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डायरिया व निमोनिया से चार बच्चों की मौत
अमर उजाला/बहराइच
Updated Fri, 17 Mar 2017 10:56 PM IST
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जिला अस्पताल में भर्तीं बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
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तराई में मौसम परिवर्तन के बीच संक्रामक रोगों का प्रकोप शुरू हो गया है। डायरिया व निमोनिया कहर बरपाने लगा है। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान डायरिया और बुखार पीड़ित दो मासूमों की मौत हो गई, वहीं दो अन्य रोगियों ने अस्पताल पहुंचते ही दम तोड़ दिया। जबकि जिला अस्पताल में विभिन्न संक्रामक रोगों से पीड़ित 21 मरीज भर्ती हुए हैं। इनमें तीन की हालत नाजुक बताई जा रही है।
तराई के मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच संक्रामक रोगों का प्रकोप बढ़ गया है। यह संक्रामक रोग मासूमों की जिंदगी पर भारी पड़ रहे हैं। बलरामपुर के तुलसीपुर निवासी रजनी (एक) पुत्री रामजी को बलरामपुर से जिला अस्पताल बहराइच भेजा गया था, लेकिन शुक्रवार को यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। रजनी को उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत थी।
उधर, खैरीघाट के परसा निवासी सुगनी (डेढ़) की भी इलाज के दौरान मौत हुई है। वहीं, श्रावस्ती जिले के सिरसिया निवासी बबलू (2) पुत्र सद्दन का इलाज परिवारीजन स्थानीय चिकित्सकों से करा रहे थे। उसे बुखार के साथ सांस की शिकायत थी। हालत बिगड़ने पर जब डॉक्टरों ने जवाब दे दिया, तब परिवारीजन लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन यहां इलाज शुरू होते ही बबलू ने दम तोड़ दिया।
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उधर, महसी निवासी मंगते (एक) पुत्र भिखारी की भी उल्टी-दस्त की चपेट में आकर मौत हो गई। वहीं, जिला अस्पताल में उल्टी, दस्त, बुखार, निमोनिया से पीड़ित और 21 रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें सुंदर (4), प्रदीप कुमार (2) और संतोष (3) की हालत नाजुक बताई जा रही है।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा ने कहा कि गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में डायरिया का प्रकोप बढ़ेगा। मिचली, खट्टी डकार, बदहजमी या उल्टी-दस्त और बुखार की शिकायत होने पर पीड़ित के परिवारीजनों को सजग होना होगा, तभी उनकी जान बचाई जा सकती है। डायरिया की शिकायत होने पर एक चुटकी नमक और तीन चुटकी चीनी का घोल रोगी को तब तक पिलाते रहें, जब तक समुचित इलाज न शुरू हो जाए। नींबू का रस मिलाकर शिकंजी भी बना सकते हैं।
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तराई के मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच संक्रामक रोगों का प्रकोप बढ़ गया है। यह संक्रामक रोग मासूमों की जिंदगी पर भारी पड़ रहे हैं। बलरामपुर के तुलसीपुर निवासी रजनी (एक) पुत्री रामजी को बलरामपुर से जिला अस्पताल बहराइच भेजा गया था, लेकिन शुक्रवार को यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। रजनी को उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत थी।
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उधर, खैरीघाट के परसा निवासी सुगनी (डेढ़) की भी इलाज के दौरान मौत हुई है। वहीं, श्रावस्ती जिले के सिरसिया निवासी बबलू (2) पुत्र सद्दन का इलाज परिवारीजन स्थानीय चिकित्सकों से करा रहे थे। उसे बुखार के साथ सांस की शिकायत थी। हालत बिगड़ने पर जब डॉक्टरों ने जवाब दे दिया, तब परिवारीजन लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन यहां इलाज शुरू होते ही बबलू ने दम तोड़ दिया।
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उधर, महसी निवासी मंगते (एक) पुत्र भिखारी की भी उल्टी-दस्त की चपेट में आकर मौत हो गई। वहीं, जिला अस्पताल में उल्टी, दस्त, बुखार, निमोनिया से पीड़ित और 21 रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें सुंदर (4), प्रदीप कुमार (2) और संतोष (3) की हालत नाजुक बताई जा रही है।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा ने कहा कि गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में डायरिया का प्रकोप बढ़ेगा। मिचली, खट्टी डकार, बदहजमी या उल्टी-दस्त और बुखार की शिकायत होने पर पीड़ित के परिवारीजनों को सजग होना होगा, तभी उनकी जान बचाई जा सकती है। डायरिया की शिकायत होने पर एक चुटकी नमक और तीन चुटकी चीनी का घोल रोगी को तब तक पिलाते रहें, जब तक समुचित इलाज न शुरू हो जाए। नींबू का रस मिलाकर शिकंजी भी बना सकते हैं।