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Bahraich News: जंगल सफारी में दिखा एक सींग वाला गैंडा
Tue, 06 Jan 2026 01:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Tue, 06 Jan 2026 01:31 AM IST
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कतर्नियाघाट जंगल में पर्यटकों को दिखा गैंडा। - स्रोत : पर्यटक
बिछिया। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग से सैलानियों के लिए बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। वन विभाग की लगातार मेहनत और स्वयंसेवी संस्थाओं के जागरूकता प्रयासों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। जंगल सफारी और बोटिंग के दौरान अब बाघ, तेंदुआ और जंगली हाथियों के साथ-साथ एक सींग वाले दुर्लभ एशियाई गैंडे भी नजर आने लगे हैं।
सोमवार को लखनऊ से आए पर्यटक राजकुमार और उनके मित्रों को गेरुआ नदी पार के जंगल क्षेत्र में बोटिंग के दौरान भ्रमण करता हुआ गैंडा दिखाई दिया। अचानक सामने आए इस दृश्य ने पर्यटकों को रोमांचित कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गैंडा पूरी तरह स्वस्थ और प्राकृतिक अवस्था में जंगल में विचरण करता नजर आया। सभी ने अपने मोबाइल में दुर्लभ पल को कैद किया।
कतर्नियाघाट के वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ ने बताया कि गेरुआ पार के जंगलों में गैंडे लगातार देखे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि धूप निकलने के बाद अक्सर गैंडे नदी की ओर आ जाते हैं, जिससे बोटिंग और जंगल सफारी के दौरान उनके दिखाई देने की संभावना बढ़ जाती है।
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कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब के प्रमुख भगवान दास लखमानी ने बताया कि कतर्नियाघाट की जैव विविधता वन्य जीवों के लिए अत्यंत अनुकूल है। पिछले कुछ वर्षों में वन विभाग की सक्रियता और स्वयंसेवी संगठनों द्वारा किए गए जागरूकता अभियानों से स्थानीय लोगों में वन और वन्यजीव संरक्षण के प्रति सोच बदला है। इसका सकारात्मक असर यह हुआ है कि गैंडे जैसे दुर्लभ वन्यजीव सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
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सोमवार को लखनऊ से आए पर्यटक राजकुमार और उनके मित्रों को गेरुआ नदी पार के जंगल क्षेत्र में बोटिंग के दौरान भ्रमण करता हुआ गैंडा दिखाई दिया। अचानक सामने आए इस दृश्य ने पर्यटकों को रोमांचित कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गैंडा पूरी तरह स्वस्थ और प्राकृतिक अवस्था में जंगल में विचरण करता नजर आया। सभी ने अपने मोबाइल में दुर्लभ पल को कैद किया।
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कतर्नियाघाट के वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ ने बताया कि गेरुआ पार के जंगलों में गैंडे लगातार देखे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि धूप निकलने के बाद अक्सर गैंडे नदी की ओर आ जाते हैं, जिससे बोटिंग और जंगल सफारी के दौरान उनके दिखाई देने की संभावना बढ़ जाती है।
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कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब के प्रमुख भगवान दास लखमानी ने बताया कि कतर्नियाघाट की जैव विविधता वन्य जीवों के लिए अत्यंत अनुकूल है। पिछले कुछ वर्षों में वन विभाग की सक्रियता और स्वयंसेवी संगठनों द्वारा किए गए जागरूकता अभियानों से स्थानीय लोगों में वन और वन्यजीव संरक्षण के प्रति सोच बदला है। इसका सकारात्मक असर यह हुआ है कि गैंडे जैसे दुर्लभ वन्यजीव सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।