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नदी में समाए पांच मकान व 450 बीघा फसल

Tue, 14 Jul 2020 10:06 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2020 10:06 PM IST
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Five houses and 450 bigha crops included in the river
बहराइच की महसी तहसील क्षेत्र में कटान करती घाघरा नदी के मुहाने पर मकान तोड़ते ग्रामीण। - फोटो : BAHRAICH
महसी (बहराइच)। जलस्तर घटने के साथ ही घाघरा (सरयू) नदी में कटान तेज हो गई है। मंगलवार को टिकुरी गांव के मजरा लालापुरवा में में पांच ग्रामीणों के मकान कटकर नदी में समा गए। वहीं तमाम किसानों की 450 बीघा धान, गन्ना व मक्का की फसल भी नदी की धारा में समाहित हो गई। कटान तेज होने से ग्रामीणों में दहशत है। कटान के चलते कई ग्रामीण ईंट व अन्य सामग्री बचाने के लिए अपने मकानों को तोड़ रहे हैं। अब महज तीन गांवों में ही पानी भरा है, लेकिन अभी तक तहसील प्रशासन की ओर से बचाव के कोई उपाय नहीं किए गए हैं।
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महसी तहसील क्षेत्र में घाघरा नदी का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो गया है। जलस्तर लगातार कम होने से गांवों से बाढ़ का पानी भी निकल गया है। अब महज तीन गांवों में ही बाढ़ का पानी भरा हुआ है। जलस्तर कम होने से मंगलवार को घाघरा नदी में कटान तेज हो गई है। तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत टिकुरी के मजरा लालापुरवा में नदी ने कटान तेज कर दी है। गांव निवासी कैलाश, गुड्डू श्रीवास्तव, रामदीन, सुंदरलाल और अजय श्रीवास्तव के मकान कटकर नदी में समाहित हो गए हैं।
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वहीं नदी की तेज कटान को देखते हुए लोग अपने पक्के मकान तोड़ रहे हैं। आवासीय मकानों को तोड़ते हुए लोग काफी परेशान हैं। दो मंजिला मकान तोड़ रहे गांव निवासी अजय श्रीवास्तव काफी दुखी थे। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से कोई सहायता नहीं मिली है। वे अपना दोमंजिला मकान तोड़ रहे थे। अजय ने कहा कि सिर्फ कागजों पर ही राहत सहायता व अन्य कार्य चल रहे हैं। नदी खेती योग्य जमीन को काट रही है। टिकुरी ग्राम पंचायत के चार मजरों के 80 से ज्यादा किसानों की लगभग 450 बीघा खेती योग्य जमीन समाहित हो गई है। इन खेतों में धान, मक्का, गन्ना की फसल लगी हुई थी।
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कटान की सूचना मिली है। राजस्व कर्मियों को भेजकर कटान की रिपोर्ट मांगी जा रही है। इसके बाद सभी पीड़ितों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
- एसएन त्रिपाठी, उपजिलाधिकारी, महसी
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