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नेपाल में संविधान का विरोध तेज, आज बंदी
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Tue, 22 Sep 2015 10:26 PM IST
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रुपईडीहा (बहराइच)। नेपाल में लागू हुए लोकतांत्रिक संविधान का व्यापक स्तर पर विरोध शुरू कर दिया गया है। संयुक्त थरुहट मधेस संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आरपार की लड़ाई का ऐलान किया है। इसके तहत मंगलवार दोपहर आंदोलनकारियों ने बीपी चौक पर स्थापित प्रतिमा पर काला झंडा लगाकर आंदोलन शुरू करने की घोषणा की।
वहीं, बुधवार को नेपाल में बंदी की घोषणा की है। इंडो-नेपाल सीमा क्षेत्र में सभा कर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
भारतीय सीमा से सटे नेपाल के जमुनहा में सभा करते हुए संयुक्त थरूहट मधेस संघर्ष समिति के प्रवक्ता पशुपति दयाल मिश्र ने कहा कि व्यापक पैमाने पर विरोध के बावजूद सरकार ने नेपाल में संविधान को लागू कर दिया है।
मधेस स्वायत्त प्रदेश स्थापना की मांग को सरकार ने ठुकरा दिया है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी के चलते व्यापक जनांदोलन की तैयारी की की गई है। जो भी आंदोलन का विरोध करेगा, उसे आक्रोश झेलना होगा। प्रवक्ता ने कहा कि बुधवार से नेपाल में फिर बंदी शुरू की जाएगी।
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जब तक मांगें मानी नहीं जाएंगी, तब तक आंदोलन थमेगा नहीं।
संघर्ष समिति के गिरिजा प्रसाद और ललित रौनियार ने कहा कि यह आम जनमानस की लड़ाई है। आंदोलनकारियों ने सीमा परिक्षेत्र में वाहनों का संचालन बुधवार से रोकने का अल्टीमेटम दिया।
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वहीं, बुधवार को नेपाल में बंदी की घोषणा की है। इंडो-नेपाल सीमा क्षेत्र में सभा कर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
भारतीय सीमा से सटे नेपाल के जमुनहा में सभा करते हुए संयुक्त थरूहट मधेस संघर्ष समिति के प्रवक्ता पशुपति दयाल मिश्र ने कहा कि व्यापक पैमाने पर विरोध के बावजूद सरकार ने नेपाल में संविधान को लागू कर दिया है।
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मधेस स्वायत्त प्रदेश स्थापना की मांग को सरकार ने ठुकरा दिया है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी के चलते व्यापक जनांदोलन की तैयारी की की गई है। जो भी आंदोलन का विरोध करेगा, उसे आक्रोश झेलना होगा। प्रवक्ता ने कहा कि बुधवार से नेपाल में फिर बंदी शुरू की जाएगी।
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जब तक मांगें मानी नहीं जाएंगी, तब तक आंदोलन थमेगा नहीं।
संघर्ष समिति के गिरिजा प्रसाद और ललित रौनियार ने कहा कि यह आम जनमानस की लड़ाई है। आंदोलनकारियों ने सीमा परिक्षेत्र में वाहनों का संचालन बुधवार से रोकने का अल्टीमेटम दिया।