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बाघ को खदेड़ने के लिए जयमाला व चंपाकली ने संभाला मोर्चा
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कतर्नियाघाट के आंबा गांव के जंगल में पेट्रोलिंग करती हथिनी।
- फोटो : BAHRAICH
बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट रेंज के बर्दिया गांव में बाघ के हमले में किसान की मौत के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बाघ को जंगल की ओर खदेड़ने के लिए वन विभाग ने हथिनी चंपाकली व चंपाकली द्वारा पेट्रोलिंग शुरू करवा दी है। डीएफओ भी गांव में गश्त कर ग्रामीणों को सुरक्षा का एहसास कराया और सतर्क रहने की अपील की। बाघ नेपाल का है या भारत का। इसको जानने के लिए वन विभाग ने कैमरा लगाया है।
कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के कतर्नियाघाट रेंज अंतर्गत बर्दिया गांव निवासी 49 वर्षीय अवधराम को बीते दिन बाघ ने मार डाला था। जिसके बाद बाघ को जंगल की ओर खदेड़ने के लिए वन विभाग ने प्रयास तेज कर दिया है। रविवार को भारत-नेपाल सीमा से सटे बर्दिया गांव के आसपास हथिनी जयमाला व चंपाकली को पेट्रोलिंग पर लगा दिया है। जिससे बाघ जंगल की ओर भाग जाए। घटना के बाद डीएफओ आकाशदीप बधावन ने घटनास्थल का दौरा किया। उनके साथ कतर्नियाघाट रेंज के अफसर रामकुमार, वन दरोगा पवन शुक्ला, सुजौली थानाध्यक्ष सुरेंद्र प्रताप सिंह, एसआई अजयकांत द्विवेदी मौजूद रहे। डीएफओ ने बर्दिया ग्राम प्रधान श्याम लाल के साथ मिलकर पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। डीएफओ ने बर्दिया गांव में पेट्रोलिंग कर लोगों को जागरूक किया। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि सुबह शाम अपने खेतों मे न जाएं। अपने बच्चों को घर पर रखें। इधर-उधर न जाने दें। जिससे उनकी सुरक्षा हो सके।
बाघ की पहचान के लिए लगाया गया कैमरा
बर्दिया गांव नेपाल सीमा से सटा हुआ है। घटना के बाद यह नहीं पता चल सका कि बाघ नेपाल का है या कतर्नियाघाट जंगल का। बाघ की पहचान करने के लिए एक किलोमीटर के अंदर लगभग चार कैमरे लगाए गए हैं। उसमें कैद होने के बाद बाघ की पहचान हो सकेगी।
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पांच दिन बाद खोला जाएगा कैमरा
बाघ को पहचानने के लिए घटना स्थल के आसपास एक कैमरा लगाया गया है। रेंज में लगभग 25-30 कैमरे लगाए गए हैं। रविवार को कैमरा लगाया गया है। पांच दिन बाद कैमरे को खोला जाएगा और उसके बाद यह पता चलेगा कि बाघ का कहां का है। गश्त कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। -आकाशदीप बधावन, डीएफओ कतर्नियाघाट
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कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के कतर्नियाघाट रेंज अंतर्गत बर्दिया गांव निवासी 49 वर्षीय अवधराम को बीते दिन बाघ ने मार डाला था। जिसके बाद बाघ को जंगल की ओर खदेड़ने के लिए वन विभाग ने प्रयास तेज कर दिया है। रविवार को भारत-नेपाल सीमा से सटे बर्दिया गांव के आसपास हथिनी जयमाला व चंपाकली को पेट्रोलिंग पर लगा दिया है। जिससे बाघ जंगल की ओर भाग जाए। घटना के बाद डीएफओ आकाशदीप बधावन ने घटनास्थल का दौरा किया। उनके साथ कतर्नियाघाट रेंज के अफसर रामकुमार, वन दरोगा पवन शुक्ला, सुजौली थानाध्यक्ष सुरेंद्र प्रताप सिंह, एसआई अजयकांत द्विवेदी मौजूद रहे। डीएफओ ने बर्दिया ग्राम प्रधान श्याम लाल के साथ मिलकर पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। डीएफओ ने बर्दिया गांव में पेट्रोलिंग कर लोगों को जागरूक किया। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि सुबह शाम अपने खेतों मे न जाएं। अपने बच्चों को घर पर रखें। इधर-उधर न जाने दें। जिससे उनकी सुरक्षा हो सके।
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बाघ की पहचान के लिए लगाया गया कैमरा
बर्दिया गांव नेपाल सीमा से सटा हुआ है। घटना के बाद यह नहीं पता चल सका कि बाघ नेपाल का है या कतर्नियाघाट जंगल का। बाघ की पहचान करने के लिए एक किलोमीटर के अंदर लगभग चार कैमरे लगाए गए हैं। उसमें कैद होने के बाद बाघ की पहचान हो सकेगी।
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पांच दिन बाद खोला जाएगा कैमरा
बाघ को पहचानने के लिए घटना स्थल के आसपास एक कैमरा लगाया गया है। रेंज में लगभग 25-30 कैमरे लगाए गए हैं। रविवार को कैमरा लगाया गया है। पांच दिन बाद कैमरे को खोला जाएगा और उसके बाद यह पता चलेगा कि बाघ का कहां का है। गश्त कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। -आकाशदीप बधावन, डीएफओ कतर्नियाघाट