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घाघरा ने पार किया लाल निशान, चार गांव पानी से घिरे
अमर उजाला/बहराइच
Updated Sat, 08 Jul 2017 11:18 PM IST
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घाघरा का बढ़ा पानी
- फोटो : अमर उजाला
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नेपाल के पहाड़ों पर लगातार हो रही वर्षा के चलते शनिवार को दोपहर घाघरा नदी एल्गिन ब्रिज पर खतरे का निशान पार गई। इसी के साथ महसी तहसील क्षेत्र के निचले इलाकों में नदी उफना गई। नदी के मुहाने पर बसे चार गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। कायमपुर-जरमापुर मार्ग पर पानी चल रहा है, जिससे आवागमन ठप हो गया है।
उफनाई घाघरा का पानी बेलहा-बेहरौली तटबंध पर थपेड़े ले रहा है, जिससे तटबंध को खतरा उत्पन्न हो गया है। उधर, कैसरगंज के जरवल विकास खंड में फसल अनुसंधान केंद्र के पास घाघरा उफना गई है। लोगों में हड़कंप मचा है, लेकिन अब तक राजस्वकर्मी मौके पर नहीं पहुंचे हैं और न ही बाढ़ के पानी से घिरे गांव के लोगों को किसी प्रकार की प्रशासनिक मदद मिल सकी है।
घाघरा नदी के जलस्तर में एक पखवारे से उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा था। नदी के जलस्तर में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज हो रही थी। इसी बीच शनिवार दोपहर दो बजे घाघरा नदी का पानी एल्गिन ब्रिज पर खतरे का निशान 106.07 को पार कर गया। तीन बजे नदी का जलस्तर 106.086 मीटर दर्ज हुआ।
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केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से नदी का पानी बढ़ रहा है। खतरे का निशान पार करने के साथ ही महसी और कैसरगंज क्षेत्र में नदी उफना गई है। महसी में जरमापुर के निकट नदी का पानी मैदान में आ गया है। इसके चलते कायमपुर, जरमापुर, कोरियनपुरवा, लठौरनपुरवा गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। अभी इन गांवों के अंदर बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन गांव के सभी संपर्क मार्गों पर पानी बह चल रहा है।
कायमपुर-जरमापुर मुख्य संपर्क मार्ग पर डेढ़ सेे दो फुट पानी पहुंच गया है। बेलहा-बेहरौली तटबंध पर कायमपुर के पास नदी थपेड़े ले रही हैं, जिससे आवागमन प्रभावित है। उधर, कैसरगंज तहसील के जरवल विकास खंड में घाघराघाट फसल अनुंसधान केंद्र के निकट नदी का पानी खेतों में भर गया है। यहां पर गाइड तटबंध को खतरा उत्पन्न हो गया है, लेकिन अभी कहीं भी प्रशासनिक व्यवस्थाएं नहीं दिख रहीं हैं। जिन राजस्वकर्मियों की ड्यूटी लगाने का दावा किया जा रहा था, वह नजर नहीं आ रहे हैं। ग्रामीणों में दहशत है। जिस तरह से नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। उससे लग रहा है कि रविवार तक स्थिति और भयावह हो जाएगी।
महसी क्षेत्र में बाढ़ ने दस्तक दे दी है, लेकिन नावें कहीं दिख नहीं रही हैं। बाढ़ के मौके पर 48 बाढ़ राहत केंद्र संचालन का दावा किया गया था। लेकिन यह राहत केंद्र अब तक संचालित नहीं हो सके हैं।
इस बार कायमपुर क्षेत्र के लोग सबसे पहले बाढ़ का सामना कर रहे हैं। लेकिन यहां पर किस राजस्वकर्मी/लेखपाल की ड्यूटी है। इसकी जानकारी ग्रामीणों को नहीं है। गांव निवासी तीरथराम, मंशाराम, ननकुन्ने, जगतनरायन, मंगरे, सोमई का कहना है कि बीते सप्ताह भर से नदी के भयावह रुख के बारे में तहसील को सूचना दी जा रही है। लेकिन आज तक कोई भी राजस्वकर्मी या लेखपाल नहीं आया। किसकी ड्यूटी लगाई गई, उसका चेहरा तक नहीं पहचानते।
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उफनाई घाघरा का पानी बेलहा-बेहरौली तटबंध पर थपेड़े ले रहा है, जिससे तटबंध को खतरा उत्पन्न हो गया है। उधर, कैसरगंज के जरवल विकास खंड में फसल अनुसंधान केंद्र के पास घाघरा उफना गई है। लोगों में हड़कंप मचा है, लेकिन अब तक राजस्वकर्मी मौके पर नहीं पहुंचे हैं और न ही बाढ़ के पानी से घिरे गांव के लोगों को किसी प्रकार की प्रशासनिक मदद मिल सकी है।
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घाघरा नदी के जलस्तर में एक पखवारे से उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा था। नदी के जलस्तर में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज हो रही थी। इसी बीच शनिवार दोपहर दो बजे घाघरा नदी का पानी एल्गिन ब्रिज पर खतरे का निशान 106.07 को पार कर गया। तीन बजे नदी का जलस्तर 106.086 मीटर दर्ज हुआ।
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केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से नदी का पानी बढ़ रहा है। खतरे का निशान पार करने के साथ ही महसी और कैसरगंज क्षेत्र में नदी उफना गई है। महसी में जरमापुर के निकट नदी का पानी मैदान में आ गया है। इसके चलते कायमपुर, जरमापुर, कोरियनपुरवा, लठौरनपुरवा गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। अभी इन गांवों के अंदर बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन गांव के सभी संपर्क मार्गों पर पानी बह चल रहा है।
कायमपुर-जरमापुर मुख्य संपर्क मार्ग पर डेढ़ सेे दो फुट पानी पहुंच गया है। बेलहा-बेहरौली तटबंध पर कायमपुर के पास नदी थपेड़े ले रही हैं, जिससे आवागमन प्रभावित है। उधर, कैसरगंज तहसील के जरवल विकास खंड में घाघराघाट फसल अनुंसधान केंद्र के निकट नदी का पानी खेतों में भर गया है। यहां पर गाइड तटबंध को खतरा उत्पन्न हो गया है, लेकिन अभी कहीं भी प्रशासनिक व्यवस्थाएं नहीं दिख रहीं हैं। जिन राजस्वकर्मियों की ड्यूटी लगाने का दावा किया जा रहा था, वह नजर नहीं आ रहे हैं। ग्रामीणों में दहशत है। जिस तरह से नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। उससे लग रहा है कि रविवार तक स्थिति और भयावह हो जाएगी।
महसी क्षेत्र में बाढ़ ने दस्तक दे दी है, लेकिन नावें कहीं दिख नहीं रही हैं। बाढ़ के मौके पर 48 बाढ़ राहत केंद्र संचालन का दावा किया गया था। लेकिन यह राहत केंद्र अब तक संचालित नहीं हो सके हैं।
इस बार कायमपुर क्षेत्र के लोग सबसे पहले बाढ़ का सामना कर रहे हैं। लेकिन यहां पर किस राजस्वकर्मी/लेखपाल की ड्यूटी है। इसकी जानकारी ग्रामीणों को नहीं है। गांव निवासी तीरथराम, मंशाराम, ननकुन्ने, जगतनरायन, मंगरे, सोमई का कहना है कि बीते सप्ताह भर से नदी के भयावह रुख के बारे में तहसील को सूचना दी जा रही है। लेकिन आज तक कोई भी राजस्वकर्मी या लेखपाल नहीं आया। किसकी ड्यूटी लगाई गई, उसका चेहरा तक नहीं पहचानते।