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Bahraich News: खुद की भूमि पर अतिक्रमण, पटरियों से संचालित हो रही बस
Wed, 15 May 2024 12:56 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Wed, 15 May 2024 12:56 AM IST
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खुद की भूमि पर अतिक्रमण, पटरियों से संचालित हो रहीं बसें
तमाम वादे व दावे के बाद भी नहीं दूर हुई आवागमन की समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती।खुद की भूमि व भवन होने के बावजूद परिवहन निगम स्वयं मार्ग से ही बसों का संचालन करवा रहा है। जिससे दैनिक यात्री परेशान हैं।
भिनगा नगर में पर्याप्त भूमि होने के बावजूद भी खुद का डिपो न होने से जिले में बसों की संख्या बढ़ नहीं रही है। गैर डिपो से संचालित बसें कब आएंगी, कब नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है। इस कारण यह जिला महानगरों से सीधा जुड़ नही पा रहा है। यही हाल बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती सहित जिले के अन्य क्षेत्रों का भी है। इकौना व गिलौला में परिवहन निगम का बस अड्डा होने के बावजूद यहां से बसों का संचालन नहीं हो रहा है। लोगों को आवागमन के लिए हर मौसम में सड़क किनारे बसों का इंतजार करना पड़ता है। वहीं लक्ष्मनपुर, सिरसिया, ताल बघौड़ा, परसा, जमुनहा, बदला मार्ग पर संचालित निजी बसें भी मार्ग की पटरियों के सहारे ही संचालित हो रही हैं। जबकि इकौना, गिलौला, खुटेहना व लक्ष्मण नगर गिलौला मार्ग पर बसों का संचालन न होने से लोग डग्गामार वाहनों से सफर करने को मजबूर हैं। सबसे खराब स्थिति जोखवा बाजार से लक्ष्मनपुर होते हुए बेचई पुरवा, सिरसिया, चिल्हरिया, राजपुर मोड़, ताल बघौड़ा ककरदरी मार्ग की है। जिस पर आवागमन के संसाधन के अभाव में लोग निजी या फिर भार वाहनों का सहारा लेने को मजबूर हैं। हर चुनाव में जिले में आवागमन की समस्या मुख्य चुनावी मुद्दा बनती रही है। लेकिन चुनाव बाद आश्वासन देने वाले प्रतिनिधियों ने कभी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया।
वादा नहीं गारंटी दें नेता
भिनगा के सिविल लाइन निवासी विष्णु कुमार शुक्ला कहते हैं कि बात चाहे लोकसभा चुनाव की हो या विधानसभा चुनाव की। हर चुनाव में आवागमन के संसाधनों का अभाव चुनावी मुद्दा बनता है। लेकिन चुनाव जीतने के बाद नेताओं को इसकी याद नहीं आती। वहीं राम छवि यादव कहते हैं कि जिले में रेल लाइन बिछाने की निर्धारित समय सीमा पूरी हो रही है। लेकिन अब तक पटरी भी नहीं बिछी। रवींद्र शुक्ल का कहना है कि भिनगा में डिपो की भूमि पर बस अड्डा बना दिया गया। जिस पर कुछ ही बसें आती हैं। यदि यह डिपो होता तो प्रदेश के विभिन्न महानगरों के लिए सीधी बस सेवा मिलती। ऐसा ही कहना अन्य लोगों का भी है। जो आवागमन के संसाधनों के अभाव को जिले के विकास में बाधा बताते हुए जनप्रतिनिधियों से वादा नहीं गारंटी मांग रहे हैं।
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तमाम वादे व दावे के बाद भी नहीं दूर हुई आवागमन की समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती।खुद की भूमि व भवन होने के बावजूद परिवहन निगम स्वयं मार्ग से ही बसों का संचालन करवा रहा है। जिससे दैनिक यात्री परेशान हैं।
भिनगा नगर में पर्याप्त भूमि होने के बावजूद भी खुद का डिपो न होने से जिले में बसों की संख्या बढ़ नहीं रही है। गैर डिपो से संचालित बसें कब आएंगी, कब नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है। इस कारण यह जिला महानगरों से सीधा जुड़ नही पा रहा है। यही हाल बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती सहित जिले के अन्य क्षेत्रों का भी है। इकौना व गिलौला में परिवहन निगम का बस अड्डा होने के बावजूद यहां से बसों का संचालन नहीं हो रहा है। लोगों को आवागमन के लिए हर मौसम में सड़क किनारे बसों का इंतजार करना पड़ता है। वहीं लक्ष्मनपुर, सिरसिया, ताल बघौड़ा, परसा, जमुनहा, बदला मार्ग पर संचालित निजी बसें भी मार्ग की पटरियों के सहारे ही संचालित हो रही हैं। जबकि इकौना, गिलौला, खुटेहना व लक्ष्मण नगर गिलौला मार्ग पर बसों का संचालन न होने से लोग डग्गामार वाहनों से सफर करने को मजबूर हैं। सबसे खराब स्थिति जोखवा बाजार से लक्ष्मनपुर होते हुए बेचई पुरवा, सिरसिया, चिल्हरिया, राजपुर मोड़, ताल बघौड़ा ककरदरी मार्ग की है। जिस पर आवागमन के संसाधन के अभाव में लोग निजी या फिर भार वाहनों का सहारा लेने को मजबूर हैं। हर चुनाव में जिले में आवागमन की समस्या मुख्य चुनावी मुद्दा बनती रही है। लेकिन चुनाव बाद आश्वासन देने वाले प्रतिनिधियों ने कभी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया।
वादा नहीं गारंटी दें नेता
भिनगा के सिविल लाइन निवासी विष्णु कुमार शुक्ला कहते हैं कि बात चाहे लोकसभा चुनाव की हो या विधानसभा चुनाव की। हर चुनाव में आवागमन के संसाधनों का अभाव चुनावी मुद्दा बनता है। लेकिन चुनाव जीतने के बाद नेताओं को इसकी याद नहीं आती। वहीं राम छवि यादव कहते हैं कि जिले में रेल लाइन बिछाने की निर्धारित समय सीमा पूरी हो रही है। लेकिन अब तक पटरी भी नहीं बिछी। रवींद्र शुक्ल का कहना है कि भिनगा में डिपो की भूमि पर बस अड्डा बना दिया गया। जिस पर कुछ ही बसें आती हैं। यदि यह डिपो होता तो प्रदेश के विभिन्न महानगरों के लिए सीधी बस सेवा मिलती। ऐसा ही कहना अन्य लोगों का भी है। जो आवागमन के संसाधनों के अभाव को जिले के विकास में बाधा बताते हुए जनप्रतिनिधियों से वादा नहीं गारंटी मांग रहे हैं।
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