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Bahraich News: शीतलहर और पछुआ ने ठिठुराया
Tue, 30 Dec 2025 12:49 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Tue, 30 Dec 2025 12:49 AM IST
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बहराइच में पीपल तिराहा के पास आग जलाकर तापते लोग। -संवाद
बहराइच। जिले में शीतलहर का कहर जारी है। ठंड का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसके चलते स्कूल-कॉलेज पहली जनवरी तक के लिए बंद कर दिए गए हैं। सोमवार को भी बादल छाए रहे और धूप नहीं निकली। सर्द पछुआ हवा ने पूरे दिन लोगों की कंपकंपी छुड़ाए रखी। न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रहा, जबकि अधिकतम तापमान 16.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
सुबह से ही धुंध और ठिठुरन ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। करीब नौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं ने गलन और बढ़ा दी। हालात ऐसे रहे कि अलाव, हीटर और ऊनी कपड़ों के बावजूद ठंड से पूरी राहत नहीं मिल सकी। मजबूरी में बाहर निकलने वाले लोग ठंड से कांपते दिखाई दिए।
तराई क्षेत्र में मौसम का मिजाज लगातार लोगों पर भारी पड़ रहा है। बाजारों में भी दोपहर तक सन्नाटा पसरा रहा। घरों में बच्चे और बुजुर्ग रजाई-कंबल में दुबके रहे। शाम ढलते ही ठंड और बढ़ गई, जिससे लोग जल्दी घरों में कैद होने के लिए मजबूर हो गए।
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मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से बादल छाए हुए हैं। पहाड़ी इलाकों में हो रही बर्फबारी का असर तराई क्षेत्र में साफ दिख रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक ठंड से राहत के आसार कम हैं।
कड़ाके की ठंड में बच्चे ज्यादा प्रभावित, रखें खास ध्यान
ठंड और गलन का असर बच्चों की सेहत पर भी साफ दिख रहा है। सर्दी, खांसी, बुखार, निमोनिया और सांस संबंधी संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके त्रिपाठी का कहना है कि छोटे बच्चों और नवजातों को ठंड से बचाना बेहद जरूरी है।
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बच्चों की सुरक्षा के उपाय-
-ऊनी कपड़े और टोपी जरूर पहनाएं
-सुबह-शाम ठंडी हवा में बाहर न ले जाएं।
-गुनगुना पानी और गर्म भोजन दें।
-खांसी, बुखार या सांस लेने में दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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लकड़ी और कोयले के दाम चढ़े
कड़ाके की ठंड के चलते अलाव की मांग बढ़ने से लकड़ी और कोयले के दामों में इजाफा हो गया है। बाजार में जलावन वाली लकड़ी 15 रुपये किलो बिक रही है, जबकि 30 रुपये किलो बिकने वाला कोयला 42 रुपये किलो बिक रहा है। इससे गरीब और मजदूर वर्ग की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। लोग महंगे दाम देकर लकड़ी और कोयला खरीदने के लिए विवश हैं।
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सुबह से ही धुंध और ठिठुरन ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। करीब नौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं ने गलन और बढ़ा दी। हालात ऐसे रहे कि अलाव, हीटर और ऊनी कपड़ों के बावजूद ठंड से पूरी राहत नहीं मिल सकी। मजबूरी में बाहर निकलने वाले लोग ठंड से कांपते दिखाई दिए।
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तराई क्षेत्र में मौसम का मिजाज लगातार लोगों पर भारी पड़ रहा है। बाजारों में भी दोपहर तक सन्नाटा पसरा रहा। घरों में बच्चे और बुजुर्ग रजाई-कंबल में दुबके रहे। शाम ढलते ही ठंड और बढ़ गई, जिससे लोग जल्दी घरों में कैद होने के लिए मजबूर हो गए।
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मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से बादल छाए हुए हैं। पहाड़ी इलाकों में हो रही बर्फबारी का असर तराई क्षेत्र में साफ दिख रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक ठंड से राहत के आसार कम हैं।
कड़ाके की ठंड में बच्चे ज्यादा प्रभावित, रखें खास ध्यान
ठंड और गलन का असर बच्चों की सेहत पर भी साफ दिख रहा है। सर्दी, खांसी, बुखार, निमोनिया और सांस संबंधी संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके त्रिपाठी का कहना है कि छोटे बच्चों और नवजातों को ठंड से बचाना बेहद जरूरी है।
बच्चों की सुरक्षा के उपाय-
-ऊनी कपड़े और टोपी जरूर पहनाएं
-सुबह-शाम ठंडी हवा में बाहर न ले जाएं।
-गुनगुना पानी और गर्म भोजन दें।
-खांसी, बुखार या सांस लेने में दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
लकड़ी और कोयले के दाम चढ़े
कड़ाके की ठंड के चलते अलाव की मांग बढ़ने से लकड़ी और कोयले के दामों में इजाफा हो गया है। बाजार में जलावन वाली लकड़ी 15 रुपये किलो बिक रही है, जबकि 30 रुपये किलो बिकने वाला कोयला 42 रुपये किलो बिक रहा है। इससे गरीब और मजदूर वर्ग की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। लोग महंगे दाम देकर लकड़ी और कोयला खरीदने के लिए विवश हैं।