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कतर्नियाघाट में चार माह पर्यटकों के प्रवेश पर रोक

Sun, 21 Jun 2020 10:09 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2020 10:09 PM IST
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Four months ban on entry of tourists in Katarniaghat
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में पेट्रोलिंग करते वन तथा एसएसबी जवान। - फोटो : BAHRAICH
बहराइच। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में मानसून सत्र लागू हो गया है। मानसून सत्र के दौरान चार माह जंगल में पर्यटकों के प्रवेश पर रोक रहेगी। वहीं, जंगलों की सुरक्षा के लिए डीएफओ की ओर से बीट लेबल पर कर्मचारियों की तैनाती की गई है। बीट लेबल के अधिकारी प्रतिदिन सुरक्षा गश्त करके फोटो प्रभागीय वनाधिकारियों को भेजेंगे। वनाधिकारियों ने बॉर्डर एरिया क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरतने पर बल दिया है। सुरक्षा में एसएसबी के जवान भी सहयोग करेंगे। मानसून सत्र चार माह तक चलेगा।
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कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग 551 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। वन प्रभाग कतर्नियाघाट, मोतीपुर, मुर्तिहा, धर्मापुर, सुजौली, ककरहा और निशानगाड़ा रेंज में विभक्त है। जंगल नेपाल सीमा से सटा हुआ है। वन्यजीव प्रभाग में बाघ, तेंदुआ, हिरन, काकर, पाढ़ा, बारहसिंघा समेत कई प्रजाति के पक्षी व अन्य जीव विचरण करते हैं। इसके अलावा जंगल से निकली गेरुआ और कौड़ियाला नदी में डॉल्फिन, मगरमच्छ और घड़ियाल भी रहते हैं। इसको देखते हुए मानसून सत्र में जंगल की सुरक्षा और बढ़ा दी जाती है। डीएफओ जीपी सिंह ने बताया कि 15 जून से कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में मानसून सत्र लागू कर दिया गया है।
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मानसून सत्र 15 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान जंगल में पर्यटकों के प्रवेश पर रोक रहेगी डीएफओ ने बताया कि बारिश से जंगल में कहीं-कहीं पानी भर जाता है। इसके लिए जून से सितंबर तक मानसून सत्र चलाया जाता है। प्रभागीय वनाधिकारी ने कहा कि जंगल तथा जंगल में विचरण करने वाले वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए वनकर्मियों की तैनाती की गई है। सभी वनकर्मी प्रतिदिन जंगलों में पैदल गश्त करेंगे। इसके बाद उसकी फोटो और वीडियो देर शाम तक उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने जिन क्षेत्र में वाहन जा सकेंगे, वहां वनकर्मी वाहन से गश्त करेंगे। हालांकि जंगल के अधिकतर क्षेत्र में बाइक के अलावा अन्य कोई साधन मानसून सत्र में नहीं जा सकते हैं।
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यह करेंगे जंगल की सुरक्षा
डीएफओ जीपी सिंह ने बताया कि कतर्नियाघाट जंगल की सुरक्षा के लिए सात रेंज को 41 बीट में विभक्त किया गया है। प्रत्येक बीट में फारेस्ट गार्ड की अगुवाई में बीट वाचर तथा एसटीपीएफ के जवान जंगल की सुरक्षा करेंगे। यह सभी जवान हथियार से लैस रहेंगे। सभी दिन और रात में सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर ही ध्यान देंगे। प्रत्येक रेंज में वन क्षेत्राधिकारी इसकी मॉनिटरिंग करेंगे।
जंगल में ही रोके जाएंगे वन्यजीव
डीएफओ ने बताया कि बारिश का दौर शुरू हो गया है। ऐसे में जंगल क्षेत्र में तेज बारिश हो रही है। तेज बारिश से जंगल के कई क्षेत्रों में पानी भर जाता है। बारिश के कारण बाघ और तेंदुए गांव के साथ अन्य क्षेत्रों में रुख करते हैं। ऐसे में मानसून सत्र में वनकर्मियों द्वारा गश्त करके इन जीवों को जंगल में ही रोकने की कोशिश की जाएगी।

बॉर्डर एरिया पर होगा विशेष ध्यान
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग नेपाल सीमा से सटा हुआ है। ऐसे में नेपाली शिकारी बारिश सत्र में इसका फायदा न उठाएं। अक्सर नेपाली लोग लकड़ी के चक्कर में जंगल में प्रवेश कर जाते हैं। इसके लिए वनकर्मियों को दिशा निर्देश दिए गए हैं। वनकर्मी नेपाल सीमा से सटे क्षेत्र में अधिक गश्त करेंगे। जिससे नेपाल सीमा से आने वाले शिकारियों पर विशेष नजर रखा जाएगा। किसी भी जीव को नुकसान न पहुंचे। सीमा से सटे चौकी के एसएसबी के जवान भी वनकर्मियों के साथ पेट्रोलिंग करेंगे। जिससे जंगल की सुरक्षा भी मजबूत होगी।
- जीपी सिंह डीएफओ जीपी सिंह
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