट्रिक टन हाईब्रिड धान खरीदा गया है। नवंबर समाप्त होने में एक सप्ताह बचा है। मगर अभी तक प्रशासन 10 हजार के आंकड़े को भी नहीं छू सका है। धान खरीद की धीमी रफ्तार से किसान परेशान हैं। क्रय केंद्रों पर किसानों को कई बार चक्कर भी काटने पड़ते हैं। जिससे बचने के लिए किसान बिचौलिये और व्यापारियों को अपनी उपज बेचने में सहजता पाते हैं।
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धान खरीद की धीमी रफ्तार से लक्ष्य के पूरा होने पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि धान खरीद से जुड़े अधिकारी अगले सप्ताह तक बेहतर परिणाम आने की उम्मीद जता रहे हैं। इस बारे में डिप्टी आरएमओ संजीव कुमार सिंह का कहना है कि अभी किसान बाजार में धान कम लेकर पहुंच रहे हैं। जल्द ही खरीद तेज होने की संभावना है।
केंद्रों पर पड़ा 4900 मीट्रिक टन धान
क्रय केंद्रों पर धान रखने की जगह नहीं होती है। जिसके चलते प्रशासन की ओर से मिलों से अनुबंध किया जाता है। लेकिन क्रय केंद्रों से अभी तक महज 3268 मीट्रिक टन धान ही मिलों को भेजा गया है। 4900 मीट्रिक टन धान क्रय केंद्रों पर ही डंप है। खरीद से जुड़े सूत्रों का कहना है कि केंद्रों पर धान के डंप होने के कारण केंद्र प्रभारी किसानों को दो-चार दिन बाद आने की बात कहकर किनारा कस लेते हैं।
मिलें भी दिखा रही लापरवाही
प्रशासन की ओर से चावल मिलों को 3268 मीट्रिक टन धान भेजा जा चुका है। जिसके सापेेक्ष मिलों को कुटाई कर चावल प्रशासन को भेजना था। मगर अभी तक मिलों द्वारा 2190 मीट्रिक टन चावल ही उपलब्ध कराया गया है। उधर, एफसीआई भी चावल को लेने में आनाकानी कर रहा है। प्रशासन की ओर से मिलों के माध्यम से 916 मीट्रिक टन चावल एफसीआई के गोदाम पर भेजा गया है, लेकिन मिलों में 1274 मीट्रिक टन धान डंप पड़ा है।
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मूल्य समर्थन योजना के तहत बहराइच जनपद में धान खरीद के लिए सात क्रय एजेंसियों के माध्यम से 89 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। शासन की ओर से जिले को धान खरीद के लिए एक लाख पांच हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया है। जिसके सापेक्ष अभी तक किसानों से महज 8169.70 मीट्रिक टन धान खरीद की जा सकी है।
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किसानों का 6887 मीट्रिक टन कॉमन धान और 1282 मीट्रिक टन हाईब्रिड धान खरीदा गया है। नवंबर समाप्त होने में एक सप्ताह बचा है। मगर अभी तक प्रशासन 10 हजार के आंकड़े को भी नहीं छू सका है। धान खरीद की धीमी रफ्तार से किसान परेशान हैं। क्रय केंद्रों पर किसानों को कई बार चक्कर भी काटने पड़ते हैं। जिससे बचने के लिए किसान बिचौलिये और व्यापारियों को अपनी उपज बेचने में सहजता पाते हैं।
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धान खरीद की धीमी रफ्तार से लक्ष्य के पूरा होने पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि धान खरीद से जुड़े अधिकारी अगले सप्ताह तक बेहतर परिणाम आने की उम्मीद जता रहे हैं। इस बारे में डिप्टी आरएमओ संजीव कुमार सिंह का कहना है कि अभी किसान बाजार में धान कम लेकर पहुंच रहे हैं। जल्द ही खरीद तेज होने की संभावना है।
केंद्रों पर पड़ा 4900 मीट्रिक टन धान
क्रय केंद्रों पर धान रखने की जगह नहीं होती है। जिसके चलते प्रशासन की ओर से मिलों से अनुबंध किया जाता है। लेकिन क्रय केंद्रों से अभी तक महज 3268 मीट्रिक टन धान ही मिलों को भेजा गया है। 4900 मीट्रिक टन धान क्रय केंद्रों पर ही डंप है। खरीद से जुड़े सूत्रों का कहना है कि केंद्रों पर धान के डंप होने के कारण केंद्र प्रभारी किसानों को दो-चार दिन बाद आने की बात कहकर किनारा कस लेते हैं।
मिलें भी दिखा रही लापरवाही
प्रशासन की ओर से चावल मिलों को 3268 मीट्रिक टन धान भेजा जा चुका है। जिसके सापेेक्ष मिलों को कुटाई कर चावल प्रशासन को भेजना था। मगर अभी तक मिलों द्वारा 2190 मीट्रिक टन चावल ही उपलब्ध कराया गया है। उधर, एफसीआई भी चावल को लेने में आनाकानी कर रहा है। प्रशासन की ओर से मिलों के माध्यम से 916 मीट्रिक टन चावल एफसीआई के गोदाम पर भेजा गया है, लेकिन मिलों में 1274 मीट्रिक टन धान डंप पड़ा है।