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अपने लाल को अंतिम विदाई देने को उमड़ा हुजूम

Sun, 16 Jan 2022 11:33 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 16 Jan 2022 11:33 PM IST
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Crowds gathered to bid their last farewell to Lal
16 बीएचआर 25 - बहराइच के रिसिया में रविवार को जम्मू से सेना के जवान का शव आने के बाद शव यात्रा में उमड़? - फोटो : BAHRAICH
रिसिया (बहराइच)। कंधे से कंधा मिलाकर खड़े सैनिक। कदमों पर झुकी संगीनें। तिरंगे में लिपटा सर्वजीत सिंह का पार्थिव शव। दिल गमगीन। आकाश में गूंज रहा था कि सर्वजीत सिंह अमर रहें... भारत माता की जय... वंदे मातरम। जब तक सूरज चांद रहेगा, तब तक सर्वजीत भइया का नाम रहेगा। यह नजारा रविवार को सिखनपुरवा गांव में सेना के जवान सर्वजीत सिंह की अंतिम विदाई के दौरान दिखा। पिता सुरेंद्र सिंह ने अपने बेटे को मुखाग्नि दी तो वहां खड़े लोगों की आंखों से आंसू निकल पड़े। अंतिम संस्कार में हजारों की संख्या में लोगों का जनसैलाब उमड़ा रहा।
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रिसिया थाना क्षेत्र के सिखनपुरवा गांव निवासी 24 वर्षीय सर्वजीत सिंह की बीते 13 जनवरी को ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी। तीन दिन बाद हवाई जहाज से शव लखनऊ पहुंचा। लखनऊ में जवान के रिश्तेदार चरनजीत सिंह ने शव को शनिवार की रात 10 बजे अपने सुपुर्द लिया। शनिवार की देर रात जवान के शव को लेकर गांव के लिए रवाना हुए और रविवार की भोर तीन बजे जवान के पैतृक आवास पहुंचे। भारतीय सेना के जवान सर्वजीत सिंह को अंतिम विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। अंतिम यात्रा के दौरान हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी रही। सबके मन में सिर्फ एक लालसा थी कि उस शख्सियत के दर्शन हो जाएं, जो देश की सुरक्षा के लिए शहीद हो गया है। भीड़ इस कदर उमड़ी कि पुलिस ने कहा कि पीछे हटो तो लोगों ने हाथ जोड़ लिए कि बस दो फूल चढ़ाने दो। जो भीड़ की दीवार चीरकर सर्वजीत के पार्थिव शरीर तक नहीं पहुंच पाया। उसने दूर से ही फूलों की वर्षा कर अपने भाव को समर्पित किए। सर्वजीत ने अपने अंतिम यात्रा में सबको रुला दिया। इस अंतिम यात्रा में सिर्फ दर्द, आंसू या चीखें ही नहीं थीं, जोश और जज्बा भी दिख रहा था। गार्ड ऑफ ऑनर के साथ शहीद जवान को अंतिम विदाई दी गई। अंतिम संस्कार के दौरान जनसैलाब के साथ नेताओं व अधिकारियों का भी हुजूम उमड़ा रहा।
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हर कोई शहीद की झलक पाने को था बेताब
शहीद जवान का पार्थिव शरीर पहुंचने के बाद दर्शन करने के लिए पंडाल में शव रखा गया। सुबह चार बजे से शुरू हुआ अंतिम दर्शन का सिलसिला तो दोपहर 12 बजे तक चलता रहा। हर कोई शहीद जवान की झलक पाने के लिए बेताब दिखा। सभी की आंखें नम रहीं और दिल में जज्बा कायम रहा।
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जोश के आगे बेअसर रही ठंड
रविवार को कड़ाके की ठंड रही। सुबह घना कोहरा रहा तो दिनभर बादल छाया रहा, लेकिन यह ठंड सिखरनपुरवा में लोगों के जोश के आगे बेअसर रहा। लोग बिना स्वेटर व टोपी के ही पार्थिव शरीर के पास डटे रहे। कुछ ऐसे भी लोग रहे, जो सेवाभाव से लोगों को कुर्सी देने से लेकर फूल देने तक की जानकारी दे रहे थे। जिसे लोगों को कहीं भटकना नहीं पड़ा।

अधिकारियों ने भी दी श्रद्धांजलि
पार्थिव शरीर आने के बाद सुरक्षा के मद्देनजर सिखनपुरवा गांव में अधिकारी व पुलिसकर्मी मौजूद रहे। सीओ नानपारा जंग बहादुर यादव, सदर व नानपारा तहसीलदार, रिसिया थानाध्यक्ष रमाशंकर यादव समेत अन्य अधिकारियों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
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