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नानपारा चीनी मिल को 40 करोड़ का घाटा
अमर उजाला/बहराइच
Updated Sun, 21 May 2017 11:45 PM IST
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चीनी मिल
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नानपारा चीनी मिल वर्तमान पेराई सत्र में बेहतर गन्ना पेराई में रिकवरी हासिल करने के बावजूद 40 करोड़ रुपये के घाटे में चली गई है। पहले से ही यह चीनी मिल 3.97 अरब के घाटे में हैं। ऐसे में यह घाटा बढ़कर 4.50 अरब पहुंच गया है। इससे चीनी मिल संचालन पर संकट मंडरा रहा है। वहीं, कर्मचारी भी पशोपेश में हैं। उनके बोनस में बड़े पैमाने पर कटौती हुई है।
नानपारा में स्थित श्रावस्ती सहकारी चीनी मिल की स्थापना 1984 में हुई थी। वर्ष 2015-16 तक चीनी मिल 3.97 लाख 84 हजार के घाटे में थी। वर्ष 2016-17 में 31 लाख 34 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई हुई। गन्ना पेराई में चीनी का प्राप्त प्रतिशत 31.34 रहा।, जो बीते सत्र की अपेक्षा दो प्रतिशत अधिक था।
इसके बावजूद इस वर्ष चीनी मिल बंद होने के बाद अब जब हिसाब हुआ तो नानपारा चीनी मिल को 40 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। जबकि अभी 27 करोड़ 20 लाख रुपये किसानों के गन्ने का बकाया है। चीनी मिल को घाटा होने से कर्मचारियों के बोनस में बड़े पैमाने पर कटौती हुई है। लगभग प्रति कर्मचारी को 10 हजार का नुकसान हुआ है।
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चीनी मिल में घोटाले की भी बू आ रही है। एल्कोहल, एथनॉल व शीरा बिक्री में जमकर खेल किया गया है। भूसी खरीद में भी मानकों की अनदेखी की गई है। नानपारा चीनी मिल में आसवनी इकाई स्थापित है।
स आसवनी इकाई को इस बार एक करोड़ 39 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। इकाई में स्थापित एथनॉल प्लांट से उत्पादित एथनॉल वर्ष 2016-17 में सात लाख 12 हजार बल्क लीटर की बिक्री उत्तराखंड के लालकुंआ को की गई है। निर्धारित मूल्य से कम मूल्य पर एथनॉल की बिक्री हुई है। वहीं शीरा 457.70 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाना था। जबकि 546.28 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर खरीदा गया।
88.58 रुपये शीरा मंहगा खरीदे जाने से आसवनी इकाई को एक करोड़ 39 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। एथनॉल का बाजार रेट 38.69 पैसे है। जबकि बिक्री 34.56 रुपये में की गई। इससे 1.5 करोड़ का घाटा मिल को लगा। यही हाल भूसी खरीद का है। आजार में भूसी का रेट 270 रुपये प्रति क्विंटल है। जबकि मिल ने 390 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मनमाना टेंडर किया, जिसमें 70 लाख से अधिक का घाटा हुआ।
अध्यक्ष चीनी मिल कर्मचारी संघ यज्ञराम त्रिपाठी ने कहा कि चीनी मिल में मनमाने तरीके से कार्य हो रहे हैं। बाजार रेट से कम रेट पर एथनॉल की बिक्री की गई। शीरा और भूसी अधिक मूल्य पर खरीदी गई। घाटे में दिखाकर कर्मचारियों का बोनस प्रभावित हुआ। आधा दर्जन से अधिक अयोग्य लोगों की नियुक्तियां की गईं।
महाप्रबंधक चीनी मिल प्रमोद त्रिपाठी ने कहा कि चीनी मिल को घाटा जरूर हुआ है, इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। लेकिन एथनॉल, शीरा, भूसी आदि की खरीद और बिक्री का निर्णय एमडी स्तर से होता है। लखनऊ से जो आदेश मिलता है, उसी के अनुरूप काम करते हैं। मिल को घाटे से उबारने के लिए वार्ता चल रही है। नियुक्तियां और प्रोन्नति मानक के अनुरूप ही हुए।
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नानपारा में स्थित श्रावस्ती सहकारी चीनी मिल की स्थापना 1984 में हुई थी। वर्ष 2015-16 तक चीनी मिल 3.97 लाख 84 हजार के घाटे में थी। वर्ष 2016-17 में 31 लाख 34 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई हुई। गन्ना पेराई में चीनी का प्राप्त प्रतिशत 31.34 रहा।, जो बीते सत्र की अपेक्षा दो प्रतिशत अधिक था।
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इसके बावजूद इस वर्ष चीनी मिल बंद होने के बाद अब जब हिसाब हुआ तो नानपारा चीनी मिल को 40 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। जबकि अभी 27 करोड़ 20 लाख रुपये किसानों के गन्ने का बकाया है। चीनी मिल को घाटा होने से कर्मचारियों के बोनस में बड़े पैमाने पर कटौती हुई है। लगभग प्रति कर्मचारी को 10 हजार का नुकसान हुआ है।
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चीनी मिल में घोटाले की भी बू आ रही है। एल्कोहल, एथनॉल व शीरा बिक्री में जमकर खेल किया गया है। भूसी खरीद में भी मानकों की अनदेखी की गई है। नानपारा चीनी मिल में आसवनी इकाई स्थापित है।
स आसवनी इकाई को इस बार एक करोड़ 39 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। इकाई में स्थापित एथनॉल प्लांट से उत्पादित एथनॉल वर्ष 2016-17 में सात लाख 12 हजार बल्क लीटर की बिक्री उत्तराखंड के लालकुंआ को की गई है। निर्धारित मूल्य से कम मूल्य पर एथनॉल की बिक्री हुई है। वहीं शीरा 457.70 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाना था। जबकि 546.28 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर खरीदा गया।
88.58 रुपये शीरा मंहगा खरीदे जाने से आसवनी इकाई को एक करोड़ 39 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। एथनॉल का बाजार रेट 38.69 पैसे है। जबकि बिक्री 34.56 रुपये में की गई। इससे 1.5 करोड़ का घाटा मिल को लगा। यही हाल भूसी खरीद का है। आजार में भूसी का रेट 270 रुपये प्रति क्विंटल है। जबकि मिल ने 390 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मनमाना टेंडर किया, जिसमें 70 लाख से अधिक का घाटा हुआ।
अध्यक्ष चीनी मिल कर्मचारी संघ यज्ञराम त्रिपाठी ने कहा कि चीनी मिल में मनमाने तरीके से कार्य हो रहे हैं। बाजार रेट से कम रेट पर एथनॉल की बिक्री की गई। शीरा और भूसी अधिक मूल्य पर खरीदी गई। घाटे में दिखाकर कर्मचारियों का बोनस प्रभावित हुआ। आधा दर्जन से अधिक अयोग्य लोगों की नियुक्तियां की गईं।
महाप्रबंधक चीनी मिल प्रमोद त्रिपाठी ने कहा कि चीनी मिल को घाटा जरूर हुआ है, इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। लेकिन एथनॉल, शीरा, भूसी आदि की खरीद और बिक्री का निर्णय एमडी स्तर से होता है। लखनऊ से जो आदेश मिलता है, उसी के अनुरूप काम करते हैं। मिल को घाटे से उबारने के लिए वार्ता चल रही है। नियुक्तियां और प्रोन्नति मानक के अनुरूप ही हुए।