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कड़ी चौकसी का दावा फिर भी नहीं थम रही तस्करी
Updated Tue, 08 Aug 2017 11:04 PM IST
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कड़ी चौकसी का दावा, फिर भी नहीं थम रही तस्करी
नेपाल से सटी रुपईडीहा की सीमा पर नहीं है कोई अंकुश
अमर उजाला ब्यूरो
रुपईडीहा (बहराइच)। नेपाल से सटी रुपईडीहा की सीमा पर सुरक्षा के लिए सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैद हैं। इसके बावजूद खाद्य पदार्थों की तस्करी धड़ल्ले से हो रही है जिससे देश को जहां राजस्व की क्षति उठानी पड़ रही है वहीं धंधे पर अंकुश न लगने से तस्करों के हौसले बुलंद हैं।
नेपाल में दलहन, तिलहन, प्याज, चीनी, लहसुन सब्जी जैसी खाद्य वस्तुओं का उत्पादन नहीं होता है। नेपाल के लोग अधिकांश भारतीय खाद्य पदार्थ पर निर्भर हैं। जिसके चलते इन खाद्य पदार्थों की तस्करी बढ़ी है। नियम है कि खाद्य पदार्थों का कारोबार बिना आयात-निर्यात प्रपत्र के न किया जाए। इसके बावजूद इन प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों का कारोबार बिना लाइसेंस के धड़ल्ले से हो रहा है। निगरानी के लिए नेपाल की खुली सीमा पर लैंड कस्टम बैरियर, पुलिस, एसएसबी व अन्य आधा दर्जन एजेंसियां सक्रिय हैं। लेकिन इसके बावजूद तस्करी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। सीमा क्षेत्र से चोरी छिपे खाद्य पदार्थ विभिन्न वाहनों से नेपाल को भेजा जा रहा है। सीमा पर तलाशी के लिए बैरियर हैं लेकिन प्रतिबंधित खाद्य पदार्थ कैसे नेपाल जा रहे हैं इस पर बोलने से सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी भी कतरा रहे हैं। सीमा पर सक्रिय तस्कर महिलाओं और बच्चों को कैरियर के रूप में इस्तेमाल कर उनके माध्यम से यह खेप भेजने का खेल इन दिनों अधिक खेल रहे हैं। यह तस्कर सीमावर्ती गांव की पगडंडियों के सहारे नेपाल में प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों को पहुंचा रहे हैं। जिसके चलते प्रतिदिन हजारों के राजस्व का चूना लग रहा है।
(बॉक्स)
चेकिंग कर जब्त होता तस्करी का सामान
लैंड कस्टम अधीक्षक रुपईडीहा एसएन भटनागर का कहना है कि प्रतिबंधित वस्तुओं व खाद्य पदार्थों की नियमित चेकिंग की जाती है। मुख्य मार्ग से ऐसी वस्तुएं नेपाल ले जाने पर उन्हें बरामद किया जाता है। उनका कहना है कि तस्करी का काम मुख्य मार्गों से न होकर पगडंडी के रास्तों से अगर होता हो तो वहां लैंड कस्टम के जवान नहीं तैनात हैं। फिर भी निरंतर प्रयास होता है कि तस्करी पर अंकुश लगाया जाए।
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नेपाल से सटी रुपईडीहा की सीमा पर नहीं है कोई अंकुश
अमर उजाला ब्यूरो
रुपईडीहा (बहराइच)। नेपाल से सटी रुपईडीहा की सीमा पर सुरक्षा के लिए सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैद हैं। इसके बावजूद खाद्य पदार्थों की तस्करी धड़ल्ले से हो रही है जिससे देश को जहां राजस्व की क्षति उठानी पड़ रही है वहीं धंधे पर अंकुश न लगने से तस्करों के हौसले बुलंद हैं।
नेपाल में दलहन, तिलहन, प्याज, चीनी, लहसुन सब्जी जैसी खाद्य वस्तुओं का उत्पादन नहीं होता है। नेपाल के लोग अधिकांश भारतीय खाद्य पदार्थ पर निर्भर हैं। जिसके चलते इन खाद्य पदार्थों की तस्करी बढ़ी है। नियम है कि खाद्य पदार्थों का कारोबार बिना आयात-निर्यात प्रपत्र के न किया जाए। इसके बावजूद इन प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों का कारोबार बिना लाइसेंस के धड़ल्ले से हो रहा है। निगरानी के लिए नेपाल की खुली सीमा पर लैंड कस्टम बैरियर, पुलिस, एसएसबी व अन्य आधा दर्जन एजेंसियां सक्रिय हैं। लेकिन इसके बावजूद तस्करी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। सीमा क्षेत्र से चोरी छिपे खाद्य पदार्थ विभिन्न वाहनों से नेपाल को भेजा जा रहा है। सीमा पर तलाशी के लिए बैरियर हैं लेकिन प्रतिबंधित खाद्य पदार्थ कैसे नेपाल जा रहे हैं इस पर बोलने से सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी भी कतरा रहे हैं। सीमा पर सक्रिय तस्कर महिलाओं और बच्चों को कैरियर के रूप में इस्तेमाल कर उनके माध्यम से यह खेप भेजने का खेल इन दिनों अधिक खेल रहे हैं। यह तस्कर सीमावर्ती गांव की पगडंडियों के सहारे नेपाल में प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों को पहुंचा रहे हैं। जिसके चलते प्रतिदिन हजारों के राजस्व का चूना लग रहा है।
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चेकिंग कर जब्त होता तस्करी का सामान
लैंड कस्टम अधीक्षक रुपईडीहा एसएन भटनागर का कहना है कि प्रतिबंधित वस्तुओं व खाद्य पदार्थों की नियमित चेकिंग की जाती है। मुख्य मार्ग से ऐसी वस्तुएं नेपाल ले जाने पर उन्हें बरामद किया जाता है। उनका कहना है कि तस्करी का काम मुख्य मार्गों से न होकर पगडंडी के रास्तों से अगर होता हो तो वहां लैंड कस्टम के जवान नहीं तैनात हैं। फिर भी निरंतर प्रयास होता है कि तस्करी पर अंकुश लगाया जाए।
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