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Bahraich News: गन्ने की कटी तो बस्तियों में पहुंच रहे तेंदुए, तराई में खौफ

Wed, 11 Feb 2026 12:02 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 11 Feb 2026 12:02 AM IST
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Leopards are reaching settlements after sugarcane harvest, creating fear in the Terai region
बहराइच में लगातार हमले कर रहे तेंदुए। - फोटो : बहराइच में लगातार हमले कर रहे तेंदुए।
मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट की तराई इन दिनों खौफ के साये में है। गन्ने की कटाई होने के साथ ही तेंदुओं की दुनिया उजड़ गई और गन्ने के खेतों को जंगल समझ रहे तेंदुए इंसानी बस्तियों में दस्तक दे रहे हैं। नतीजा अब लगातार हमलों के रूप में सामने आ रहा है। खेतों से निकले तेंदुओं की गांवों की चौखट तक पहुंच ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है।
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ग्रामीणों का कहना है कि गन्ने के घने खेत अब तक तेंदुओं के लिए जंगल जैसा सुरक्षित ठिकाना बने हुए थे। वहीं उन्हें शिकार भी मिल जाता था और इंसानों से दूरी भी बनी रहती थी, लेकिन कटाई के साथ ही यह सुरक्षा खत्म हो गई। अब बेघर हुए तेंदुए नए ठिकाने की तलाश में बस्तियों में घुस रहे हैं। शाम ढलते ही गांवों में सन्नाटा पसर जाता है। बच्चे घरों में कैद हैं, महिलाएं दरवाजे जल्दी बंद कर लेती हैं और पुरुष लाठी-टॉर्च लेकर पहरा देने को मजबूर हैं।
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कतर्नियाघाट के सीमावर्ती गांवों में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं। आंबा गांव निवासी रामलाल बताते हैं कि रात के सन्नाटे में तेंदुओं की गुर्राहट सुनाई देती है, जिससे लोग पूरी रात सो नहीं पाते। कई जगहों पर तेंदुओं के पदचिह्न घरों के पास तक मिले हैं। इससे यह साफ हो गया है कि खतरा अब सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहा। (संवाद)
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गन्ने के खेत को आवास की तरह इस्तेमाल कर रहे थे तेंदुए
वन विभाग भी हालात की गंभीरता को मान रहा है। प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित के अनुसार, तेंदुए लंबे समय से गन्ने को अस्थायी आवास की तरह इस्तेमाल कर रहे थे। कटाई से उनका ठिकाना छिन गया है, इसलिए वे आबादी के पास आ रहे हैं। उन्होंने खास तौर पर शाम चार बजे से रात आठ बजे के बीच सतर्क रहने की अपील की है, क्योंकि इसी समय तेंदुओं की गतिविधि सबसे ज्यादा देखी जा रही है।

बचाव और सुरक्षा के उपाय :
- शाम 4 बजे से रात 8 बजे के बीच बच्चों और बुजुर्गों को अकेले बाहर न निकलने दें।
- घरों, गलियों और आंगन में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था रखें।
- छोटे बच्चों को खेत, गन्ने के अवशेष या झाड़ियों के पास बिल्कुल न भेजें।
- रात के समय समूह में ही बाहर निकलें, अकेले आवाजाही से बचें।
- खेतों में अस्थायी झोपड़ी या मचान बनाकर रहने से परहेज करें।
- घरों के आसपास झाड़ीदार फसल, गन्ना या घनी घास न उगने दें।
- मवेशियों को रात में खुले में न बांधें, सुरक्षित बाड़े में रखें।
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