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गोलहना में फिर तेंदुआ पिंजड़े में कैद
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मुर्तिहा रेंज के गोलहना गांव में पकड़ा गया तेंदुआ।
- फोटो : BAHRAICH
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उर्रा (बहराइच)। मुर्तिहा रेंज के गोलहना गांव में ग्रामीणों के लिए मुसीबत का सबब बना तेंदुआ बुधवार की रात करीब डेढ़ बजे पिंजड़े में कैद हो गया। वन विभाग की ओर से तेंदुए को रेंज कार्यालय लाया। यहां पर स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें तेंदुआ पूरी तरह से स्वस्थ मिला। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर तेंदुए को ट्रांस गेरुआ के जंगल में छोड़ा जाएगा। तेंदुए के पकड़े जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के मुर्तिहा रेंज में एक हफ्ते से तेंदुआ ग्रामीणों को परेशान कर रहा था। तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग ने पिंजड़ा लगाया। वन क्षेत्राधिकारी एके त्यागी ने बताया कि बुधवार की रात करीब डेढ़ बजे तेंदुआ पिंजड़े में कैद हो गया। कैद होने के बाद तेंदुआ गुर्राने लगा। कुछ देर बाद वनकर्मियों ने मौके पर जाकर देखा तो तेंदुआ पिंजड़े में कैद मिला। इस पर सूचना डीएफओ को दी। डीएफओ यशवंत सिंह के निर्देश पर तेंदुए को मुर्तिहा रेंज कार्यालय लाया गया। यहां पर पशु चिकित्सक डॉ. सर्वेश राय ने तेंदुए का स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसमें वह पूरी तरह स्वस्थ मिला। डीएफओ ने बताया कि तेंदुए के पकड़े जाने की सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई है। उनके निर्देश पर तेंदुए को कतर्नियाघाट के ट्रांस गेरुआ के जंगलों में छोड़ा जाएगा।
तो नर और मादा थे तेंदुआ
गोलहना गांव में बुधवार देर रात पकड़ा गया तेंदुआ पांच वर्ष का नर है, जबकि इससे पूर्व पकड़े गए दो तेंदुए मादा थे। इनमें एक मादा तेंदुआ व शावक को लखनऊ चिड़ियाघर भेजा गया है।
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गांव में अब तक पकड़े जा चुके पांच तेंदुए
डीएफओ यशवंत सिंह ने बताया कि 16 अगस्त को सबसे पहले एक तेंदुआ पकड़ा गया। उसे कतर्निया के जंगल में छोड़ा गया। जबकि सितंबर में एक शावक पकड़ा गया था। लेकिन उसे दो दिन बाद भी मादा ने भी स्वीकार नहीं किया। इस पर उसे लखनऊ भेजा गया। जबकि एक सात वर्षीय तेंदुए को लखनऊ चिड़िया घर भेजा गया है। अब तक गांव में कुल पांच तेंदुए पकड़े गए हैं।
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कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के मुर्तिहा रेंज में एक हफ्ते से तेंदुआ ग्रामीणों को परेशान कर रहा था। तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग ने पिंजड़ा लगाया। वन क्षेत्राधिकारी एके त्यागी ने बताया कि बुधवार की रात करीब डेढ़ बजे तेंदुआ पिंजड़े में कैद हो गया। कैद होने के बाद तेंदुआ गुर्राने लगा। कुछ देर बाद वनकर्मियों ने मौके पर जाकर देखा तो तेंदुआ पिंजड़े में कैद मिला। इस पर सूचना डीएफओ को दी। डीएफओ यशवंत सिंह के निर्देश पर तेंदुए को मुर्तिहा रेंज कार्यालय लाया गया। यहां पर पशु चिकित्सक डॉ. सर्वेश राय ने तेंदुए का स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसमें वह पूरी तरह स्वस्थ मिला। डीएफओ ने बताया कि तेंदुए के पकड़े जाने की सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई है। उनके निर्देश पर तेंदुए को कतर्नियाघाट के ट्रांस गेरुआ के जंगलों में छोड़ा जाएगा।
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तो नर और मादा थे तेंदुआ
गोलहना गांव में बुधवार देर रात पकड़ा गया तेंदुआ पांच वर्ष का नर है, जबकि इससे पूर्व पकड़े गए दो तेंदुए मादा थे। इनमें एक मादा तेंदुआ व शावक को लखनऊ चिड़ियाघर भेजा गया है।
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गांव में अब तक पकड़े जा चुके पांच तेंदुए
डीएफओ यशवंत सिंह ने बताया कि 16 अगस्त को सबसे पहले एक तेंदुआ पकड़ा गया। उसे कतर्निया के जंगल में छोड़ा गया। जबकि सितंबर में एक शावक पकड़ा गया था। लेकिन उसे दो दिन बाद भी मादा ने भी स्वीकार नहीं किया। इस पर उसे लखनऊ भेजा गया। जबकि एक सात वर्षीय तेंदुए को लखनऊ चिड़िया घर भेजा गया है। अब तक गांव में कुल पांच तेंदुए पकड़े गए हैं।