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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bahraich News ›   Medical Waste being thrown into the open

बहराइच में खुले में फेंका जा रहा मेडिकल कचरा

Wed, 01 Jul 2015 11:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच Updated Wed, 01 Jul 2015 11:06 PM IST
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उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने सीएमओ को नोटिस जारी कर मेडिकल वेस्ट मटेरियल व अपशिष्ट पदार्थ को नष्ट करने के लिए क्या इंतजाम हैं, इसकी जानकारी मांगी है। इससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। इस कवायद से पर्यावरण संरक्षण अधिनियमों का उल्लंघन करने वाले तमाम निजी नर्सिंग होम पर ताले लटक सकते हैं।
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जिला पुरुष व महिला अस्पताल के अलावा दस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व 14 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इसके अलावा 36 नर्सिंग होम व 30 पैथालोजी हैं। सरकारी अस्पताल हो या नर्सिंग होम सभी को संचालन से पूर्व संचालक को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जानकारी देनी होती हैै कि वे मेडिकल वेस्ट मटेरियल और अपशिष्ट पदार्थ के नष्ट करने के लिए क्या इंतजाम किए हैं।
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इसके लिए बकायदा सीएमओ व नर्सिंग होम संचालक को कचरा नष्ट करनेे वाली एजेंसी से अनुबंध करना पड़ता है। अनुबंधित एजेंसियां मटेरियल का कलेक्शन कर उन्हें नष्ट करने के लिए बाहर भेजती हैं लेकिन स्वास्थ्य महकमे ने निजी नर्सिंग होम का कचरा नष्ट करने के लिए एजेंसियों से अनुबंध नहीं किया है।
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इसका खुलासा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड फैजाबाद के क्षेत्रीय अधिकारी राम गोपाल के पत्र से हुआ है।  क्षेत्रीय अधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को नोटिस भेजकर मेडिकल वेस्ट मटेरियल के निस्तारण के बाबत अद्यतन कार्रवाई का ब्यौरा मांगा है।

अस्पतालों के संचालन पर उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड फैजाबाद के क्षेत्रीय अधिकारी राम गोपाल ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत जीव चिकित्सा अपशिष्ट नियम 1998 व संशोधित नियम 2000 एवं जल अधिनियम 1974 तथा वायु अधिनियम 1981 के तहत सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों व पैथोलॉजी संचालकों को बोर्ड से प्राधिकार पत्र हासिल करना अनिवार्य है। लेकिन, जिले के किसी सरकारी अस्पताल या निजी अस्पताल ने बोर्ड को इस बाबत जानकारी नहीं दी है और न ही जैव चिकित्सा अपशिष्ट निस्तारण प्रमाण पत्र हासिल किया है। बोर्ड अधिकारी ने अस्पतालों के संचालन पर सवाल उठाते हुए इस कृत्य को गैरकानूनी माना है। चेतावनी दी है कि यदि मेडिकल वेस्ट निस्तारण की व्यवस्था न हुई और न प्राधिकार पत्र हासिल किया गया तो विधिक कार्रवाई की जाएगी।

वेस्ट के निस्तारण को बनी थी योजना
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ माहेश्वरी पांडेय कहते हैं कि मेडिकल वेस्ट को वर्गीकृत कर फेंकने व रिसाइकल करने में आसानी हो, इसके लिए जिला अस्पताल में योजना बनाई गई थी। लखनऊ की स्पेक्ट्रम वेस्ट सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को मेडिकल कचरा निस्तारण के लिए अनुबंधित किया गया था लेकिन कंपनी के कर्मचारी कभी यहां नहीं आते हैं। इस बाबत कई बार पत्र भी लिखा गया लेकिन कार्रवाई नहीं हुई है। नगर पालिका परिषद के कर्मचारी वेस्ट मटेरियल को शहर से बाहर ले जाकर फेंकते हैं।

मेडिकल वेस्ट से फैल सकती हैं ये बीमारियां
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ आरबी सिंह के अनुसार खुले पड़े मेडिकल कचरे से निमोनिया, हैजा, कालरा, डेंगू, स्वाइन फ्लू, मेनेंजाइटिस, हेपेटाइटिस-बी व कैंसर जैसी बीमारियां फैल सकती हैं।


जल्द होगा समस्या का निदान
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ केबी जैन का कहना है कि बोर्ड का पत्र मिला है। मेडिकल वेस्ट मटेरियल के निस्तारण के लिए कवायद शुरू कर दी गई है। नर्सिंग होम संचालकों को भी नोटिस दिया जाएगा।
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