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मोटी रकम लेकर दलाल बना रहे फर्जी लाइसेंस व रिलीज ऑर्डर

Sat, 25 Jun 2022 12:15 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jun 2022 12:15 AM IST
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बहराइच। अगर आप संभागीय परिवहन कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, रिलीज ऑर्डर लेने या किसी अन्य काम से आ रहे हैं तो सावधान हो जाइए। आप दलालों के धोखे का शिकार हो सकते हैं। बीते कुछ दिनों में ऐसे कई मामले उजागर हो चुके हैं। यहां आने वाले लोगों से कार्यालय के आसपास डेरा जमाए दलाल मोटा शुल्क लेते फर्जी प्रपत्र तैयार करवा देते हैं। आए दिन दलाल ऐसे फर्जी प्रपत्र लोगों को थमा रहे हैं।
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गोंडा के कौड़िया निवासी रमेश कुमार का मिनी ट्रक यात्री कर अधिकारी महेश वर्मा ने सीज कर दिया था। ट्रक छुड़ाने के लिए एआरटीओ कार्यालय आने पर उनसे एक दलाल ने 54 हजार रुपये देकर फर्जी रिलीज ऑर्डर तैयार करा दिया। इसी रिलीज ऑर्डर से उन्होंने वाहन छुड़ा लिया। मामले का खुलासा हुआ तो कार्यालय में हड़कंप मच गया। बवाल से बचने के लिए एआरटीओ ने तहरीर देकर दलाल जीशान के खिलाफ गुरुवार को दरगाह थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया था। इसके अलावा कौड़िया निवासी रमेश कुमार के खिलाफ भी लिखा-पढ़ी शुरू कर दी गई है।
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शहर के मोहल्ला बड़ीहाट निवासी अमित श्रीवास्तव ने अपना ड्राइविंग लाइसेंस एक दलाल के माध्यम से बनवाया था। बीते दिनों अमित की कार दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस पर उन्होंने इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम प्राप्त करने के लिए अपने दस्तावेज कंपनी को सौंपे थे। कंपनी की ओर से जब डीएल की जांच कराई गई तो यह फर्जी पाया गया। नतीजा यह रहा कि उन्हें आज तक एक पैसा भी नहीं मिला। अमित नुकसान की भरपाई करने के लिए अफसरों की परिक्रमा कर रहे हैं और दलालों को कोस रहे हैं।
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शहर के सलारगंज निवासी साबिर ने कुछ दिन पहले अपनी कार नेपाल निवासी एक व्यक्ति को बेची थी। पूरा भुगतान न मिलने के कारण उन्होंने ट्रांसफर नहीं किया था। इस बीच खरीदार ने दलालों से संपर्क कर ट्रांसफर के फर्जी कागज तैयार करा लिए और वाहन लेकर नेपाल चला गया। विक्रेता साबिर को जब यह पता चला तो उसने एआरटीओ से शिकायत की। एआरटीओ ने साबिर को थाने भेज दिया, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। अब साबिर थाने और एआरटीओ कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
संभागीय परिवहन विभाग में दलालों का ही बोलबाला है। यहां आने वालों को दलाल अफसरों से मिलने ही नहीं देेते हैं। कई लोगों ने संभागीय परिवहन विभाग के आसपास स्थायी दुकानें भी खोल रखीं हैं। पांच सौ के काम के लिए पांच हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। एआरटीओ प्रवर्तन सुनवाई तो करते हैं, लेकिन इन दलालों के आगे उनकी भी नहीं चलती। कभी-कभी जब शासन के निर्देश पर अभियान चलता है कुछ समय के लिए दलाल शांत हो जाते हैं। इसके बाद मौका देखकर फिर सक्रिय हो जाते हैं। वहीं, एआरटीओे कार्यालय आने वालों में अधिकांश सवारी या मालवाहक वाहनों के चालक और ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले होते हैं। कम पढ़े-लिखे होने के कारण इन लोगों को जानकारी नहीं होती है। इस वजह से दलालों का सहारा लेते हैं।

कुुछ ही समय पूर्व कार्यभार ग्रहण किया है। पहले की घटनाओं के बारे में अधिक जानकारी नहीं है, लेकिन अब इस तरह की कोई घटना नहीं होने दी जाएगी। फर्जी रिलीज ऑर्डर जारी करने के मामले में मुकदमा पंजीकृत करा दिया गया है। गिरोह में और लोग शामिल हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
- राजीव कुमार, एआरटीओ प्रशासन
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