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आंदोलनकारियों ने मधेस को पहनाया अमली जामा
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Thu, 03 Sep 2015 10:21 PM IST
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रुपईडीहा (बहराइच)। नेपाल संविधान सभा के मसौदे में भले ही मधेसी और थारू समुदाय की मांगें शामिल न की गई हों पर आंदोलनकारियों ने मधेस प्रांत को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है।
इसी पहल के तहत मधेस पट्टी को मधेस प्रदेश का नाम देकर कामकाज शुरू कर दिया है। बांके, बर्दिया, दांग, वीरपुर, टीकापुर आदि स्थानों पर मधेस सूबे का ऐलान करने वाले बैनर व पोस्टर टांग दिए गए हैं।
पंचायत स्तर तक लिखापढ़ी में मधेस नाम का उपयोग किया जा रहा है। मधेस मुक्ति मोर्चा और थरूहट मोर्चा के इस कदम से संघर्ष की संभावना और गहरा गई है।
नेपाल में मधेस प्रदेश स्थापना के आंदोलन को एक माह करीब हो गया है। प्रथम चरण के आंदोलन में कैलाली के टीकापुर में हिंसक वारदातें हो चुकी हैं। एसएसपी समेत 21 लोगों की मौत हुई है।
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द्वितीय चरण का आंदोलन रक्षाबंधन पर्व के बाद फिर शुरू हुआ है। जिसके चलते सीमावर्ती बांके, बर्दिया, कैलाली, वीरपुर, कपिलवस्तु आदि जिलों में निरंतर आंदोलन हो रहे हैं।
नेपाली सेना के जवान फ्लैग मार्च कर रहे हैं। इसके बावजूद प्रदर्शन रफ्तार पकड़ता जा रहा है। प्रदर्शन के दूसरे चरण में आंदोलनकारी थारूहट मधेस मुक्ति मोर्चा के पदाधिकारियों ने पहाड़ और नोमेंस लैंड के बीच की पट्टी को मधेस प्रदेश घोषित करते हुए बांके, कोहलपुर, कमदी, जमुनहा, त्रिभुवन चौक, धंबोजी, बीपी चौक, फतेहपुर, सुइया, बघौड़ा व राप्तीपार नेपाल के इलाकों में अवध थरूहट स्वायत्त प्रदेश सरकार आपका स्वागत करती है, लिखे बैनर लगा दिए हैं।
सूत्र बता रहे हैं कि पंचायत स्तर पर होने वाले कामकाज में भी अवध थरूहट स्वायत्त प्रदेश लिखने की शुरुआत कर दी गई है। हालांकि इस मामले में सरकार चुप्पी साधे हुए है।
जगह-जगह निकले जुलूस, मार्च करती रही सेना
स्वायत्त प्रदेश स्थापना की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच गुरुवार को 23वें दिन बांके जिले में जगह-जगह जुलूस निकले। त्रिभुवन चौक में जुलूस निकालकर लोग एसडीएम कार्यालय पहुंचे। यहां मधेस प्रदेश स्थापना की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की। इस दौरान बंदी का पूर्ण असर दिखा। एसपी बसंत पंत ने बताया कि आंदोलन शांतिपूर्ण चल रहा है।
नेपाल में वाहनों को नहीं मिला प्रवेश
नेपाल में प्रदर्शन और तेज होने के चलते गुरुवार को भी सीमा पर वाहन फंसे रहे। सिर्फ पैदल लोगों को नेपाल आने-जाने दिया गया। उधर भंसार कार्यालय पर नेपाल में वाहनों के नेपाल में प्रवेश की रसीद भी नहीं काटी गई।
नेकपा एमाले के जनप्रतिनिधि भी आंदोलन में शामिल
मधेसी समुदाय के आंदोलन का हिस्सा बने पूर्व सांसद व मंत्री मोहम्मद इश्तियाक राई ने बताया कि सत्तारूढ़ दल नेकपा एमाले के 13 सांसदों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है। उन्हें पार्टी में शामिल करने की तैयारी चल रही है।
अब तक हुआ एक अरब का नुकसान
नेपाल उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद श्रेष्ठ ने बताया कि अब तक एक अरब रुपए से अधिक का नुकसान आंदोलन के चलते हुआ है। प्रतिदिन नेपाल को एक करोड़ का झटका लग रहा है।
राजनाथ के बयान से नेपाल में उबाल
भारत सरकार के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दो दिन पूर्व गोरखपुर में फर्स्ट बटालियन भवन शिलान्यास के मौके पर आयोजित जनसभा में मधेसी आंदोलन को लेकर कहा था कि नेपाल में एक करोड़ भारतीयों को नागरिकता नहीं दी जा रही है। साथ ही सांसद महंत आदित्यनाथ द्वारा मधेसी आंदोलन को सहयोग करने की बात कही थी। इसको लेकर नेपाल में उबाल है।
मधेसी सहयोगी दल के नेता मात्रिका प्रसाद यादव की अगुवाई में सात सदस्यीय दल ने बुधवार को प्रधानमंत्री सुशील कोइराला से मिलकर आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद विदेश मंत्री महेंद्र बहादुर पांडेय पर इस बात का दबाव बनाया गया है कि वे काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से स्पष्टीकरण तलब करें।
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इसी पहल के तहत मधेस पट्टी को मधेस प्रदेश का नाम देकर कामकाज शुरू कर दिया है। बांके, बर्दिया, दांग, वीरपुर, टीकापुर आदि स्थानों पर मधेस सूबे का ऐलान करने वाले बैनर व पोस्टर टांग दिए गए हैं।
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पंचायत स्तर तक लिखापढ़ी में मधेस नाम का उपयोग किया जा रहा है। मधेस मुक्ति मोर्चा और थरूहट मोर्चा के इस कदम से संघर्ष की संभावना और गहरा गई है।
नेपाल में मधेस प्रदेश स्थापना के आंदोलन को एक माह करीब हो गया है। प्रथम चरण के आंदोलन में कैलाली के टीकापुर में हिंसक वारदातें हो चुकी हैं। एसएसपी समेत 21 लोगों की मौत हुई है।
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द्वितीय चरण का आंदोलन रक्षाबंधन पर्व के बाद फिर शुरू हुआ है। जिसके चलते सीमावर्ती बांके, बर्दिया, कैलाली, वीरपुर, कपिलवस्तु आदि जिलों में निरंतर आंदोलन हो रहे हैं।
नेपाली सेना के जवान फ्लैग मार्च कर रहे हैं। इसके बावजूद प्रदर्शन रफ्तार पकड़ता जा रहा है। प्रदर्शन के दूसरे चरण में आंदोलनकारी थारूहट मधेस मुक्ति मोर्चा के पदाधिकारियों ने पहाड़ और नोमेंस लैंड के बीच की पट्टी को मधेस प्रदेश घोषित करते हुए बांके, कोहलपुर, कमदी, जमुनहा, त्रिभुवन चौक, धंबोजी, बीपी चौक, फतेहपुर, सुइया, बघौड़ा व राप्तीपार नेपाल के इलाकों में अवध थरूहट स्वायत्त प्रदेश सरकार आपका स्वागत करती है, लिखे बैनर लगा दिए हैं।
सूत्र बता रहे हैं कि पंचायत स्तर पर होने वाले कामकाज में भी अवध थरूहट स्वायत्त प्रदेश लिखने की शुरुआत कर दी गई है। हालांकि इस मामले में सरकार चुप्पी साधे हुए है।
जगह-जगह निकले जुलूस, मार्च करती रही सेना
स्वायत्त प्रदेश स्थापना की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच गुरुवार को 23वें दिन बांके जिले में जगह-जगह जुलूस निकले। त्रिभुवन चौक में जुलूस निकालकर लोग एसडीएम कार्यालय पहुंचे। यहां मधेस प्रदेश स्थापना की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की। इस दौरान बंदी का पूर्ण असर दिखा। एसपी बसंत पंत ने बताया कि आंदोलन शांतिपूर्ण चल रहा है।
नेपाल में वाहनों को नहीं मिला प्रवेश
नेपाल में प्रदर्शन और तेज होने के चलते गुरुवार को भी सीमा पर वाहन फंसे रहे। सिर्फ पैदल लोगों को नेपाल आने-जाने दिया गया। उधर भंसार कार्यालय पर नेपाल में वाहनों के नेपाल में प्रवेश की रसीद भी नहीं काटी गई।
नेकपा एमाले के जनप्रतिनिधि भी आंदोलन में शामिल
मधेसी समुदाय के आंदोलन का हिस्सा बने पूर्व सांसद व मंत्री मोहम्मद इश्तियाक राई ने बताया कि सत्तारूढ़ दल नेकपा एमाले के 13 सांसदों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है। उन्हें पार्टी में शामिल करने की तैयारी चल रही है।
अब तक हुआ एक अरब का नुकसान
नेपाल उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद श्रेष्ठ ने बताया कि अब तक एक अरब रुपए से अधिक का नुकसान आंदोलन के चलते हुआ है। प्रतिदिन नेपाल को एक करोड़ का झटका लग रहा है।
राजनाथ के बयान से नेपाल में उबाल
भारत सरकार के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दो दिन पूर्व गोरखपुर में फर्स्ट बटालियन भवन शिलान्यास के मौके पर आयोजित जनसभा में मधेसी आंदोलन को लेकर कहा था कि नेपाल में एक करोड़ भारतीयों को नागरिकता नहीं दी जा रही है। साथ ही सांसद महंत आदित्यनाथ द्वारा मधेसी आंदोलन को सहयोग करने की बात कही थी। इसको लेकर नेपाल में उबाल है।
मधेसी सहयोगी दल के नेता मात्रिका प्रसाद यादव की अगुवाई में सात सदस्यीय दल ने बुधवार को प्रधानमंत्री सुशील कोइराला से मिलकर आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद विदेश मंत्री महेंद्र बहादुर पांडेय पर इस बात का दबाव बनाया गया है कि वे काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से स्पष्टीकरण तलब करें।