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तेंदुए के जोड़े ने आबादी में डाला डेरा
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मोतीपुर के झाला गांव में आबादी में घुसा तेंदुआ।
- फोटो : BAHRAICH
उर्रा (बहराइच)। कतर्निया के जंगल से निकलकर आए तेंदुए के जोड़े ने आबादी में डेरा जमा लिया। शुक्रवार को सुबह झाला-सेमरहना मार्ग पर तीन घंटे तक चहलकदमी करने के बाद तेंदुए का जोड़ा बख्शीपुरवा गांव पहुंच गया। दो तेंदुओं के आबादी में आने की जानकारी मिलने पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। गांव मेें तेंदुओं के आने से लोगों में दहशत व्याप्त हो गई। तेंदुए के जोड़े ने वन विभाग और पुलिस की टीम को लगभग 13 घंटे तक खूब छकाया। तेंदुओं के वापस लौटने की संभावना को देखते हुए मौके पर वन विभाग की टीम मुस्तैद कर दी गई है। पुलिस फोर्स भी तैनात है।
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के मोतीपुर रेंज अंतर्गत झाला-सेमरहना मार्ग की दूरी नैनिहा जंगल से महज 100 मीटर है। जंगल से शुक्रवार को सुबह करीब चार बजे तेंदुए का एक जोड़ा निकलकर मार्ग पर आ डटा। यह देख मार्ग पर आने-जाने वाले लोग दहशत में आ गए। यहां तीन घंटे तक गन्ने के खेत व अन्य स्थानों पर चहलकदमी करने के बाद तेंदुए का जोड़ा झाला गांव के मजरा बख्शीपुरवा में पहुंच गया।
तेंदुए के जोड़े के पहुंचने की सूचना पर आसपास गांवों के ग्रामीण भी एकत्र हो गए। ग्रामीणों को देखकर तेंदुए कुछ आक्रोशित भी हुए, लेकिन उन्होंने किसी पर भी हमला नहीं किया। मामले की सूचना मिलते ही जालिमनगर चौकी इंचार्ज हरीश सिंह व रेंजर मोतीपुर एके आर्या फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और आसपास के ग्रामीणों को किसी तरह समझा कर किनारे किया।
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तेंदुए के जोड़े के निकलने की सूचना पर प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह, वार्डेन एके पांडेय, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के मंसूर अली, आनंद प्रकाश, डिप्टी रेंजर शत्रोहन लाल, परशुराम त्रिपाठी और एसटीपीएफ की टीम मौके पर पहुंची। सुबह से लेकर देर शाम तक तेंदुए का जोड़ा इधर-उधर घूमता रहा। लगभग 13 घंटे तक वन विभाग की टीम तेंदुओं को पकड़ने का प्रयास करती रही, लेकिन तेंदुओं ने उनको खूब छकाया।
डीएफओ जीपी सिंह ने बताया कि जंगल से कुछ दूरी होने के कारण भटक कर तेंदुए का जोड़ा आबादी में पहुंचा है। मेटिंग का सीजन चल रहा है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। गांव के लोगों को पटाखे और अन्य सामान बांटा गया है। ग्रामीणों को समूह में निकलने की सलाह भी दी गई है।
खेतों में लगाया गया जाल व खाबड़
प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह ने बताया कि बख्शीपुरवा गांव में करीब 20 किसानों के खेत के किनारे-किनारे जाल लगा दिया गया है। इसके अलावा खाबड़ भी लगाया गया है। जिससे तेंदुए का जोड़ा वापस आबादी का रुख न कर सके। ग्रामीणों को इस ओर नहीं जाने की सलाह भी दी गई है। डीएफओ ने बताया कि शाम छह बजे तक तेंदुए का जोड़ा आबादी में नहीं दिखा है। ऐसे में उसके जंगल लौटने की भी संभावना हो सकती है।
वनकर्मियों की लगी ड्यूटी
डीएफओ जीपी सिंह ने बताया कि तेंदुए के जोड़े पर नजर रखने के लिए डिप्टी रेंजर शत्रोहन लाल की अगुवाई में वनकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। डिप्टी रेंजर खेतों की निगरानी करते हुए तेंदुओं के मूवमेंट पर नजर रखेंगे। तेंदुओं के मूवमेंट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
हो सकते हैं नर व मादा!
डीएफओ ने बताया कि बख्शीपुरवा गांव में दो तेंदुए आए हैं। जिनकी उम्र करीब तीन वर्ष है। ठंड शुरू हो गई है। ऐसे में नर और मादा के एक साथ बाहर निकलने की संभावना जतायी जा रही है। हालांकि यह उम्मीद ही है।
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कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के मोतीपुर रेंज अंतर्गत झाला-सेमरहना मार्ग की दूरी नैनिहा जंगल से महज 100 मीटर है। जंगल से शुक्रवार को सुबह करीब चार बजे तेंदुए का एक जोड़ा निकलकर मार्ग पर आ डटा। यह देख मार्ग पर आने-जाने वाले लोग दहशत में आ गए। यहां तीन घंटे तक गन्ने के खेत व अन्य स्थानों पर चहलकदमी करने के बाद तेंदुए का जोड़ा झाला गांव के मजरा बख्शीपुरवा में पहुंच गया।
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तेंदुए के जोड़े के पहुंचने की सूचना पर आसपास गांवों के ग्रामीण भी एकत्र हो गए। ग्रामीणों को देखकर तेंदुए कुछ आक्रोशित भी हुए, लेकिन उन्होंने किसी पर भी हमला नहीं किया। मामले की सूचना मिलते ही जालिमनगर चौकी इंचार्ज हरीश सिंह व रेंजर मोतीपुर एके आर्या फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और आसपास के ग्रामीणों को किसी तरह समझा कर किनारे किया।
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तेंदुए के जोड़े के निकलने की सूचना पर प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह, वार्डेन एके पांडेय, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के मंसूर अली, आनंद प्रकाश, डिप्टी रेंजर शत्रोहन लाल, परशुराम त्रिपाठी और एसटीपीएफ की टीम मौके पर पहुंची। सुबह से लेकर देर शाम तक तेंदुए का जोड़ा इधर-उधर घूमता रहा। लगभग 13 घंटे तक वन विभाग की टीम तेंदुओं को पकड़ने का प्रयास करती रही, लेकिन तेंदुओं ने उनको खूब छकाया।
डीएफओ जीपी सिंह ने बताया कि जंगल से कुछ दूरी होने के कारण भटक कर तेंदुए का जोड़ा आबादी में पहुंचा है। मेटिंग का सीजन चल रहा है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। गांव के लोगों को पटाखे और अन्य सामान बांटा गया है। ग्रामीणों को समूह में निकलने की सलाह भी दी गई है।
खेतों में लगाया गया जाल व खाबड़
प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह ने बताया कि बख्शीपुरवा गांव में करीब 20 किसानों के खेत के किनारे-किनारे जाल लगा दिया गया है। इसके अलावा खाबड़ भी लगाया गया है। जिससे तेंदुए का जोड़ा वापस आबादी का रुख न कर सके। ग्रामीणों को इस ओर नहीं जाने की सलाह भी दी गई है। डीएफओ ने बताया कि शाम छह बजे तक तेंदुए का जोड़ा आबादी में नहीं दिखा है। ऐसे में उसके जंगल लौटने की भी संभावना हो सकती है।
वनकर्मियों की लगी ड्यूटी
डीएफओ जीपी सिंह ने बताया कि तेंदुए के जोड़े पर नजर रखने के लिए डिप्टी रेंजर शत्रोहन लाल की अगुवाई में वनकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। डिप्टी रेंजर खेतों की निगरानी करते हुए तेंदुओं के मूवमेंट पर नजर रखेंगे। तेंदुओं के मूवमेंट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
हो सकते हैं नर व मादा!
डीएफओ ने बताया कि बख्शीपुरवा गांव में दो तेंदुए आए हैं। जिनकी उम्र करीब तीन वर्ष है। ठंड शुरू हो गई है। ऐसे में नर और मादा के एक साथ बाहर निकलने की संभावना जतायी जा रही है। हालांकि यह उम्मीद ही है।