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केसीसी ऋण के नाम पर किसानों को ठगा
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Sat, 22 Aug 2015 09:57 PM IST
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बहराइच। नानपारा के बैंक ऑफ बड़ौदा में केसीसी ऋण के नाम फर्जीवाड़े का खेल चल रहा है। 12 ऐसे व्यक्तियों को 40 लाख का ऋण दे दिया है जो मानक पर खरे नहीं उतरते।
ऐसे किसानों को भी ऋण दिया गया है जो पहले से अन्य बैंकों के कर्जदार हैं या फिर उनके पास जमीन ही नहीं है। इनमें से कई लोगों को तो ये भी नहीं पता कि उनके नाम से केसीसी ऋण लिया गया है।
इसका खुलासा होने पर बैंक प्रबंधन गरीब किसानों को ही बेईमान बताकर अब कार्रवाई की बात कर रहा है, जबकि इस फर्जीवाड़े के पीछे बैंक के ही एक सलाहकार का नाम सामने आ रहा है।
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नानपारा नगर की बैंक ऑफ बड़ोदा की शाखा में वीरेंद्र यादव की तैनाती बैंक सलाहकार पद पर है। इन्हीं की संस्तुति पर किसानों को ऋण स्वीकृत किया जाता है।
बैंक ने बीते दो साल में जिन किसानों के केसीसी ऋण को स्वीकृत किया है, उनमें कई किसानों को फर्जी तरीके से ऋण दिया गया। बैंक के ऐसे 12 मामले उजागर हुए हैं, जिनमें ऋण लेने वाले मानक पूरा नहीं करते। इन सभी को लगभग 40 लाख का ऋण प्रदान किया गया है।
बैंक ने किसान सुभाष सिंह का ऋण दो लाख स्वीकृत कर भुगतान कर दिया गया है लेकिन उसके पास मौजूदा समय में जमीन का एक टुकड़ा तक नहीं है।
ऋण लेने के लिए जिस खतौनी का सहारा लिया गया है, वह भी फर्जीवाड़ा कर तैयार किया गया है। सबसे बड़ी बात ये है कि सुभाष को तो इसकी जानकारी भी नहीं। इसी तरह अन्य 11 किसानों को भी फर्जी तरीके से क्रेडिट कार्ड धारक बना दिया गया।
बैक प्रबंधन ने ऋण देने से पहले खतौनी की जांच तक नहीं कराई। हालात यह हैं कि कई किसानों को यह तक नहीं मालूम कि उनका कितने का ऋण स्वीकृत हुआ है। पूरे मामले का खुलासा होने के बाद अब हेराफेरी करने वाले बैंक के अधिकारी अपने बचाव की जुगत में लग गए हैं।
तो इस तरह खेला जा रहा खेल
बैंक के सूत्र बता रहे हैं कि किसानों को ऋण का लालच देकर उनसे ऋण स्वीकृति की रकम आधे दाम में तय कर ऋण स्वीकृत किया जा रहा है। मामले में बैंक प्रबंधन की कार्यशैली संदेह के दायरे में है।
कई अनपढ़ किसानों से अंगूठा लगवाकर ऋण की रकम निकाली जा रही है। इस मामले में एक पीड़ित किसान मतई ने बैंक की कार्यगुजारी का खुलासा करते हुए न्याय के लिए न्यायालय की शरण ली है।
किसानों के भुगतान पर लगाई रोक
इस मामले में बैंक प्रबंधक आरपी लाल का कहना है कि मतई ने और भी कई बैंकों से ऋण ले रखा था, इसलिए उसका शेष भुगतान रोककर नोटिस दिया गया है।
कुछ और किसानों के ऋण में गड़बड़ी होने का पता चला है लेकिन उन सबको भुगतान कर दिया गया है, इस मामले में जांच कराकर सभी को नोटिस भेजा जाएगा। उनसे वसूली की जाएगी।
मतई ने किया खुलासा
थना खैरीघाट के ग्राम मथुरा ललही निवासी पीड़ित किसान मतई ने बताया कि उसके चार लाख का केसीसी ऋण बैंक सलाहकार वीरेंद्र यादव ने कराया था।
मतई का कहना है कि ऋण स्वीकृति के दौरान सलाहकार ने वाउचर समेत अन्य कागजों पर अंगूठा लगवाया था। उसके खाते से 3 अप्रैल 2014 को 50 हजार रुपये निकल गया था। जानकारी होने के बाद बैंक प्रबंधक से शिकायत की गई लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो थाने पर प्रार्थनापत्र दिया गया था।
थानाध्यक्ष ने मामले में सुलह-समझौता कराया था। उसके बाद खाते में एक साल बाद 20 मार्च 2015 को 50 हजार वापस भेजा गया। एक साल तक ये रकम पुष्पा सिंह के खाते में पड़ी रही और इसकी जानकारी बैंक प्रबंधन को नही हुई यह बात भी सवालों के घेरे में है।
हालांकि, बैंक प्रबंधक इसे लिपिकीय त्रुटि बता रहे हैं। मतई ने बताया कि शिकायत के बाद बैंक प्रबंधन ने नाराजगी जताते हुए ऋण की धनराशि देने से मना कर उल्टा वसूली का नोटिस थमा दिया है। मतई का कहना है कि उसे एक भी किस्त नहीं प्राप्त हुई है।
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ऐसे किसानों को भी ऋण दिया गया है जो पहले से अन्य बैंकों के कर्जदार हैं या फिर उनके पास जमीन ही नहीं है। इनमें से कई लोगों को तो ये भी नहीं पता कि उनके नाम से केसीसी ऋण लिया गया है।
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इसका खुलासा होने पर बैंक प्रबंधन गरीब किसानों को ही बेईमान बताकर अब कार्रवाई की बात कर रहा है, जबकि इस फर्जीवाड़े के पीछे बैंक के ही एक सलाहकार का नाम सामने आ रहा है।
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नानपारा नगर की बैंक ऑफ बड़ोदा की शाखा में वीरेंद्र यादव की तैनाती बैंक सलाहकार पद पर है। इन्हीं की संस्तुति पर किसानों को ऋण स्वीकृत किया जाता है।
बैंक ने बीते दो साल में जिन किसानों के केसीसी ऋण को स्वीकृत किया है, उनमें कई किसानों को फर्जी तरीके से ऋण दिया गया। बैंक के ऐसे 12 मामले उजागर हुए हैं, जिनमें ऋण लेने वाले मानक पूरा नहीं करते। इन सभी को लगभग 40 लाख का ऋण प्रदान किया गया है।
बैंक ने किसान सुभाष सिंह का ऋण दो लाख स्वीकृत कर भुगतान कर दिया गया है लेकिन उसके पास मौजूदा समय में जमीन का एक टुकड़ा तक नहीं है।
ऋण लेने के लिए जिस खतौनी का सहारा लिया गया है, वह भी फर्जीवाड़ा कर तैयार किया गया है। सबसे बड़ी बात ये है कि सुभाष को तो इसकी जानकारी भी नहीं। इसी तरह अन्य 11 किसानों को भी फर्जी तरीके से क्रेडिट कार्ड धारक बना दिया गया।
बैक प्रबंधन ने ऋण देने से पहले खतौनी की जांच तक नहीं कराई। हालात यह हैं कि कई किसानों को यह तक नहीं मालूम कि उनका कितने का ऋण स्वीकृत हुआ है। पूरे मामले का खुलासा होने के बाद अब हेराफेरी करने वाले बैंक के अधिकारी अपने बचाव की जुगत में लग गए हैं।
तो इस तरह खेला जा रहा खेल
बैंक के सूत्र बता रहे हैं कि किसानों को ऋण का लालच देकर उनसे ऋण स्वीकृति की रकम आधे दाम में तय कर ऋण स्वीकृत किया जा रहा है। मामले में बैंक प्रबंधन की कार्यशैली संदेह के दायरे में है।
कई अनपढ़ किसानों से अंगूठा लगवाकर ऋण की रकम निकाली जा रही है। इस मामले में एक पीड़ित किसान मतई ने बैंक की कार्यगुजारी का खुलासा करते हुए न्याय के लिए न्यायालय की शरण ली है।
किसानों के भुगतान पर लगाई रोक
इस मामले में बैंक प्रबंधक आरपी लाल का कहना है कि मतई ने और भी कई बैंकों से ऋण ले रखा था, इसलिए उसका शेष भुगतान रोककर नोटिस दिया गया है।
कुछ और किसानों के ऋण में गड़बड़ी होने का पता चला है लेकिन उन सबको भुगतान कर दिया गया है, इस मामले में जांच कराकर सभी को नोटिस भेजा जाएगा। उनसे वसूली की जाएगी।
मतई ने किया खुलासा
थना खैरीघाट के ग्राम मथुरा ललही निवासी पीड़ित किसान मतई ने बताया कि उसके चार लाख का केसीसी ऋण बैंक सलाहकार वीरेंद्र यादव ने कराया था।
मतई का कहना है कि ऋण स्वीकृति के दौरान सलाहकार ने वाउचर समेत अन्य कागजों पर अंगूठा लगवाया था। उसके खाते से 3 अप्रैल 2014 को 50 हजार रुपये निकल गया था। जानकारी होने के बाद बैंक प्रबंधक से शिकायत की गई लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो थाने पर प्रार्थनापत्र दिया गया था।
थानाध्यक्ष ने मामले में सुलह-समझौता कराया था। उसके बाद खाते में एक साल बाद 20 मार्च 2015 को 50 हजार वापस भेजा गया। एक साल तक ये रकम पुष्पा सिंह के खाते में पड़ी रही और इसकी जानकारी बैंक प्रबंधन को नही हुई यह बात भी सवालों के घेरे में है।
हालांकि, बैंक प्रबंधक इसे लिपिकीय त्रुटि बता रहे हैं। मतई ने बताया कि शिकायत के बाद बैंक प्रबंधन ने नाराजगी जताते हुए ऋण की धनराशि देने से मना कर उल्टा वसूली का नोटिस थमा दिया है। मतई का कहना है कि उसे एक भी किस्त नहीं प्राप्त हुई है।