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Bahraich News: संस्कृत के प्रश्नों से बच्चे हुए परेशान
Fri, 29 Aug 2025 12:47 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Fri, 29 Aug 2025 12:47 AM IST
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पयागपुर के पूर्व माध्यमिक विद्यालय गंगापुर में परीक्षा देते बच्चे। -संवाद
बहराइच। जिले के परिषदीय विद्यालयों में चल रही सत्र परीक्षा में बृहस्पतिवार को बच्चों को खासा पसीना बहाना पड़ा। सामाजिक विषय का प्रश्नपत्र तो कुछ हद तक आसान लगा, लेकिन संस्कृत के प्रश्नपत्र ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं। सवालों को देखकर कई छात्र-छात्राएं परेशान दिखे।
जिले के 14 विकास खंडों के 2803 विद्यालयों में कक्षा तीन से आठ तक की परीक्षा दो पालियों में आयोजित हुई। पहली पाली में सामाजिक विषय और दूसरी पाली में संस्कृत का प्रश्नपत्र कराया गया। बच्चों का कहना रहा कि सामाजिक विषय के सवाल सामान्य स्तर के थे, जिन्हें वे आसानी से हल कर पाए, लेकिन संस्कृत के प्रश्न कुछ उलझाने वाले थे।
हालांकि विद्यार्थियों ने कुछ देर सिर खुजाने के बाद आत्मविश्वास के साथ संस्कृत के प्रश्नों को हल किया। प्रश्न हल करने के बाद छात्र-छात्राओं के चेहरे पर मुस्कान दिखी। चिलवरिया निवासी अभिभावक राम सुंदर और दिनेश कुमार ने कहा कि यदि प्रश्नपत्र बच्चों की क्षमता और स्तर के अनुरूप बनाया जाए, तो वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देंगे और पढ़ाई में और बेहतर कर पाएंगे।
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शिक्षकों ने भी इस बात पर जोर दिया कि संस्कृत जैसे विषय को सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया जाए, तो बच्चों में विषय के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे बेहतर परिणाम देंगे। उनका मानना है कि छोटे-छोटे सुधारों से बच्चों का मनोबल और पढ़ाई के प्रति उत्साह, दोनों बढ़ सकते हैं।
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जिले के 14 विकास खंडों के 2803 विद्यालयों में कक्षा तीन से आठ तक की परीक्षा दो पालियों में आयोजित हुई। पहली पाली में सामाजिक विषय और दूसरी पाली में संस्कृत का प्रश्नपत्र कराया गया। बच्चों का कहना रहा कि सामाजिक विषय के सवाल सामान्य स्तर के थे, जिन्हें वे आसानी से हल कर पाए, लेकिन संस्कृत के प्रश्न कुछ उलझाने वाले थे।
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हालांकि विद्यार्थियों ने कुछ देर सिर खुजाने के बाद आत्मविश्वास के साथ संस्कृत के प्रश्नों को हल किया। प्रश्न हल करने के बाद छात्र-छात्राओं के चेहरे पर मुस्कान दिखी। चिलवरिया निवासी अभिभावक राम सुंदर और दिनेश कुमार ने कहा कि यदि प्रश्नपत्र बच्चों की क्षमता और स्तर के अनुरूप बनाया जाए, तो वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देंगे और पढ़ाई में और बेहतर कर पाएंगे।
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शिक्षकों ने भी इस बात पर जोर दिया कि संस्कृत जैसे विषय को सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया जाए, तो बच्चों में विषय के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे बेहतर परिणाम देंगे। उनका मानना है कि छोटे-छोटे सुधारों से बच्चों का मनोबल और पढ़ाई के प्रति उत्साह, दोनों बढ़ सकते हैं।