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Bahraich News: अपहरण व दुष्कर्म के दोषी को 10 साल कैद की सजा
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बहराइच। करीब 21 साल पुराने अपहरण और दुष्कर्म के मामले में षष्ठम अपर सत्र न्यायाधीश/रेप एंड पॉक्सो एक्ट कोर्ट संख्या-02 के न्यायाधीश जलाल मोहम्मद अकबर ने बृहस्पतिवार को फैसला सुनाया। अदालत ने दोषसिद्ध अभियुक्त किशोर यादव को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर उसे एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। वहीं, मामले में नामजद प्यारेलाल, भजन और राधेश्याम को दोषमुक्त कर दिया गया।
अभियोजन के अनुसार, खैरीघाट थाने में दी गई तहरीर में वादी ने बताया था कि उसकी पुत्री 17 जुलाई 2004 की रात करीब आठ बजे शौच के लिए घर से निकली थी। इसके बाद वह वापस नहीं लौटी। काफी तलाश के बावजूद उसका पता नहीं चला। करीब चार माह बाद 17 नवंबर 2004 को पीड़िता घर लौटी। उसने आरोप लगाया कि लखीमपुर जिले के ईसानगर थाना क्षेत्र के टेपरा बेला गढ़ी निवासी किशोर, राधेश्याम, भजन, प्यारे लाल और जमींदार उसे उठाकर ले गए थे। आरोप था कि किशोर यादव ने उसे अपने साथ रखकर दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी।
पीड़िता के घर लौटने के बाद 11 जनवरी 2005 को प्राथमिकी दर्ज की गई। तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक कृपाशंकर मौर्य ने साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर विवेचना पूरी कर 24 मई और चार सितंबर 2005 को आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। अदालत ने 10 मार्च 2006 को आरोप तय किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने किशोर यादव को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
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अभियोजन के अनुसार, खैरीघाट थाने में दी गई तहरीर में वादी ने बताया था कि उसकी पुत्री 17 जुलाई 2004 की रात करीब आठ बजे शौच के लिए घर से निकली थी। इसके बाद वह वापस नहीं लौटी। काफी तलाश के बावजूद उसका पता नहीं चला। करीब चार माह बाद 17 नवंबर 2004 को पीड़िता घर लौटी। उसने आरोप लगाया कि लखीमपुर जिले के ईसानगर थाना क्षेत्र के टेपरा बेला गढ़ी निवासी किशोर, राधेश्याम, भजन, प्यारे लाल और जमींदार उसे उठाकर ले गए थे। आरोप था कि किशोर यादव ने उसे अपने साथ रखकर दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी।
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पीड़िता के घर लौटने के बाद 11 जनवरी 2005 को प्राथमिकी दर्ज की गई। तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक कृपाशंकर मौर्य ने साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर विवेचना पूरी कर 24 मई और चार सितंबर 2005 को आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। अदालत ने 10 मार्च 2006 को आरोप तय किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने किशोर यादव को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
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