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Bahraich News: घोटालों के आरोपी डीपीआरओ पर मेहरबानी
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बहराइच। नौकरी में जलवा हो तो यहां के डीपीआरओ जैसा...। पहुंच इतनी ऊंची कि घोटाले पर घोटाले करते रहे और जांच रिपोर्ट भी दबवा दी। डीएम और जांच अफसर तो आते जाते रहते हैं। जिले में करीब तीन साल से ज्यादा समय से तैनात डीपीआरओ उमाकांत पांडेय के नए-नए कारनामे सामने आने लगे हैं।
स्वच्छता अभियान में ग्राम पंचायतों में होर्डिंग्स लगाने के नाम पर जहां करीब चार करोड़ की घपलेबाजी उजागर हुई वहीं गांवों में बनने वाले शौचालयों में भी करोड़ों के गबन की बात अब सामने आ रही है।
तत्कालीन डीएम शंभू कुमार ने इनके खिलाफ निदेेशक पंचायती राज को कार्रवाई के लिए जो आरोप पत्र भेजा है उसमें बताया गया है कि 16 दिसंबर वर्ष 2019 में यह बात सामने आई कि बहराइच में स्वच्छ भारत मिशन के 80 करोड़ रुपये खर्च करने में गड़बड़ी हुई है।
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जांच में पाया गया कि इस धन से 1045 ग्राम पंचायतों में लाभार्थियों को शौचालय निर्माण के लिए भुगतान करना था लेकिन तमाम लाभार्थियों को उनके खाते में पैसा नहीं दिया गया। वहंीं विभाग की वेबसाइट पर दिखा दिया गया कि धन का भुगतान किया जा चुका है।
इसके बाद प्रदेश के मुख्य सचिव ने इस पर एतराज जताते हुए कहा था कि ऐसा लग रहा है कि निर्माण कराए बिना ही यह काम पूरा दिखा दिया गया। इससे लग रहा है कि लाभार्थियों ने स्वयं ही शौचालय बनवाए हैं। मुख्य सचिव ने दोषियों पर कार्रवाई के भी निर्देश दिए थे लेकिन हुआ कुछ नहीं।
वीडीओ से दबाव बनाकर लगवाई मनमानी रिपोर्ट
ये भी आरोप है कि डीपीआरओ ने मिहींपुरवा, रिसिया, शिवपुर व बलहा विकास खंड के सहायक विकास अधिकारियों पर दबाव बनाते हुए अपने पक्ष में रिपोर्ट बनवाई थी। 30 जून 2020 को इस मामले में डीएम को आख्या दी थी। इसके बाद इस पूरे मामले में अनियमितता होने की बात भी सामने आई थी।
बहराइच में डीपीआरओ के खिलाफ डीएम के स्तर से निदेशक पंचायतीराज को भेजे गए आरोप पत्र के बारे में जानकारी नहीं है। मामले की जांच करवाकर कार्रवाई करेंगे। मनोज कुमार सिंह, एसीएस पंचायती राज
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स्वच्छता अभियान में ग्राम पंचायतों में होर्डिंग्स लगाने के नाम पर जहां करीब चार करोड़ की घपलेबाजी उजागर हुई वहीं गांवों में बनने वाले शौचालयों में भी करोड़ों के गबन की बात अब सामने आ रही है।
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तत्कालीन डीएम शंभू कुमार ने इनके खिलाफ निदेेशक पंचायती राज को कार्रवाई के लिए जो आरोप पत्र भेजा है उसमें बताया गया है कि 16 दिसंबर वर्ष 2019 में यह बात सामने आई कि बहराइच में स्वच्छ भारत मिशन के 80 करोड़ रुपये खर्च करने में गड़बड़ी हुई है।
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जांच में पाया गया कि इस धन से 1045 ग्राम पंचायतों में लाभार्थियों को शौचालय निर्माण के लिए भुगतान करना था लेकिन तमाम लाभार्थियों को उनके खाते में पैसा नहीं दिया गया। वहंीं विभाग की वेबसाइट पर दिखा दिया गया कि धन का भुगतान किया जा चुका है।
इसके बाद प्रदेश के मुख्य सचिव ने इस पर एतराज जताते हुए कहा था कि ऐसा लग रहा है कि निर्माण कराए बिना ही यह काम पूरा दिखा दिया गया। इससे लग रहा है कि लाभार्थियों ने स्वयं ही शौचालय बनवाए हैं। मुख्य सचिव ने दोषियों पर कार्रवाई के भी निर्देश दिए थे लेकिन हुआ कुछ नहीं।
वीडीओ से दबाव बनाकर लगवाई मनमानी रिपोर्ट
ये भी आरोप है कि डीपीआरओ ने मिहींपुरवा, रिसिया, शिवपुर व बलहा विकास खंड के सहायक विकास अधिकारियों पर दबाव बनाते हुए अपने पक्ष में रिपोर्ट बनवाई थी। 30 जून 2020 को इस मामले में डीएम को आख्या दी थी। इसके बाद इस पूरे मामले में अनियमितता होने की बात भी सामने आई थी।
बहराइच में डीपीआरओ के खिलाफ डीएम के स्तर से निदेशक पंचायतीराज को भेजे गए आरोप पत्र के बारे में जानकारी नहीं है। मामले की जांच करवाकर कार्रवाई करेंगे। मनोज कुमार सिंह, एसीएस पंचायती राज