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कानपुर व लखनऊ के लोगों को परोसी जा रही जरवल की मशरूम

Thu, 20 Feb 2020 10:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 20 Feb 2020 10:57 PM IST
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Jarwal mushrooms are being served to the people of Kanpur and Lucknow
जरवल में किसान द्वारा की जा रही मशरूम की खेती। - फोटो : BAHRAICH
जरवल (बहराइच)। विकास खंड जरवल के कोइलीपुरवा गांव निवासी किसान के खेत की मशरूम कानपुर और लखनऊ के लोगों की प्लेट में परोसी जा रही है। गांव के एक किसान ने पांच बीघा क्षेत्रफल में मशरूम की खेती की है। यह खेती अक्तूबर से मार्च तक चलती है। इस दौरान मशरूम की खेती में किसान को दो लाख रुपये की आय होती है। काश्तकार के मुताबिक मशरूम को सिर्फ रात में ही तोड़ा जाता है। मशरूम की खेती से किसान काफी समृद्धशाली हो गया है।
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जरवल विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कोइलीपुरवा निवासी शिवकुमार यादव ने मशरूम की खेती शुरू की है। किसान शिवकुमार यादव ने बताया कि उन्होंने पांच बीघा क्षेत्रफल में अक्तूबर में बोआई की थी, जिस पर खाद व बीज लेकर दो लाख रुपये खर्च आया था। मशरूम अब पूरी तरह से तैयार हो गया है। नवंबर से मशरूम को खेत से तोड़ा जा रहा है। प्रतिदिन मशरूम तोड़कर उसे सब्जी मंडी में भेजा जा रहा है।
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किसान के मुताबिक जरवल की मशरूम बहराइच के अलावा गोंडा, कानपुर, लखनऊ और बाराबंकी भेजी जा रही है। बाजार में मशरूम 150 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है। किसान के मुताबिक मार्च में इसकी खेती स्वयं समाप्त हो जाती है। उन्होंने बताया कि जरवल की मशरूम कानपुर व लखनऊ के लोगों की प्लेट में परोसी जा रही है। यह सौैभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती से वह काफी समृद्धशाली हो गए। अब मजदूरी के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता है। साथ ही जिलेे के लोगों को सांस्कृतिक व वैवाहिक समारोह में मशरूम के लिए दूसरे जिले का रुख नहीं करना पड़ता है।
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बेड बनाकर की जाती है खेती
किसान शिवकुमार यादव ने बताया कि मशरूम की खेती बेड बनाकर की जाती है, जिसमें चार फीट लंबाई व चार फीट चौड़ाई का बेड बनाया जाता है। इसके साथ ही मशरूम को सिर्फ रात में ही तोड़ा जाता है।
खुद बनाते हैं खाद
किसान के मुताबिक मशरूम की खेती के लिए वह स्वयं खाद बनाते हैं। इसके लिए वह सितंबर में खाद तैयार करते हैं। खाद तैयार होने के बाद उसकी बोआई अक्तूबर में करते हैं। फसल नवंबर में तैयार हो जाती है।

दो लाख लगाने के बाद दो लाख का होता है मुनाफा
मशरूम की खेती पांच बीघा क्षेत्रफल में करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। इसके लिए खाद स्वयं बनाई जाती है। साथ ही बीज लाया जाता है। पांच बीघा की खेती में लगभग दो लाख रुपये का खर्च आ जाता है, लेकिन पांच माह की मेहनत में लगभग दो लाख रुपये का मुनाफा भी हो जाता है।
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