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Bahraich News: विश्व डॉल्फिन दिवस पर कम पानी में फंसी डॉल्फिन को मिली नई जिंदगी
Mon, 06 Oct 2025 01:04 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Mon, 06 Oct 2025 01:04 AM IST
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सरयू नहर में अटकी डॉल्फिन का रेस्क्यू करती वन विभाग की टीम। - स्रोत : विभाग
बहराइच/बिछिया। विश्व डॉल्फिन दिवस के अवसर पर कतर्नियाघाट रेंज के चौधरी चरण सिंह घाघरा बैराज के पास सरयू नहर में फंसी दुर्लभ गैंगेटिक डॉल्फिन का रविवार शाम छह बजे सफल रेस्क्यू किया गया। करीब 26 घंटे तक नहर में कम पानी के बीच संघर्ष करने के बाद डॉल्फिन सुरक्षित रूप से गेरुआ नदी के मुहाने तक पहुंच गई।
वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ ने बताया कि डॉल्फिन को नहर से बाहर निकाले बिना, प्राकृतिक जलप्रवाह के माध्यम से सुरक्षित निकाला गया। रेस्क्यू अभियान में वन विभाग, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम और स्थानीय ग्रामीणों ने सक्रिय सहयोग किया।
घटना शनिवार देर शाम तब सामने आई जब चार बजे के आसपास ग्रामीणों ने डॉल्फिन को नहर की शाखा में फंसा देखा। वनकर्मियों की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन रात होने के कारण रेस्क्यू शुरू नहीं हो सका।
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रविवार सुबह वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की विशेषज्ञ टीम ने नाव के माध्यम से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। बैराज के गेट बंद होने के कारण नहर में जलस्तर कम था, जिससे डॉल्फिन फंसी हुई थी।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने बताया कि अभियान के दौरान डॉल्फिन को सुरक्षित निकालने के हर प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस पर शाम पांच बजे नहर का गेट खोलवाकर जलस्तर बढ़वाया गया, तब एक घंटे बाद डॉल्फिन उछलकूद करते हुए गेरुआ नदी के मुहाने तक पहुंच गई।
रेस्क्यू अभियान में फील्ड असिस्टेंट मंसूर अली, वन दरोगा अवनीश कुमार, वन रक्षक अब्दुल सलाम, अन्नू शुक्ला, लक्ष्मण, गुलाम अहमद और कामता प्रसाद सहित कई वनकर्मी शामिल रहे। वन विभाग ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग की सराहना की।
वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि गैंगेटिक डॉल्फिन भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है और इसकी संख्या लगातार घट रही है। नहर में पानी छोड़ने के कारण ही डॉल्फिन को सुरक्षित निकाला जा सका। इस रेस्क्यू के साथ ही विश्व डॉल्फिन दिवस पर यह अभियान विशेष सफलता के रूप में दर्ज हुआ।
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वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ ने बताया कि डॉल्फिन को नहर से बाहर निकाले बिना, प्राकृतिक जलप्रवाह के माध्यम से सुरक्षित निकाला गया। रेस्क्यू अभियान में वन विभाग, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम और स्थानीय ग्रामीणों ने सक्रिय सहयोग किया।
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घटना शनिवार देर शाम तब सामने आई जब चार बजे के आसपास ग्रामीणों ने डॉल्फिन को नहर की शाखा में फंसा देखा। वनकर्मियों की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन रात होने के कारण रेस्क्यू शुरू नहीं हो सका।
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रविवार सुबह वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की विशेषज्ञ टीम ने नाव के माध्यम से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। बैराज के गेट बंद होने के कारण नहर में जलस्तर कम था, जिससे डॉल्फिन फंसी हुई थी।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने बताया कि अभियान के दौरान डॉल्फिन को सुरक्षित निकालने के हर प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस पर शाम पांच बजे नहर का गेट खोलवाकर जलस्तर बढ़वाया गया, तब एक घंटे बाद डॉल्फिन उछलकूद करते हुए गेरुआ नदी के मुहाने तक पहुंच गई।
रेस्क्यू अभियान में फील्ड असिस्टेंट मंसूर अली, वन दरोगा अवनीश कुमार, वन रक्षक अब्दुल सलाम, अन्नू शुक्ला, लक्ष्मण, गुलाम अहमद और कामता प्रसाद सहित कई वनकर्मी शामिल रहे। वन विभाग ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग की सराहना की।
वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि गैंगेटिक डॉल्फिन भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है और इसकी संख्या लगातार घट रही है। नहर में पानी छोड़ने के कारण ही डॉल्फिन को सुरक्षित निकाला जा सका। इस रेस्क्यू के साथ ही विश्व डॉल्फिन दिवस पर यह अभियान विशेष सफलता के रूप में दर्ज हुआ।