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Bahraich News: जिला प्रशासन व दरगाह प्रबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण होगा 15 मई का दिन

Wed, 07 May 2025 12:02 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Wed, 07 May 2025 12:02 AM IST
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May 15 will be a challenging day for the district administration and the Dargah management
बहराइच ​स्थित सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह।
बहराइच।
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सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर लगने वाले जेठ मेले को लेकर अब स्थिति स्पष्ट हो गई है। प्रशासन मेले की अनुमति नहीं दे रहा है, जबकि दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष बकाउल्ला खां की ओर से जारी पत्र में मेले में जायरीन आने पर उन्हें संभालने के लिए पुलिस बल मांगा गया है। ऐसे में दरगाह प्रबंध समिति व जिला प्रशासन में गतिरोध की आशंका है। यूं तो मेला 15 मई से शुरू होता है। ऐसे में यह दिन प्रशासन व प्रबंध समिति दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। हालांकि पुलिस व प्रशासन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर बिना अनुमति मेले के आयोजन पर पहले ही कार्रवाई की चेतावनी दे चुका है।
सैयद सालार मसूद गाजी की मजार पर पहली बरात रुदौली से आती है। मान्यता है कि जोहरा बीबी नाम की एक अंधी लड़की यहां जियारत करने आई थी। यहीं उसकी आंख की रोशनी आ गई। उसके बाद वह गाजी की मजार की सेवा करने लगी। परिवार के लोगों ने जब जोहरा बीबी से वापस चलने के लिए कहा तो उसने कहा कि जिसके दरबार में मुझे आंख की रोशनी मिली है अब वही हमारे सब कुछ हैं। इस पर जोहरा बीबी के परिजन उसके दहेज का सामान लाकर यहीं दे दे दिया। यहीं से बरात आने की परंपरा शुरू हुई। बाद में जोहरा बीबी के इंतकाल के बाद उसकी भी मजार गाजी की मजार के पास ही बनवा दी गई।
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दरगाह का कई शहरों से जुड़ाव
सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह का कई शहरों से जुड़ाव है। श्रावस्ती के दिकौली में बड़े मियां की मजार पर भी इसी माह मेला लगता है। इसके अतिरिक्त गोरखपुर में गाजी मियां की मजार पर भी जायरीन जियारत करने जाते हैं। इसके अलावा पूर्वांचल के कई जिलों में भी यहां के अनुयायी हैं।
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इतिहास के आईने में
इतिहासकार प्रो. राजेश्वर सिंह के अनुसार 11वीं से लेकर 21वीं शताब्दी तक चर्चा में रहे सैयद सालार मसूद गाजी के मेले के इतिहास को लेकर अलग-अलग तर्क दिए जाते रहे हैं। पौराणिक मान्यता है कि बहराइच को सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने बसाया था। पहले इसका नाम ब्रह्माइच था जो अपभ्रंश होकर बहराइच हो गया। यहां नौ ग्रहों का वास था। तीन नदियों का संगम और घने वनों से आच्छादित इस क्षेत्र में महर्षि बालार्क से लेकर मुनि अष्टावक्र ने आश्रम बनाया और भगवान बुद्ध ने भी यहां साधना की। यही कारण रहा कि जब विदेशी आक्रांताओं ने भारत की संपदा लूटने के साथ यहां की संस्कृति पर भी हमला बोलना शुरू किया तो 11वीं शताब्दी में महमूद गजनवी के निर्देश पर उसका भांजा सैयद सालार मसूद गाजी विशाल सेना लेकर यहां आया, लेकिन तब तक महाराजा सुहेलदेव ने हिन्दू राजाओं को संगठित कर गाजी की सेना का मुकाबला किया। घनघोर युद्ध में गाजी समेत पूरी सेना को मार गिराया। इसके बाद गाजी को इस्लाम धर्म का महापुरुष मानते हुए दरगाह स्थापित कराकर हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बताया गया।
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