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धूप मा पैदल चले से अच्छा है, बस में धक्का खाई के घरे पहुंच जाइ
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20 बीएचआर 14 - बहराइच में बाहर से बसों द्वारा आते प्रवासी कामगार व लोग।
- फोटो : BAHRAICH
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बहराइच। जब हम चले रहन तो लॉकडाउन नाय लाग रहा। बस चारों तरफ लाकडाउन लागै के चर्चा रहा। हम रास्ता मा रहेंन तो पता लाग कि लॉकडाउन लाग गवा। हम तो यही मारै पहले ही चल दिया रहा। हम सोचेन कि लॉकडाउन लाग जाइ तो केहू साथ न दी। फिर अपने प्रदेश जाएके पड़ी। यही लिए पहले चल दिया कि धूप में पैदल चले से अच्छा है कि बस में धक्का खाई के घरे पहुंच जाई। यह दर्द दिल्ली से बहराइच लौट प्रवासी मजदूर रमेश की है। वह बहराइच पहुंचकर राहत महसूस किए और कोरोना काल तक घर ही रहने की बात बताई।
देश में फिर से कोरोना ने विकराल रूप लेना शुरू कर दिया गया है। हालात यह है कि दिल्ली में लॉकडाउन लगा दिया गया और उत्तर प्रदेश में वीेकेंड लॉक डाउन की घोषणा कर दी गई। बढ़ते कोरोना केस को देखते हुए प्रवासी मजदूर इस बार पहले से ही कर्मस्थली को छोड़कर अपने प्रदेश लौटने लगे। भारी संख्या में लोग दिल्ली, मुबंई व अन्य राज्यों से आना शुरू कर दिए है। लखनऊ से बहराइच आने वाले बसों में खचाखच भीड़ दिखाई पड़ी। दिल्ली से आने वाले नवाबगंज ब्लॉक निवासी रमेश ने बताया कि जब हम लोग चले थे तो लॉकडाउन नहीं लगा था। उसके बाद भी ट्रेन व बस में जगह नहीं था। हम लोग सोचे कि अगर लॉकडाउन लग गया तो पता नाय बस चलै कि न चलै। ट्रेन चलै कि न चला। सब कुछ अचानक बंद होई जाई तो हम लोगन का पैदल ही अपने घरे जाइके पड़ी। पैदल चलै से बढ़िया है कि बस में धक्का खाए के घर पहुंच जावो और घर पहुंचकर कम से कम दोनों टाइम सुकून की दुई रोटी तो खाई कै मिली।
बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूरों के चेहरे पर कोरोना के चलते लॉकडाउन का दर्द साफ दिख रहा था। पिछले साल लॉकडाउन के दर्द को लोग भूल नहीं पाए है। इसीलिए इस बार समय से पहले ही अपने प्रदेश को लौट रहे है। कयास यह भी लगाया जा रहा है कि दिल्ली मेें लॉकडाउन लगने के बाद अब प्रवासी मजदूर और तेजी से वापस आएंगे।
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मिहीपुरवा तहसील क्षेत्र के ननकऊ ने रोडवेज बस स्टेशन पर बातचीत करते हुए बताया कि साहब हम लोगों के पास मजबूरी है। तभी अपना घर व परिवार छोड़कर दूसरे प्रदेश जाते है कमाने। वहां कुछ ज्यादा पैसा मिल जाता है। जिससे यहां परिवार का पालन-पोषण चलता रहता है। अब आगे भगवान मालिक है।
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देश में फिर से कोरोना ने विकराल रूप लेना शुरू कर दिया गया है। हालात यह है कि दिल्ली में लॉकडाउन लगा दिया गया और उत्तर प्रदेश में वीेकेंड लॉक डाउन की घोषणा कर दी गई। बढ़ते कोरोना केस को देखते हुए प्रवासी मजदूर इस बार पहले से ही कर्मस्थली को छोड़कर अपने प्रदेश लौटने लगे। भारी संख्या में लोग दिल्ली, मुबंई व अन्य राज्यों से आना शुरू कर दिए है। लखनऊ से बहराइच आने वाले बसों में खचाखच भीड़ दिखाई पड़ी। दिल्ली से आने वाले नवाबगंज ब्लॉक निवासी रमेश ने बताया कि जब हम लोग चले थे तो लॉकडाउन नहीं लगा था। उसके बाद भी ट्रेन व बस में जगह नहीं था। हम लोग सोचे कि अगर लॉकडाउन लग गया तो पता नाय बस चलै कि न चलै। ट्रेन चलै कि न चला। सब कुछ अचानक बंद होई जाई तो हम लोगन का पैदल ही अपने घरे जाइके पड़ी। पैदल चलै से बढ़िया है कि बस में धक्का खाए के घर पहुंच जावो और घर पहुंचकर कम से कम दोनों टाइम सुकून की दुई रोटी तो खाई कै मिली।
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बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूरों के चेहरे पर कोरोना के चलते लॉकडाउन का दर्द साफ दिख रहा था। पिछले साल लॉकडाउन के दर्द को लोग भूल नहीं पाए है। इसीलिए इस बार समय से पहले ही अपने प्रदेश को लौट रहे है। कयास यह भी लगाया जा रहा है कि दिल्ली मेें लॉकडाउन लगने के बाद अब प्रवासी मजदूर और तेजी से वापस आएंगे।
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मिहीपुरवा तहसील क्षेत्र के ननकऊ ने रोडवेज बस स्टेशन पर बातचीत करते हुए बताया कि साहब हम लोगों के पास मजबूरी है। तभी अपना घर व परिवार छोड़कर दूसरे प्रदेश जाते है कमाने। वहां कुछ ज्यादा पैसा मिल जाता है। जिससे यहां परिवार का पालन-पोषण चलता रहता है। अब आगे भगवान मालिक है।