{"_id":"658dc5f55939ab7b640f5fc4","slug":"dialysis-started-bahraich-news-c-98-1-bhr1001-8183-2023-12-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bahraich News: मेडिकल कॉलेज में शुरू हुई डायलिसिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bahraich News: मेडिकल कॉलेज में शुरू हुई डायलिसिस
Fri, 29 Dec 2023 12:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Fri, 29 Dec 2023 12:31 AM IST
विज्ञापन
बहराइच। जिले के मरीजों को अब डायलिसिस के दूसरे शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उनकी सहूलियत के लिए मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस की सुविधा शुरू हो गई है। इसका शुभारंभ बृहस्पतिवार को प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने वर्चुअल माध्यम से किया।
इस अवसर पर महर्षि बालार्क चिकित्सालय में आयोजित कार्यक्रम में विधायक सदर अनुपमा जायसवाल ने डीएम मोनिका रानी के साथ डायलिसिस कक्ष का औपचारिक उद्घाटन किया। इसमें एक साथ 10 मरीजों की डायलिसिस की जा सकती है। पहले दिन जिले के दो मरीजों की डायलिसिस की गई।
जिले के सरकारी अस्पतालों में अभी तक डायलिसिस की सुविधा नहीं होने से मरीजों को लखनऊ व दूसरे शहरों की दौड़ लगानी पड़ती थी। मरीजों की परेशानी को देखते हुए महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं महर्षि बालार्क चिकित्सालय में डायलिसिस की सुविधा शुरू करने की मांग की जा रही थी।
विज्ञापन
इसके लिए भेजे गए प्रस्ताव को शासन ने मंजूरी के साथ कुछ माह पूर्व जरूरी धनराशि भी आवंटित की थी। उससे मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस यूनिट की स्थापना की गई। इसके शुभारंभ के साथ मरीजों की डायलिसिस भी शुरू कर दी गई।
इस यूनिट में 10 मरीजों की एक साथ डायलिसिस की जा सकती है। इसके लिए मरीजों को कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा। एक रुपये के पर्चे पर मरीजों को डायलिसिस की सुविधा ले सकेंगे। इस मौके पर एमएलसी के प्रतिनिधि परमार्थ चौधरी, मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. संजय खत्री, सीएमओ डॉ. एसके सिंह, सीएमएस डॉ. एमएमएम त्रिपाठी के साथ कई अधिकारी मौजूद थे।
दो मरीजों ने कराई डायलिसिस
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. संजय खत्री ने बताया कि पहले दिन रिसिया बाजार निवासी इकबाल खान (50) व शहर के आबिद अली (50) की निशुल्क डायलिसिस की गई। निजी अस्पतालों में एक बार डायलिसिस कराने पर मरीज को तीन-चार हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। मेडिकल कॉलेज में मरीज की डायलिसिस निशुल्क की जाएगी। यह सुविधा शुरू होने से बहराइच के साथ आसपास के जिलों से आने वाले मरीजों को लाभ मिल सकेगा। मालूम हो कि मेडिकल कॉलेज में पड़ोस के गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती जनपद के साथ नेपाल के मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। कई मरीज डायलिसिस कराने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे मरीजों को अभी तक लखनऊ रेफर किया जाता था।
विज्ञापन
इस अवसर पर महर्षि बालार्क चिकित्सालय में आयोजित कार्यक्रम में विधायक सदर अनुपमा जायसवाल ने डीएम मोनिका रानी के साथ डायलिसिस कक्ष का औपचारिक उद्घाटन किया। इसमें एक साथ 10 मरीजों की डायलिसिस की जा सकती है। पहले दिन जिले के दो मरीजों की डायलिसिस की गई।
विज्ञापन
जिले के सरकारी अस्पतालों में अभी तक डायलिसिस की सुविधा नहीं होने से मरीजों को लखनऊ व दूसरे शहरों की दौड़ लगानी पड़ती थी। मरीजों की परेशानी को देखते हुए महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं महर्षि बालार्क चिकित्सालय में डायलिसिस की सुविधा शुरू करने की मांग की जा रही थी।
विज्ञापन
इसके लिए भेजे गए प्रस्ताव को शासन ने मंजूरी के साथ कुछ माह पूर्व जरूरी धनराशि भी आवंटित की थी। उससे मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस यूनिट की स्थापना की गई। इसके शुभारंभ के साथ मरीजों की डायलिसिस भी शुरू कर दी गई।
इस यूनिट में 10 मरीजों की एक साथ डायलिसिस की जा सकती है। इसके लिए मरीजों को कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा। एक रुपये के पर्चे पर मरीजों को डायलिसिस की सुविधा ले सकेंगे। इस मौके पर एमएलसी के प्रतिनिधि परमार्थ चौधरी, मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. संजय खत्री, सीएमओ डॉ. एसके सिंह, सीएमएस डॉ. एमएमएम त्रिपाठी के साथ कई अधिकारी मौजूद थे।
दो मरीजों ने कराई डायलिसिस
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. संजय खत्री ने बताया कि पहले दिन रिसिया बाजार निवासी इकबाल खान (50) व शहर के आबिद अली (50) की निशुल्क डायलिसिस की गई। निजी अस्पतालों में एक बार डायलिसिस कराने पर मरीज को तीन-चार हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। मेडिकल कॉलेज में मरीज की डायलिसिस निशुल्क की जाएगी। यह सुविधा शुरू होने से बहराइच के साथ आसपास के जिलों से आने वाले मरीजों को लाभ मिल सकेगा। मालूम हो कि मेडिकल कॉलेज में पड़ोस के गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती जनपद के साथ नेपाल के मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। कई मरीज डायलिसिस कराने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे मरीजों को अभी तक लखनऊ रेफर किया जाता था।