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बेरोजगारी से उबरने को निए सिरे से किया जाए शोध
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बहराइच। किसान पीजी कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग व सुधिरंजन लाहिड़ी महाविद्यालय नदिया पश्चिम बंगाल के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार कार्यक्रम का समापन हो गया। इस मौके पर सार्क क्षेत्रों में कोरोना महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के बारे में मंथन किया गया। इस दौरान बेरोजगारी से उबरने के लिए शोधार्थियों को नये सिरे शोध करने का सुझाव दिया गया।
कार्यक्रम का आरंभ करते हुए किसान पीजी कॉलेज के सचिव मेजर डॉ. एसपी सिंह ने अपने संबोधन में सार्क क्षेत्रों में कोरोना महामारी से उत्पन्न चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने दक्षेस के सदस्य राष्ट्रों के बीच उत्पन्न तनाव इस क्षेत्र के विकास में मुख्य अवरोध बताया। उन्होंने महामारी से उबरने के लिए देश के प्रधानमंत्री द्वारा सार्क कोविड आकस्मिक कोष बनाने सुझाव दिया, जिसमें सभी सदस्यों ने सहमति प्रदान की। अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में प्रथम दिन दक्षेस के विभिन्न देशों के विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए। बांग्लादेश के प्रोफेसर अब्दुल्ला वद्द ने इस क्षेत्र में व्यापार एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की बात कही।
श्रीलंका के प्रोफेसर महेशिका दिशायनके ने कोरोना महामारी से प्रभावित श्रीलंका के पर्यटन क्षेत्रों को उबारने के उपाय बताए। पाकिस्तान के प्रोफेसर खालिद मसूद ने कोविड-19 से पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव की चर्चा की। वेबिनार के दूसरे दिन किसान पीजी कॉलेज अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजबीर सिंह ने सार्क देशों पर कोरोना महामारी से व्याप्त बेरोजगारी पर चर्चा की। जिसमें उन्होंने बेरोजगारी से उबरने के लिए शोधार्थियों को नये सिरे शोध करने का सुझाव दिया। शिलांग के प्रोफेसर उत्पल कुमार डे ने भी कोरोना महामारी से उत्पन्न की समस्या पर अपना मत व्यक्त किया। नेपाल के प्रोफेसर रघुबीर विस्ता ने कोविड-19 से नेपाल की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभार पर चर्चा कर इससे उबरने के उपाय सुझाए। कार्यक्रम का संचालन सुधीरंजन लाहिड़ी महाविद्यालय नादिया पश्चिम बंगाल के प्रोफेसर अरिंदम चक्रवर्ती ने किया।
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कार्यक्रम का आरंभ करते हुए किसान पीजी कॉलेज के सचिव मेजर डॉ. एसपी सिंह ने अपने संबोधन में सार्क क्षेत्रों में कोरोना महामारी से उत्पन्न चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने दक्षेस के सदस्य राष्ट्रों के बीच उत्पन्न तनाव इस क्षेत्र के विकास में मुख्य अवरोध बताया। उन्होंने महामारी से उबरने के लिए देश के प्रधानमंत्री द्वारा सार्क कोविड आकस्मिक कोष बनाने सुझाव दिया, जिसमें सभी सदस्यों ने सहमति प्रदान की। अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में प्रथम दिन दक्षेस के विभिन्न देशों के विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए। बांग्लादेश के प्रोफेसर अब्दुल्ला वद्द ने इस क्षेत्र में व्यापार एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की बात कही।
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श्रीलंका के प्रोफेसर महेशिका दिशायनके ने कोरोना महामारी से प्रभावित श्रीलंका के पर्यटन क्षेत्रों को उबारने के उपाय बताए। पाकिस्तान के प्रोफेसर खालिद मसूद ने कोविड-19 से पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव की चर्चा की। वेबिनार के दूसरे दिन किसान पीजी कॉलेज अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजबीर सिंह ने सार्क देशों पर कोरोना महामारी से व्याप्त बेरोजगारी पर चर्चा की। जिसमें उन्होंने बेरोजगारी से उबरने के लिए शोधार्थियों को नये सिरे शोध करने का सुझाव दिया। शिलांग के प्रोफेसर उत्पल कुमार डे ने भी कोरोना महामारी से उत्पन्न की समस्या पर अपना मत व्यक्त किया। नेपाल के प्रोफेसर रघुबीर विस्ता ने कोविड-19 से नेपाल की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभार पर चर्चा कर इससे उबरने के उपाय सुझाए। कार्यक्रम का संचालन सुधीरंजन लाहिड़ी महाविद्यालय नादिया पश्चिम बंगाल के प्रोफेसर अरिंदम चक्रवर्ती ने किया।
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