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पिता ने तीन बच्चों को कुल्हाड़ी से काटा
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Fri, 26 Feb 2016 09:51 PM IST
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कटरा/इकौना (श्रावस्ती)। इकौना के महदेइया गांव निवासी एक विक्षिप्त युवक ने शुक्रवार सुबह अपने तीन बच्चों को कुल्हाड़ी से काट डाला।
स्कूल जाने के लिए तैयार बच्चों का कुसूर सिर्फ इतना था कि वे दादी से चूरा की जिद कर रहे थे। दो मासूमों ने तो मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि एक की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई।
इस वारदात को अंजाम देने के बाद भी युवक के हाथ नहीं कांपे और वह कुल्हाड़ी लेकर पत्नी व एक अन्य पुत्र को मारने के लिए अपनी ससुराल के लिए निकल पड़ा। हालांकि, पुलिस ने उसे रास्ते में गिरफ्तार कर लिया। विक्षिप्त के पिता ने बेटे के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
महदेइया निवासी सियाराम मिश्रा (35) पुत्र उदयचंद्र मिश्रा एक साल से मानसिक रूप से बीमार है। सियाराम और उसकी पत्नी सरोज के चार बच्चे राजन (12), मोहनी (8), शालिनी (4) व साजन (2) हैं।
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कुछ दिन पहले सरोज, साजन को लेकर मायके गिलौला के नानकार चली गई थी। गुरुवार को सियाराम पत्नी को लेने के लिए ससुराल गया लेकिन सरोज ने आने से मना कर दिया। इस कारण वह परेशान था।
शुक्रवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे राजन, मोहिनी व शालिनी विद्यालय जाने की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच तीनों अपनी दादी मंजू देवी से चूरा मांगने लगे।
जब तक मंजू बच्चों को चूरा लाकर देती तब तक बच्चों की जिद देख सियाराम आपा खो बैठा। उसने पास ही रखी कुल्हाड़ी उठाई और बच्चों पर वार कर दिया।
शालिनी और मोहनी की मौके पर जान चली गई, जबकि राजन को सीएचसी इकौना ले जाया गया। हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल बहराइच रेफर कर दिया लेकिन रास्ते में उसने भी दम तोड़ दिया।
घटना के बाद सियाराम पत्नी सरोज व पुत्र साजन को मारने के लिए घर से कुल्हाड़ी व ट्रैक्टर लेकर नानकार के लिए चल दिया। ग्रामीणों की सूचना पर गिलौला के पास पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
सियाराम के पिता उदयचंद्र की तहरीर पर इकौना पुलिस ने सियाराम के िखलाफ हत्या का केस दर्ज कर लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। एसपी हेमंत कुटियाल, एएसपी विजय पाल सिंह, सीओ भिनगा वीर सिंह आदि अफसरों ने घटनास्थल का जायजा लिया है।
डेढ़ साल से चल रहा था इलाज
उदयचंद्र के दो पुत्र सियाराम व नरेंद्र है। उदयचंद्र संपन्न किसान हैं। उनके दोनों बेटे सियाराम व नरेंद्र भी खेती में पूरा सहयोग करते थे। ग्रामीणों की मानें तो डेढ़ वर्ष पूर्व से सियाराम किसी बात को लेकर तनाव में था।
इसके बाद से वह मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गया। उसका इलाज चल रहा था। चार माह पूर्व सियाराम का पत्नी सरोज से विवाद हुआ था तो सियाराम ने पत्नी पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया था।
उसके सिर पर गंभीर चोट आई थी। एक सप्ताह पूर्व सरोज के मायके जाने से आक्रोशित सियाराम ने अपनी दस बीघा गन्ने की फसल में आग लगा दी थी।
आशीर्वाद देने वाले हाथ ही बने काल
डेढ़ साल पहले तक सियाराम काफी शांत और खुशमिजाज था। बच्चों को पढ़ा लिखा कर कुछ बनाना चाहता था लेकिन नियति को तो कुछ और ही मंजूर था। जिन बच्चों के सिर पर हाथ फेर कर उन्हें सदा खुश व सकुशल रहने का आशीर्वाद देता था, उन्हीं बच्चों की जान का दुश्मन बन गया।
सियाराम की मां मंजू देवी अपने सामने हुई पोता-पोतियों की हत्या से बदहवास हैं। उनके अनुसार सियाराम ने सबसे पहले मोहिनी पर कुल्हाड़ी से वार किया। राजन बचाने दौड़ा तो उस पर भी वार कर दिया।
दोनों को खून से लथपथ देख शालिनी चीखने लगी तो उसे भी नहीं छोड़ा। मंजू देवी के दौड़ने पर उन्हें भी धक्का दे दिया। इसके बाद पूरे परिवार को खत्म करने की बात कहता हुआ पत्नी और बेटे को मारने के लिए ससुराल जाने को दौड़ पड़ा।
पिता को देखने मायके आई थी सरोज
सरोज के पिता बलदेव प्रसाद शुक्ल ने एक सप्ताह पूर्व अपना ऑपरेशन कराया था। उन्हें देखने के लिए सरोज मायके आना चाहती थी लेकिन सियाराम उसे आने नहीं देना चाहता था। इस पर पति-पत्नी में विवाद भी हुआ था।
इससे आक्रोशित सियाराम ने सरोज को मारपीट कर घर से भगा दिया था। गुरुवार को पत्नी को विदा कराने आए सियाराम ने ससुराल में उसे मारापीटा, जिसके बाद पत्नी ने साथ आने से मना कर दिया था। इसका गुस्सा सियाराम ने शुक्रवार को तीनों बच्चों पर निकाला।
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स्कूल जाने के लिए तैयार बच्चों का कुसूर सिर्फ इतना था कि वे दादी से चूरा की जिद कर रहे थे। दो मासूमों ने तो मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि एक की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई।
इस वारदात को अंजाम देने के बाद भी युवक के हाथ नहीं कांपे और वह कुल्हाड़ी लेकर पत्नी व एक अन्य पुत्र को मारने के लिए अपनी ससुराल के लिए निकल पड़ा। हालांकि, पुलिस ने उसे रास्ते में गिरफ्तार कर लिया। विक्षिप्त के पिता ने बेटे के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
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महदेइया निवासी सियाराम मिश्रा (35) पुत्र उदयचंद्र मिश्रा एक साल से मानसिक रूप से बीमार है। सियाराम और उसकी पत्नी सरोज के चार बच्चे राजन (12), मोहनी (8), शालिनी (4) व साजन (2) हैं।
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कुछ दिन पहले सरोज, साजन को लेकर मायके गिलौला के नानकार चली गई थी। गुरुवार को सियाराम पत्नी को लेने के लिए ससुराल गया लेकिन सरोज ने आने से मना कर दिया। इस कारण वह परेशान था।
शुक्रवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे राजन, मोहिनी व शालिनी विद्यालय जाने की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच तीनों अपनी दादी मंजू देवी से चूरा मांगने लगे।
जब तक मंजू बच्चों को चूरा लाकर देती तब तक बच्चों की जिद देख सियाराम आपा खो बैठा। उसने पास ही रखी कुल्हाड़ी उठाई और बच्चों पर वार कर दिया।
शालिनी और मोहनी की मौके पर जान चली गई, जबकि राजन को सीएचसी इकौना ले जाया गया। हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल बहराइच रेफर कर दिया लेकिन रास्ते में उसने भी दम तोड़ दिया।
घटना के बाद सियाराम पत्नी सरोज व पुत्र साजन को मारने के लिए घर से कुल्हाड़ी व ट्रैक्टर लेकर नानकार के लिए चल दिया। ग्रामीणों की सूचना पर गिलौला के पास पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
सियाराम के पिता उदयचंद्र की तहरीर पर इकौना पुलिस ने सियाराम के िखलाफ हत्या का केस दर्ज कर लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। एसपी हेमंत कुटियाल, एएसपी विजय पाल सिंह, सीओ भिनगा वीर सिंह आदि अफसरों ने घटनास्थल का जायजा लिया है।
डेढ़ साल से चल रहा था इलाज
उदयचंद्र के दो पुत्र सियाराम व नरेंद्र है। उदयचंद्र संपन्न किसान हैं। उनके दोनों बेटे सियाराम व नरेंद्र भी खेती में पूरा सहयोग करते थे। ग्रामीणों की मानें तो डेढ़ वर्ष पूर्व से सियाराम किसी बात को लेकर तनाव में था।
इसके बाद से वह मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गया। उसका इलाज चल रहा था। चार माह पूर्व सियाराम का पत्नी सरोज से विवाद हुआ था तो सियाराम ने पत्नी पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया था।
उसके सिर पर गंभीर चोट आई थी। एक सप्ताह पूर्व सरोज के मायके जाने से आक्रोशित सियाराम ने अपनी दस बीघा गन्ने की फसल में आग लगा दी थी।
आशीर्वाद देने वाले हाथ ही बने काल
डेढ़ साल पहले तक सियाराम काफी शांत और खुशमिजाज था। बच्चों को पढ़ा लिखा कर कुछ बनाना चाहता था लेकिन नियति को तो कुछ और ही मंजूर था। जिन बच्चों के सिर पर हाथ फेर कर उन्हें सदा खुश व सकुशल रहने का आशीर्वाद देता था, उन्हीं बच्चों की जान का दुश्मन बन गया।
सियाराम की मां मंजू देवी अपने सामने हुई पोता-पोतियों की हत्या से बदहवास हैं। उनके अनुसार सियाराम ने सबसे पहले मोहिनी पर कुल्हाड़ी से वार किया। राजन बचाने दौड़ा तो उस पर भी वार कर दिया।
दोनों को खून से लथपथ देख शालिनी चीखने लगी तो उसे भी नहीं छोड़ा। मंजू देवी के दौड़ने पर उन्हें भी धक्का दे दिया। इसके बाद पूरे परिवार को खत्म करने की बात कहता हुआ पत्नी और बेटे को मारने के लिए ससुराल जाने को दौड़ पड़ा।
पिता को देखने मायके आई थी सरोज
सरोज के पिता बलदेव प्रसाद शुक्ल ने एक सप्ताह पूर्व अपना ऑपरेशन कराया था। उन्हें देखने के लिए सरोज मायके आना चाहती थी लेकिन सियाराम उसे आने नहीं देना चाहता था। इस पर पति-पत्नी में विवाद भी हुआ था।
इससे आक्रोशित सियाराम ने सरोज को मारपीट कर घर से भगा दिया था। गुरुवार को पत्नी को विदा कराने आए सियाराम ने ससुराल में उसे मारापीटा, जिसके बाद पत्नी ने साथ आने से मना कर दिया था। इसका गुस्सा सियाराम ने शुक्रवार को तीनों बच्चों पर निकाला।