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रक्तदान है महादान, यह पुण्य कर बचाएं जान

Wed, 30 Sep 2015 09:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच Updated Wed, 30 Sep 2015 09:56 PM IST
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बहराइच। दुनिया में रक्त का दूसरा विकल्प नहीं है, रक्त की पूर्ति केवल रक्त से ही हो सकती है। रक्तदान महादान है, जीवनदान है। इससे बढ़कर कोई पुण्य नहीं है फिर भी लोग अज्ञानतावश इस पुण्य कार्य के भागीदार नहीं बन रहे।
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जिला अस्पताल बहराइच का ब्लड बैंक देवीपाटन मंडल का सबसे बड़ा ब्लड बैंक होने के बावजूद खून को तरस रहा है क्योंकि यहां रक्तदान करने वाला कोई नहीं है। आंकड़ों पर गौर करें तो इस ब्लड बैंक की क्षमता लगभग छह सौ यूनिट खून सहेजकर रखने की है।
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यूनिट ब्लड को सुरक्षित रखने के लिए ब्लड बैंक में -40 से लेकर -80 डिग्री तक के फ्रीजर हैं। खून में से लाल रक्त कणिकाएं, प्लाज्मा व एंटी क्लॉटिंग फैक्टर को अलग करने के लिए ब्लड सेपरेशन मशीन भी है। लेकिन, रक्तदाताओं की कमी के चलते ब्लडबैंक में मात्र 141 यूनिट खून ही इस समय बैलेंस में है।
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झुलसे, सड़क हादसों में घायल व एनिमिक मरीजों को अक्सर खून की जरूरत होती है। आंकड़ों पर गौर करें तो प्रतिदिन औसतन 25 से 30 यूनिट खून की दरकार होती है। ऐसे में ब्लड बैंक में खून की कमी अखरती है। खून के इंतजाम के लिए तीमारदारों को भी परेशान होना पड़ता है।

अस्पताल के अधिकारी भी मरीजों के खून के इंतजाम के लिए आए दिन माथापच्ची से गुजरते हैं और इसी बीच कई बार खून की कमी मरीज की जिंदगी भी खतरे में पड़ जाती है। आज राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस है। आइए, इस मौके पर रक्तदान कर दूसरों को जीवनदान करें।

कभी भी क्षमता के अनुरूप नहीं पूरा हुआ कोटा
ब्लड बैंक 600 यूनिट क्षमता का है लेकिन इसके मुताबिक ब्लड का कोटा कभी भी पूरा नहीं रहा। प्रतिमाह औसतन 3 से चार सौ यूनिट महिला, पुरुष अस्पताल व निजी नर्सिंग होम को सप्लाई किया जा रहा है। वर्तमान में यहां सिर्फ 141 यूनिट खून ही उपलब्ध है। जबकि साल भर में शिविर व स्वैच्छिक रक्तदान से 2608 यूनिट खून मिला है, वहीं 2551 यूनिट मरीजों को दिया जा चुका है।

शिविर से बैंक को मिला इतना खून
डॉ आनंद मिश्रा ने बताया कि अप्रैल 2015 से अब तक 10 शिविर लगाए जा चुके हैं। इसके जरिए 175 यूनिट ब्लड मिल सका है।

जरुरतमंदों को दिया जाता है खून
ब्लड बैंक में खून की कमी को पूरा करने के लिए जरूरतमंद रोगी के तीमारदार से खून भी लिया जाता है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ माहेश्वरी पांडेय ने बताया कि ब्लड बैंक में खून की कमी न हो। इसके बदले खून के बदले खून की व्यवस्था की गई है। वहीं बीपीएल कार्ड धारक को मुफ्त खून दिया जाता है।

एसएसबी जवानों का बेहतर परफार्मेंस
वरिष्ठ पैथोलॉजिस्ट डॉ आनंद मिश्रा ने बताया कि ब्लड बैंक में स्वैच्छिक रक्तदाताओं के रुप में एसएसबी, गुरुद्वारा सभा, सैय्यदबाड़ा, कमांडेंट होमगार्ड, इंजीनियर्स एसोसिएशन, एचडीएफसी बैंक, पुलिस लाइन, परमहंस डिग्री कालेज, ठाकुर हुकुम सिंह किसान पीजी कालेज आदि संस्थाओं के करीब 1100 लोग पंजीकृत हैं। इनमें एसएसबी जवानों का परफार्मेंस ही सबसे बेहतर है।अन्य दान दाता अक्सर दगा दे जाते हैं।

वैदेहीशरण ने बनाया रिकार्ड
शिवपुर के सिद्धनपुरवा कोटवा गांव निवासी वैदेहीशरण विश्वकर्मा गत कई वर्षों से स्वैच्छिक रक्तदान करते आ रहे हैं। उन्होंने अब तक 18 बार खून दान किया है। वैदेहीशरण ने जीवन में सौ बार खून दान करने का लक्ष्य बनाया है। अस्पताल प्रबंधन उन्हें सम्मानित भी कर चुका है।

रक्तदान जीवन दान है
रक्तदान जीवनदान है। हमारे द्वारा किया गया रक्तदान कई जिंदगियों को  बचाता है। इस बात का अहसास हमें तब होता है जब हमारा कोई अपना खून के लिए  जिंदगी और मौत के बीच जूझता है। उस वक्त हम नींद से जागते हैं और उसे बचाने  के लिए खून के इंतजाम की जद्दोजहद करते हैं।
-आलोक श्रीवास्तव, खिलाड़ी

पुनीत कार्य में करें सभी सहयोग
अनायास दुर्घटना या बीमारी का शिकार हममें से कोई भी हो सकता है। आज हम  सभी शिक्षित व सभ्य समाज के नागरिक है, जो केवल अपनी नहीं बल्कि दूसरों की  भलाई के लिए भी सोचते हैं तो क्यों नहीं हम रक्तदान के पुनीत कार्य में  अपना सहयोग प्रदान करें और लोगों को जीवनदान दें।

-शीतल, गृहणीं

रक्तदान से नहीं आती कमजोरी
रक्तदान करने से व्यक्ति को बीमारी नहीं होती, बल्कि शरीर में नये रक्त का निर्माण होता है। लोगों का ये भ्रम है कि रक्तदान करने से कमजोरी आएगी। एक व्यक्ति का एक यूनिट खून से किसी की जान बचा सकता है। रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं, इसलिए भ्रम छोड़कर रक्तदान के लिए लोग आगे आएं तो न सिर्फ खून की किल्लत खत्म होगी, बल्कि गरीब रोगियों और दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों को नया जीवन मिल सकेगा।
- डॉ. माहेश्वरी पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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