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खतरे के निशान के पास पहुंचा घाघरा
अमर उजाला/बहराइच
Updated Fri, 07 Jul 2017 11:42 PM IST
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कटान कर रही नदी
- फोटो : अमर उजाला
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तराई और नेपाल के पहाड़ों पर हो रही बारिश के चलते घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार को दोपहर बाद घाघरा नदी का जलस्तर एल्गिन ब्रिज पर 105.856 मीटर रिकॉर्ड हुआ, जबकि खतरे का निशान 106.07 मीटर है। नदी की लहरें खतरे के निशान से महज 21 सेंटीमीटर दूर हैं। ऐसे में सुबह तक नदी का पानी खतरे के निशान तक पहुंच सकता है। फिर तबाही का दौर शुरू होगा, लेकिन अब तक बाढ़ और कटान से निपटने के लिए कोई मुकम्मल इंतजाम नहीं किए गए हैं।
वहीं, महसी और कैसरगंज तहसील क्षेत्र में नदी के मुहाने पर बसे नौ गांव के लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं। सभी ग्रामीणों में दहशत है। उधर, जरवल में घाघराघाट फसल अनुसंधान केंद्र को बचाने के लिए बनाए गए गाइड तटबंध तक घाघरा की लहरें पहुंच चुकी हैं। यहां तेजी से कटान हो रही है। साथ ही महसी तहसील क्षेत्र में कायमपुर, चुरईपुरवा और मंगलपुरवा के निकट कटान के चलते 11 किसानों की 40 बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समाहित हो गई है।
बरसात का मौसम महसी, कैसरगंज और नानपारा क्षेत्र के लोगों के लिए मुसीबत भरा होता है। कभी सरयू तो कभी घाघरा नदी कहर बरपाती है। इस बार घाघरा का रुख शुरू से ही सख्त बना हुआ है।
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हालात यह हैं कि बीते पखवारे भर में जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है। लेकिन चार दिन से नदी का जलस्तर निरंतर बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि डेढ़ सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से घाघरा नदी के जलस्तर में इजाफा हो रहा है। शुक्रवार दोपहर दो बजे नदी का जलस्तर 105.856 मीटर मापा गया।
मापक की बात मानें तो जलस्तर निरंतर बढ़ेगा, ऐसे में सुबह तक नदी खतरे के निशान को छू सकती है। वहीं, बढ़ रहे जलस्तर के बीच जरवल क्षेत्र में नदी की लहरें उफान की स्थिति में आ गई हैं। घाघराघाट फसल अनुसंधान केंद्र की सुरक्षा के लिए स्थापित गाइड तटबंध तक नदी का पानी पहुंच गया है। यहां कटान भी तेजी से हो रही है। महसी क्षेत्र में कायमपुर, चुरईपुरवा और मंगलपुरवा गांव के निकट नदी की लहरें कटान कर रही हैं।
कायमपुर निवासी फातिमा, बूंदा, जगजीवन, शिवकुमार समेत 11 किसानों की 40 बीघा खेती योग्य जमीन रात से अब तक नदी में समाहित हो चुकी है। इन खेतों में उड़द और गन्ने की फसल लगी हुई थी, जिसका कोई अता-पता नहीं है। मामले की सूचना ग्रामीणों ने तहसील को दी, लेकिन कटान रोकने के लिए कोई समुचित उपाय नहीं किए जा सके हैं।
उप जिलाधिकारी महसी नागेंद्र कुमार ने शुक्रवार को तहसील क्षेत्र के बाढ़ व कटान प्रभावित गांवों का मुआयना किया। नदी के जलस्तर को जांचा। एसडीएम ने कहा कि अभी बाढ़ की स्थिति नहीं है। लेकिन जलस्तर काफी बढ़ गया है। राजस्वकर्मी क्षेत्र में कैंप कर रहे हैं। खेत और मकान के कटान का ब्यौरा एकत्रित किया जा रहा है। पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा।
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वहीं, महसी और कैसरगंज तहसील क्षेत्र में नदी के मुहाने पर बसे नौ गांव के लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं। सभी ग्रामीणों में दहशत है। उधर, जरवल में घाघराघाट फसल अनुसंधान केंद्र को बचाने के लिए बनाए गए गाइड तटबंध तक घाघरा की लहरें पहुंच चुकी हैं। यहां तेजी से कटान हो रही है। साथ ही महसी तहसील क्षेत्र में कायमपुर, चुरईपुरवा और मंगलपुरवा के निकट कटान के चलते 11 किसानों की 40 बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समाहित हो गई है।
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बरसात का मौसम महसी, कैसरगंज और नानपारा क्षेत्र के लोगों के लिए मुसीबत भरा होता है। कभी सरयू तो कभी घाघरा नदी कहर बरपाती है। इस बार घाघरा का रुख शुरू से ही सख्त बना हुआ है।
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हालात यह हैं कि बीते पखवारे भर में जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है। लेकिन चार दिन से नदी का जलस्तर निरंतर बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि डेढ़ सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से घाघरा नदी के जलस्तर में इजाफा हो रहा है। शुक्रवार दोपहर दो बजे नदी का जलस्तर 105.856 मीटर मापा गया।
मापक की बात मानें तो जलस्तर निरंतर बढ़ेगा, ऐसे में सुबह तक नदी खतरे के निशान को छू सकती है। वहीं, बढ़ रहे जलस्तर के बीच जरवल क्षेत्र में नदी की लहरें उफान की स्थिति में आ गई हैं। घाघराघाट फसल अनुसंधान केंद्र की सुरक्षा के लिए स्थापित गाइड तटबंध तक नदी का पानी पहुंच गया है। यहां कटान भी तेजी से हो रही है। महसी क्षेत्र में कायमपुर, चुरईपुरवा और मंगलपुरवा गांव के निकट नदी की लहरें कटान कर रही हैं।
कायमपुर निवासी फातिमा, बूंदा, जगजीवन, शिवकुमार समेत 11 किसानों की 40 बीघा खेती योग्य जमीन रात से अब तक नदी में समाहित हो चुकी है। इन खेतों में उड़द और गन्ने की फसल लगी हुई थी, जिसका कोई अता-पता नहीं है। मामले की सूचना ग्रामीणों ने तहसील को दी, लेकिन कटान रोकने के लिए कोई समुचित उपाय नहीं किए जा सके हैं।
उप जिलाधिकारी महसी नागेंद्र कुमार ने शुक्रवार को तहसील क्षेत्र के बाढ़ व कटान प्रभावित गांवों का मुआयना किया। नदी के जलस्तर को जांचा। एसडीएम ने कहा कि अभी बाढ़ की स्थिति नहीं है। लेकिन जलस्तर काफी बढ़ गया है। राजस्वकर्मी क्षेत्र में कैंप कर रहे हैं। खेत और मकान के कटान का ब्यौरा एकत्रित किया जा रहा है। पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा।