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निर्धारित मार्गों से ही निकलेगा मुहर्रम का जुलूस
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बहराइच। मोहर्रम में निकलने वाली सातवीं, आठवीं व दसवीं के जुलूस की तैयारियों को लेकर मंगलवार को एक बैठक हुई। बैठक में नगर क्षेत्र में निकलने वाले जुलूस के मार्गों के बारे में हुए मंथन के बाद निर्णय हुआ कि सभी जुलूस पूर्व निर्धारित मार्गों से ही निकाले जाएंगे।
बैठक में मौजूद फिदा अब्बास ने बताया कि मोहर्रम के दौरान नगर क्षेत्र में 6, 7 व 9 अगस्त को अजाखाना मोहसिनयां दुलदुल हाउस से जुलूस का शुभारंभ होगा। जुलूस अपने पूर्व निर्धारित मार्ग से हो कर अंतिम स्थान पर पहुंचेगा। सातवीं मोहर्रम को इमामबाड़ा नवाब साहब से जुलूस के निकलने का सिलसिला शुरू होगा। इसमें शामिल होने वाली मातमी अंजुमन अपने अलम के साथ जुलूस निकालने की तैयारी में जुटे हैं। मोहर्रम का जुलूस 48 घंटे तक निकलेगा। जुलूस के साथ दुलदुल भी पूरी रात व दिन गश्त करता रहेगा।
उन्होंने बताया कि अजाखाना माहसिनयां से निकलने वाले जुलूस की अगुवाई मोहसिन जाफरी व कंबर रिजवी करेंगे। अंजुमन की ओर से होने वाले कमा व जंजीरी मातम करने के लिए जंजीरें तेज कराई जा रहीं है और अलम के सेहरे लखनऊ से मंगाए जा रहे हैं।
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बहराइच। जिले में मोहर्रम को देखते हुए कारीगरों ने ताजिया बनाने का कार्य तेज कर दिया है। मोहर्रम का महीना शुरू होते ही ताजिया बनाने का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। ताजिया बनाने वाले कारीगरों की माने तो ताजिया बनाने का कार्य पूरे वर्ष चलता रहता है। पहले बांस की तीलियों का ढांचा तैयार कर लिया जाता है। इसके बाद बकरीद के माह में इन पर रंगीन कागज, पन्नी लगाकर मोहर्रम के लिए तैयार किया जाता है।
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बैठक में मौजूद फिदा अब्बास ने बताया कि मोहर्रम के दौरान नगर क्षेत्र में 6, 7 व 9 अगस्त को अजाखाना मोहसिनयां दुलदुल हाउस से जुलूस का शुभारंभ होगा। जुलूस अपने पूर्व निर्धारित मार्ग से हो कर अंतिम स्थान पर पहुंचेगा। सातवीं मोहर्रम को इमामबाड़ा नवाब साहब से जुलूस के निकलने का सिलसिला शुरू होगा। इसमें शामिल होने वाली मातमी अंजुमन अपने अलम के साथ जुलूस निकालने की तैयारी में जुटे हैं। मोहर्रम का जुलूस 48 घंटे तक निकलेगा। जुलूस के साथ दुलदुल भी पूरी रात व दिन गश्त करता रहेगा।
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उन्होंने बताया कि अजाखाना माहसिनयां से निकलने वाले जुलूस की अगुवाई मोहसिन जाफरी व कंबर रिजवी करेंगे। अंजुमन की ओर से होने वाले कमा व जंजीरी मातम करने के लिए जंजीरें तेज कराई जा रहीं है और अलम के सेहरे लखनऊ से मंगाए जा रहे हैं।
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बहराइच। जिले में मोहर्रम को देखते हुए कारीगरों ने ताजिया बनाने का कार्य तेज कर दिया है। मोहर्रम का महीना शुरू होते ही ताजिया बनाने का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। ताजिया बनाने वाले कारीगरों की माने तो ताजिया बनाने का कार्य पूरे वर्ष चलता रहता है। पहले बांस की तीलियों का ढांचा तैयार कर लिया जाता है। इसके बाद बकरीद के माह में इन पर रंगीन कागज, पन्नी लगाकर मोहर्रम के लिए तैयार किया जाता है।