फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bahraich News ›   Fear of cut, villagers fleeing

कटान का डर, पलायन करने लगे ग्रामीण

Tue, 04 Jul 2017 11:00 PM IST
अमर उजाला/बहराइच
अमर उजाला/बहराइच Updated Tue, 04 Jul 2017 11:00 PM IST
विज्ञापन
Fear of cut, villagers fleeing
कटान कर रही नदी - फोटो : अमर उजाला
जो खेतों में फसल थी, बाढ़ में बह कर रुलाती है, बिलखते बच्चों को भूखे ही खटिया पर सुलाती है। लुगाई है तो रानी सी मगर प्यौंदे में ही सिसके, ये बहिया साल भर में आंसुओं के संग आती है। कुछ यही हालात हैं घाघरा नदी की लहरों का सामना कर रहे गांवों के ग्रामीणों के। तटबंध के उस पार बसे ग्रामीणों के लिए घाघरा नदी अभिशाप बन गई है।
विज्ञापन


हर वर्ष उजड़ना और बसना इन ग्रामीणों की नियति बन चुकी है। कोई पांच वर्ष में छह बार तो कोई दस वर्ष से हर साल घाघरा नदी की लहरों का कोपभाजन बना है। लोग अपना खेत और आशियाना लहरों में गंवा चुके हैं। हालात यह हैं कि वर्ष भर जो लोग खून पसीना बहाकर इकट्ठा करते हैं, उसे नदी की लहरें लील लेती हैं। इस बार भी नदी के कटान के रुख से तटवर्ती गांवों के लोग दहशत में हैं। बाढ़ के डर से लोग तटबंध और सड़क के किनारे गृहस्थी सहेजने की जुगत में जुट गए हैं। 
विज्ञापन


घाघरा नदी महसी, कैसरगंज और नानपारा में प्रति वर्ष तबाही मचाती है। जून से अक्तूबर तक नदी की लहरों का कहर लोगों के अरमानों को तार-तार करता है। इस बार बाढ़ आने में भले ही देर हुई है, लेकिन हर वर्ष 15 जून के आसपास बाढ़ दस्तक दे देती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दस वर्षों में महसी और कैसरगंज क्षेत्र के सोलह हजार लोग घाघरा की कटान और बाढ़ से अपना आशियाना खो चुके हैं। इनमें कइयों की गाढ़ी कमाई भी लहरों की भेंट चढ़ चुकी है। इस वर्ष फिर नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच बाढ़ दस्तक दे रही है। ऐसे में नदी के मुहाने पर बसे नौ गांवों की 11 हजार आबादी सहमी हुई है। लोग एक बार फिर परिवार और गृहस्थी की सुरक्षा को लेकर पशोपेश में हैं।

खानाबदोश की जिंदगी जीने की सभी के सामने मजबूरी हैं। जरमापुर गांव में तो लोगों ने अपना आशियाना समेटना शुरू कर दिया है। हालात यह हैं कि बेलहा-बेहरौली और आदमपुर-रेवली तटबंध के किनारे कटान और बाढ़ पीड़ित अरसे से मकान और जमीन मिलने की आस लगाकर छप्पर और टेंट में रह रहे हैं। कुछ लोग बाढ़ और कटान खत्म होने पर पुन: गांव लौटते हैं। आशियाने बनाते हैं, लेकिन छह माह बाद पुन: बेघर हो जाते हैं। अब तक इन पीड़ितों को कोई भी मुकम्मल व्यवस्था मुहैया नहीं हो सकी है। हर वर्ष उजड़ना और बसना इनकी नियति बन चुकी है। 

बेलहा बेहरौली तटबंध पर सात साल से झोपड़ी बनाकर गुजर कर रहे राममिलन का कहना है कि पहले तीन वर्षों में चार बार वह अपना आशियाना उजाड़ चुके हैं। पूरी गृहस्थी बाढ़ में बह गई। ऐसे में बंधे पर बस गए। लेकिन सहायता के नाम पर बाढ़ के समय सिर्फ टेंट, लइया, चना और बाढ़ के समय लंगर की तहरी नसीब होती है।

लालचंद्र और रामपल्टन भी कटान पीड़ित हैं। उनका कहना है कि पांच वर्षों में छह बार उनके आशियाने को नदी ने लील लिया। लेकिन अब तक सरकार ने कहीं भी जमीन मुहैया नहीं कराई। जबकि परिवार में 12 सदस्य हैं। उनके लिए दो जून की रोटी का इंतजाम करना कठिन हो जाता है। कलावती, सकीना व गीता देवी भी व्यवस्था से आहत हैं। उनका कहना है कि घाघरा मइया की मर्जी है कि उजड़व औैर बसव, वहै करित है। जब तक जिंदगानी रही, तब तक जुहैबै करबै। 


अभी बाढ़ तो नहीं आई है, लेकिन कटान तेज हो गई है। नदी का जलस्तर निरंतर बढ़ रहा है। ऐसे में महसी तहसील के ग्राम पंचायत कायमपुर का मजरा जरमापुर नदी के निशाने पर आ गया है। गांव में एक मकान कट चुका है। जबकि अन्य घरों पर नदी थपेड़े ले रही है। ऐसे में लोगों ने आशियाना उजाड़ना शुरू कर दिया है।


गांव निवासी मूसुद्दीन का खपरैल और फूस का मकान है। नदी की दूरी महज 10 मीटर है। ऐसे में गृहस्थी और मकान की संपत्ति सहेजने के लिए उन्होंने मकान उजाड़ना शुरू कर दिया है। बोले कि जहां कय दाना-पानी लिखा होई, हुआं जइबै। यही हाल गांव निवासी अन्य ग्रामीणों का है। गांव के भगौती प्रसाद, हाकिमा, असगर अली सुबह घर की गृहस्थी को तटबंध के उस पार पहुंचाती दिखीं। बोलीं कि कब बाढ़ आ जाए, भरोसा हीं। ऐसे में जितनी गृहस्थी बच जाए, उसी से जिंदगी घिसटेगी। सभी ने कहा कि तटबंध और सड़क के किनारे कहीं जाकर बसेंगे। 

इंसेट 
वर्ष 2015-16 की बाढ़ में यह हुआ नुकसान
- बौंडी के निकट तीन स्पर हुए क्षतिग्रस्त
- तीन लोगों की डूबकर हुई मौत
- नौ हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि हुई प्रभावित
- पौने दो लाख की आबादी ने तीन माह तक बाढ़ का दंश झेला

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed