{"_id":"6a6264b3784258e72f05b28a","slug":"death-sentence-for-man-convicted-of-raping-and-murdering-a-boy-bahraich-news-c-13-1-lko1022-1842041-2026-07-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bahraich News: बालक से दुष्कर्म व हत्या के दोषी को फांसी की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bahraich News: बालक से दुष्कर्म व हत्या के दोषी को फांसी की सजा
विज्ञापन
बहराइच। कैसरगंज थाना के एक गांव निवासी सात वर्षीय बालक से अप्राकृतिक दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अरविंद कुमार गौतम की अदालत ने बृहस्पतिवार को दोषी मुकेश निषाद को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। प्राथमिकी दर्ज होने के मात्र 71 दिनों के भीतर आए इस फैसले को त्वरित न्याय का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी ने 13 मई 2026 को कैसरगंज थाने में तहरीर देकर बताया था कि उसका सात वर्षीय पुत्र 12 मई को रामू निषाद के यहां आयोजित एक वैवाहिक कार्यक्रम में गया था। रात में घर न लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। अगले दिन घर से करीब 400 मीटर दूर बालक का शव बरामद हुआ। उसके गले पर गहरे चोट के निशान थे।
वादी ने तहरीर में बताया था कि पांच मई को देवनाथपुरवा गांव में एक बारात के दौरान दयालपुरवा मंझारा तौकली निवासी मुकेश निषाद, रामविजय निषाद और रामबली के साथ मारपीट हुई थी, जिसके बाद बालक को जान से मारने की धमकी दी गई थी। इसी आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों के विरुद्ध पॉक्सो अधिनियम एवं हत्या सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की।
विज्ञापन
जांच के दौरान पुलिस को रामविजय और रामबली के विरुद्ध साक्ष्य नहीं मिले, इसलिए उनका नाम मुकदमे से हटा दिया गया। वहीं मुकेश निषाद के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर उसके खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। 20 जून को न्यायालय ने आरोपपत्र का संज्ञान लेकर मुकदमे की सुनवाई शुरू की।
सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) ने घटना को जघन्य और दुर्लभतम अपराध बताते हुए दोषी को अधिकतम दंड देने की मांग की। न्यायालय ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर मुकेश निषाद को दोषी करार देते हुए उसे फांसी की सजा तथा एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माने की राशि का 50 प्रतिशत मृतक के पिता को प्रतिकर के रूप में दिया जाए।
यह दुर्लभतम श्रेणी का अपराध : अदालत
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अरविंद कुमार गौतम ने अपने निर्णय में कहा कि अपराध की प्रकृति, उसकी भयावहता, समाज पर पड़ने वाले प्रभाव और आरोपी की मानसिकता को देखते हुए यह मामला दुर्लभतम से भी दुर्लभ श्रेणी में आता है। न्यायालय ने कहा कि एक अबोध बालक के साथ की गई यह बर्बर घटना अत्यंत जघन्य है। इसलिए दोषी को फांसी की सजा दी जाती है तथा आदेश दिया जाता है कि उसे तब तक फांसी पर लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी ने 13 मई 2026 को कैसरगंज थाने में तहरीर देकर बताया था कि उसका सात वर्षीय पुत्र 12 मई को रामू निषाद के यहां आयोजित एक वैवाहिक कार्यक्रम में गया था। रात में घर न लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। अगले दिन घर से करीब 400 मीटर दूर बालक का शव बरामद हुआ। उसके गले पर गहरे चोट के निशान थे।
विज्ञापन
वादी ने तहरीर में बताया था कि पांच मई को देवनाथपुरवा गांव में एक बारात के दौरान दयालपुरवा मंझारा तौकली निवासी मुकेश निषाद, रामविजय निषाद और रामबली के साथ मारपीट हुई थी, जिसके बाद बालक को जान से मारने की धमकी दी गई थी। इसी आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों के विरुद्ध पॉक्सो अधिनियम एवं हत्या सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की।
विज्ञापन
जांच के दौरान पुलिस को रामविजय और रामबली के विरुद्ध साक्ष्य नहीं मिले, इसलिए उनका नाम मुकदमे से हटा दिया गया। वहीं मुकेश निषाद के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर उसके खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। 20 जून को न्यायालय ने आरोपपत्र का संज्ञान लेकर मुकदमे की सुनवाई शुरू की।
सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) ने घटना को जघन्य और दुर्लभतम अपराध बताते हुए दोषी को अधिकतम दंड देने की मांग की। न्यायालय ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर मुकेश निषाद को दोषी करार देते हुए उसे फांसी की सजा तथा एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माने की राशि का 50 प्रतिशत मृतक के पिता को प्रतिकर के रूप में दिया जाए।
यह दुर्लभतम श्रेणी का अपराध : अदालत
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अरविंद कुमार गौतम ने अपने निर्णय में कहा कि अपराध की प्रकृति, उसकी भयावहता, समाज पर पड़ने वाले प्रभाव और आरोपी की मानसिकता को देखते हुए यह मामला दुर्लभतम से भी दुर्लभ श्रेणी में आता है। न्यायालय ने कहा कि एक अबोध बालक के साथ की गई यह बर्बर घटना अत्यंत जघन्य है। इसलिए दोषी को फांसी की सजा दी जाती है तथा आदेश दिया जाता है कि उसे तब तक फांसी पर लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए।