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Bahraich News: कतर्नियाघाट में थमी जंगल सफारी, चार माह पर्यटन बंद

Tue, 30 Jun 2026 11:52 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jun 2026 11:52 PM IST
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Jungle safari halted at Katarniaghat; tourism closed for four months.
कर्नियाघाट संर​क्षित वन क्षेत्र । 
मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट के घने जंगल अब अगले चार महीने तक केवल वन्यजीवों के होंगे। मंगलवार को पर्यटन सत्र समाप्त होने के साथ ही अभयारण्य पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया। अब नवंबर तक न जंगल सफारी चलेगी, न बाघों की तलाश में पर्यटकों की गाड़ियां दौड़ेंगी और न ही गेरुआ नदी में गंगा डॉल्फिन व घड़ियालों का रोमांचक दीदार हो सकेगा। मानसून और वन्यजीवों के प्रजनन काल को देखते हुए वन विभाग ने जंगल में पर्यटकों और आम लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
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भारत-नेपाल सीमा से सटे करीब 551 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला कतर्नियाघाट सेंक्चुरी तराई की जैव विविधता का प्रमुख केंद्र है। यहां बाघ, तेंदुआ, जंगली हाथी, सांभर, चीतल, पाढ़ा, भेड़िया, लोमड़ी और उड़न गिलहरी जैसे दुर्लभ वन्यजीव प्राकृतिक आवास में विचरण करते हैं। वहीं गेरुआ और कौड़ियाला नदियों में गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं की दुर्लभ प्रजातियां पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहती हैं।
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वन विभाग के अनुसार प्रत्येक वर्ष नवंबर से जून तक पर्यटन सत्र संचालित होता है। मानसून की शुरुआत के साथ जंगलों में हरियाली तेजी से बढ़ती है, कच्चे मार्ग कीचड़ से भर जाते हैं और अधिकांश वन्यजीवों का प्रजनन काल शुरू हो जाता है। ऐसे समय में मानवीय गतिविधियां वन्यजीवों के लिए बाधा बन सकती हैं। इसी कारण जंगल को चार महीने के लिए पर्यटकों के लिए बंद रखा जाता है।
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प्रभागीय वनाधिकारी अपूर्व दीक्षित ने बताया कि 30 जून के साथ पर्यटन सत्र का समापन हो गया है। पर्यटन बंद रहने के दौरान वन विभाग की टीमें पूरे जंगल में विशेष गश्त करेंगी। अवैध शिकार, लकड़ी कटान और अन्य वन अपराधों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पेट्रोलिंग के साथ वन्यजीवों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी। अब नवंबर में नया पर्यटन सत्र शुरू होने पर पर्यटक फिर से जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे।


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पर्यटन बंद, लेकिन सुरक्षा रहेगी चौकस

डीएफओ ने बताया कि पर्यटन गतिविधियां बंद होने के बावजूद वन विभाग की सक्रियता बढ़ जाएगी। सीमावर्ती जंगलों में विशेष गश्त, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी, वन अपराधों पर कार्रवाई और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त टीमें तैनात रहेंगी, ताकि मानसून के दौरान जंगल का प्राकृतिक संतुलन सुरक्षित रखा जा सके।
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