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हाथ काटा फिर भी नहीं बची मुराद की जान
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नानपारा (बहराइच)। कोतवाली के ग्राम पंचायत मासूपुर के मजरा भग्गड़वा में बारावफात जुलूस के बाद हुए हादसे में गंभीर तौर से झुलसे मुराद ने भी मंगलवार को दम तोड़ दिया। घायल मुराद की जान बचाने के लिए उसका दाहिना हाथ भी काटना पड़ा लेकिन इसके बावजूद डॉक्टर उसे नहीं बचा पाए। मंगलवार सुबह घायल युवक की लखनऊ में चल रहे इलाज के दौरान मौत हो गई। इसे मिलाकर बारावफात हादसे में मरने वालों की संख्या अब सात हो गई है।
बीती 9 अक्तूबर को बारावफात के अवसर पर गांव में निकाले जा रहे जुलूस के बाद गांव के कुछ युवा जुलूस में शामिल रौजे को लेकर मासूपुर चौराहा जा रहे थे। इसी दौरान रौजे में लगा झंडा 11 हजार की हाईटेंशन लाइन को छू गया था। इससे पांच मासूमों की मौके पर ही मौत हो गयी थी जबकि एक अन्य घायल ने इलाज के लिए लखनऊ ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया था। इस हादसे में मुराद खान (18) गंभीर रुप से झुलसा था। इसका इलाज भी लखनऊ के एक अस्पताल में चल रहा था। हादसे में हुई इस सातवीं मौत से एक बार फिर भग्गड़वा गांव के लोगों का आक्रोश भड़क उठा। मृतक के परिजनों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर बिजली विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोग बिजली विभाग के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों का आरोप था कि जुलूस के कुछ दिन पूर्व ही बिजली विभाग के अफसरों से शिकायत कर झूलते लटकते तारों को कसने की मांग की गयी थी। लेकिन विभागीय जिम्मेदार शिथिल बने रहे और दर्दनाक हादसा हो गया।
मुराद की मौत के बाद नानपारा कोतवाली परिसर पर मुराद का शव लेकर ग्राम प्रधान फरमान, जिला पंचायत सदस्य अकील अहमद, पिता छम्मा आदि प्रदर्शन कर रहे थे। मौके पर पहुंचे एक्सईएन नानपारा कृष्ण कुमार, एसडीओ एके कुशवाहा ने ग्रामीणों को समझा बुझा कर विरोध प्रदर्शन शांत कराने का प्रयास किया। लेकिन ग्रामीणों अपनी मांग पर अड़े दिखे। इसके बाद कोतवाल शमशेर बहादुर सिंह ने अधीक्षण अभियंता सुरेश कुमार की बात प्रदर्शनकारियों से करवाई। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बुधवार को गांव में लोगों के घरों के ऊपर से गुजरी हाईटेंशन लाइन को हटाने के साथ ही जर्जर तारों को भी बदल दिया जाएगा। इसके बाद ही ग्रामीण प्रदर्शन खत्म कर मुराद का शव दफनाने के लिए लेकर निकले।
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बीती 9 अक्तूबर को बारावफात के अवसर पर गांव में निकाले जा रहे जुलूस के बाद गांव के कुछ युवा जुलूस में शामिल रौजे को लेकर मासूपुर चौराहा जा रहे थे। इसी दौरान रौजे में लगा झंडा 11 हजार की हाईटेंशन लाइन को छू गया था। इससे पांच मासूमों की मौके पर ही मौत हो गयी थी जबकि एक अन्य घायल ने इलाज के लिए लखनऊ ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया था। इस हादसे में मुराद खान (18) गंभीर रुप से झुलसा था। इसका इलाज भी लखनऊ के एक अस्पताल में चल रहा था। हादसे में हुई इस सातवीं मौत से एक बार फिर भग्गड़वा गांव के लोगों का आक्रोश भड़क उठा। मृतक के परिजनों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर बिजली विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोग बिजली विभाग के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों का आरोप था कि जुलूस के कुछ दिन पूर्व ही बिजली विभाग के अफसरों से शिकायत कर झूलते लटकते तारों को कसने की मांग की गयी थी। लेकिन विभागीय जिम्मेदार शिथिल बने रहे और दर्दनाक हादसा हो गया।
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मुराद की मौत के बाद नानपारा कोतवाली परिसर पर मुराद का शव लेकर ग्राम प्रधान फरमान, जिला पंचायत सदस्य अकील अहमद, पिता छम्मा आदि प्रदर्शन कर रहे थे। मौके पर पहुंचे एक्सईएन नानपारा कृष्ण कुमार, एसडीओ एके कुशवाहा ने ग्रामीणों को समझा बुझा कर विरोध प्रदर्शन शांत कराने का प्रयास किया। लेकिन ग्रामीणों अपनी मांग पर अड़े दिखे। इसके बाद कोतवाल शमशेर बहादुर सिंह ने अधीक्षण अभियंता सुरेश कुमार की बात प्रदर्शनकारियों से करवाई। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बुधवार को गांव में लोगों के घरों के ऊपर से गुजरी हाईटेंशन लाइन को हटाने के साथ ही जर्जर तारों को भी बदल दिया जाएगा। इसके बाद ही ग्रामीण प्रदर्शन खत्म कर मुराद का शव दफनाने के लिए लेकर निकले।
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