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नोटों के फेर में चौपट हो रही खेती
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 14 Nov 2016 10:41 PM IST
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फसल बोआई के इस मौसम में 500 और 1000 के नोट का चलन बंद होने से किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। रबी की बोआई की तैयारी चल रही है। मगर पैसे के अभाव में किसान बेबस नजर आ रहे हैं। किसानों को खाद-बीज खरीदने में दिक्कत हो रही है। किसानों को दुकानदार उधार भी नहीं दे रहे हैं।
बेबस किसानों का कहना है कि प्रधानमंत्री के कदम से भ्रष्टाचार तो खत्म हो जाएगा मगर व्यवस्था सुधारने के लिए काम करने की जरूरत है। वहीं, कुछ किसानों का कहना है कि देर-सबेर बोआई करेंगे, लेकिन कम से कम भ्रष्टाचार तो खत्म हो जाएगा।
फखरपुर के शरदपारा निवासी किसान छेद्दू का कहना है कि, 500 और 1000 के नोटों के सात हजार रुपये थे। जिसे दो दिन पूर्व बैंक में जमा कर दिया। मगर पैसा नहीं दिया गया। कैश नहीं होने की बात बताई गई। बेटा बीमार है, गेहूं बेचकर आज इलाज कराया है। खेत को पलेवा करने और खाद-बीज के लिए पैसे नहीं है। क्या करें, कुछ सूझ नहीं रहा है। लग रहा है कि खेत परती पड़े रहेंगे।
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घासीपुर के रहीश अहमद का कहना है कि, जेब में सिर्फ 10 रुपये पड़े हैं। रबी की फसल की तैयारी इसी हफ्ते में होनी है। मगर पैसे का इंतजाम नहीं होने से खेती की शुरुआत नहीं कर पा रहे हैं। चार दिन से बैंक के चक्कर लगा रहे हैं। कैश नहीं होने की बात कही जा रही है।
परशुरामपुर के तौफीक बेग का कहना है कि, धान की कटाई कर ली थी। उसे बेचकर जो पैसा मिला, बैंक में जमा कर दिया। मसूर और सरसों बोने की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच 500 व 1000 के नोट बंद कर दिए गए। पैसा निकल नहीं पा रहा है। जिसके चलते मसूर और सरसों नहीं बो पाए। गेहूं बोने का भी इंतजाम नहीं हो रहा है।
मुरौवा महसी के रमजान का कहना है कि, गेहूं के खाद-बीज के लिए दुकानदार से बात की थी, वह उधार देने के लिए तैयार नहीं है। लग रहा है, खेत परती ही पड़े रह जाएंगे। अब तक खेत बोआई का कोई इंतजाम नहीं हो सका है।
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बेबस किसानों का कहना है कि प्रधानमंत्री के कदम से भ्रष्टाचार तो खत्म हो जाएगा मगर व्यवस्था सुधारने के लिए काम करने की जरूरत है। वहीं, कुछ किसानों का कहना है कि देर-सबेर बोआई करेंगे, लेकिन कम से कम भ्रष्टाचार तो खत्म हो जाएगा।
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फखरपुर के शरदपारा निवासी किसान छेद्दू का कहना है कि, 500 और 1000 के नोटों के सात हजार रुपये थे। जिसे दो दिन पूर्व बैंक में जमा कर दिया। मगर पैसा नहीं दिया गया। कैश नहीं होने की बात बताई गई। बेटा बीमार है, गेहूं बेचकर आज इलाज कराया है। खेत को पलेवा करने और खाद-बीज के लिए पैसे नहीं है। क्या करें, कुछ सूझ नहीं रहा है। लग रहा है कि खेत परती पड़े रहेंगे।
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घासीपुर के रहीश अहमद का कहना है कि, जेब में सिर्फ 10 रुपये पड़े हैं। रबी की फसल की तैयारी इसी हफ्ते में होनी है। मगर पैसे का इंतजाम नहीं होने से खेती की शुरुआत नहीं कर पा रहे हैं। चार दिन से बैंक के चक्कर लगा रहे हैं। कैश नहीं होने की बात कही जा रही है।
परशुरामपुर के तौफीक बेग का कहना है कि, धान की कटाई कर ली थी। उसे बेचकर जो पैसा मिला, बैंक में जमा कर दिया। मसूर और सरसों बोने की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच 500 व 1000 के नोट बंद कर दिए गए। पैसा निकल नहीं पा रहा है। जिसके चलते मसूर और सरसों नहीं बो पाए। गेहूं बोने का भी इंतजाम नहीं हो रहा है।
मुरौवा महसी के रमजान का कहना है कि, गेहूं के खाद-बीज के लिए दुकानदार से बात की थी, वह उधार देने के लिए तैयार नहीं है। लग रहा है, खेत परती ही पड़े रह जाएंगे। अब तक खेत बोआई का कोई इंतजाम नहीं हो सका है।