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दीपों की माला सजी, पूजी गईं मां लक्ष्मी
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Wed, 11 Nov 2015 05:24 PM IST
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बहराइच। दीपों की रोशनी से बुधवार शाम घर-घर रोशन हो उठे। दीपावली की चमक हर चेहरे पर छाई रही। शाम होते ही दीप से दीप जलाकर लोगों ने महालक्ष्मी का आह्वान किया।
या देवी सर्व भूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता... के मंत्रों के साथ भक्तों ने मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर उनसे सुख और समृद्धि की कामना की। इसके बाद शुरू हुआ आतिशबाजी का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। लोगों ने एक दूसरे को दिवाली की शुभकामनाएं देकर मिठाइयां भी बाटीं।
दीपोत्सव की धूम बुधवार को शहर से लेकर कस्बों और गांवों में दिखी। शाम ढलते ही गोधूलि बेला में घर और प्रतिष्ठान दीपों और रंगबिरंगी झालरों और मोमबत्तियों से जगमगा उठे।
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दीपमाला की छटा और बिजली की झालरों से सजे मकान और प्रतिष्ठान आकर्षण चुरा रहे थे। सरकारी और निजी कार्यालय भी रोशनी से जगमग रहे। घरों में बेदी पर दीप जलाकर लोगों ने शुभ मुहूर्त में महालक्ष्मी और भगवान गणेश की विधिविधान से पूजा-अर्चना की।
मां लक्ष्मी को लइया, खील बताशे और विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का भोग लगाया गया। इसके बाद घर-घर प्रसाद का वितरण हुआ। लोगों ने एक-दूसरे को दीप पर्व की बधाइयां दीं।
इसके बाद बच्चों और बड़ों ने खूब पटाखे फोड़े। फुलझड़ी और अनार की आतिशबाजी मनमोहक रही। वहीं, व्यापारिक प्रतिष्ठानों में दोपहर बाद दो बजे से विधिविधान से पूजा की गई।
तांत्रिकों ने की साधना
अमावस्या की रात गृहस्थ और व्यापारियों के साथ तांत्रिकों के लिए भी फलदायी मानी जाती है। बुधवार को दीपावली के साथ ही अमावस्या के अवसर पर दीपोत्सव की शाम को जब सभी महालक्ष्मी को खुश करने के लिए दीपमालाएं सजा रहे थे तब तंत्र मंत्र साधकों ने श्मशानघाट पहुंचकर तंत्र-मंत्र की सिद्धि का प्रयास शुरू किया। शहर के गोलवाघाट, चित्तौरा, त्रिमुहानी स्वर्गधाम, झिंगहाघाट के आसपास स्थित श्मशान घाट से मंत्रों की गूंज उठती रही।
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या देवी सर्व भूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता... के मंत्रों के साथ भक्तों ने मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर उनसे सुख और समृद्धि की कामना की। इसके बाद शुरू हुआ आतिशबाजी का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। लोगों ने एक दूसरे को दिवाली की शुभकामनाएं देकर मिठाइयां भी बाटीं।
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दीपोत्सव की धूम बुधवार को शहर से लेकर कस्बों और गांवों में दिखी। शाम ढलते ही गोधूलि बेला में घर और प्रतिष्ठान दीपों और रंगबिरंगी झालरों और मोमबत्तियों से जगमगा उठे।
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दीपमाला की छटा और बिजली की झालरों से सजे मकान और प्रतिष्ठान आकर्षण चुरा रहे थे। सरकारी और निजी कार्यालय भी रोशनी से जगमग रहे। घरों में बेदी पर दीप जलाकर लोगों ने शुभ मुहूर्त में महालक्ष्मी और भगवान गणेश की विधिविधान से पूजा-अर्चना की।
मां लक्ष्मी को लइया, खील बताशे और विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का भोग लगाया गया। इसके बाद घर-घर प्रसाद का वितरण हुआ। लोगों ने एक-दूसरे को दीप पर्व की बधाइयां दीं।
इसके बाद बच्चों और बड़ों ने खूब पटाखे फोड़े। फुलझड़ी और अनार की आतिशबाजी मनमोहक रही। वहीं, व्यापारिक प्रतिष्ठानों में दोपहर बाद दो बजे से विधिविधान से पूजा की गई।
तांत्रिकों ने की साधना
अमावस्या की रात गृहस्थ और व्यापारियों के साथ तांत्रिकों के लिए भी फलदायी मानी जाती है। बुधवार को दीपावली के साथ ही अमावस्या के अवसर पर दीपोत्सव की शाम को जब सभी महालक्ष्मी को खुश करने के लिए दीपमालाएं सजा रहे थे तब तंत्र मंत्र साधकों ने श्मशानघाट पहुंचकर तंत्र-मंत्र की सिद्धि का प्रयास शुरू किया। शहर के गोलवाघाट, चित्तौरा, त्रिमुहानी स्वर्गधाम, झिंगहाघाट के आसपास स्थित श्मशान घाट से मंत्रों की गूंज उठती रही।