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कतर्निया में अवैध कब्जों पर चला बुलडोजर
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गायघाट ( बहराइच)। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में अवैध निर्माणों को लेकर बृहस्पतिवार को सख्त रुख अपनाया गया। मोतीपुर रेंज परिसर व वन बैरियर के आसपास बुलडोजर से सारे अवैध निर्माण ढहा दिए गये। इनमें 18 पक्के निर्माण और बाकी झोपड़ियां व गुमटी शामिल हैं। अधिकारियों ने दोबारा निर्माण न करने की चेतावनी भी दी।
दरअसल, कई लोगों ने वन विभाग की जमीन पर अवैध निर्माण करवा लिए थे। चार माह पूर्व विभाग ने कब्जेदारों को नोटिस जारी कर कब्जा हटाने को कहा था। इसके बावजूद कब्जे नहीं हटाए गये थे। इसी के बाद बृहस्पतिवार को वन क्षेत्राधिकारी, मोतीपुर महेंद्र मौर्या व वन क्षेत्राधिकारी, ककरहा राम कुमार की अगुवाई में वन विभाग व पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। बुलडोजर के साथ पहुंची टीम को देखकर वहां अफरातफरी मच गई। टीम ने पक्के निर्माण के साथ ही व सड़क किनारे रखी गुमटियों व ढाबलियों पर भी बुलडोजर चलाया।
कब्जा हटाने के दौरान किसी तरह का विरोध नहीं हुआ। प्रभागीय वन अधिकारी आकाशदीप बधावन ने बताया कि अतिक्रमण को लेकर सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है। इसी का पालन करते हुए अवैध कब्जे हटवाए गये। उन्होंने बताया कि अवैध रूप से अतिक्रमण कर रहे 20 लोगों को चार माह पूर्व नोटिस देकर कब्जे हटाने का आदेश दिया गया था। इसके बावजूद कब्जे नहीं हटाए गये। सभी को एक सप्ताह पूर्व फिर से नोटिस देकर कब्जा हटाने के लिए कहा गया था, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। ऐसे में बुलडोजर से कब्जे हटवाने पड़े। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वन विभाग की जमीन पर जहां भी अवैध कब्जा है वहां बुलडोजर से हटवाया जाएगा।
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स्थानीय लोगों के मुताबिक, कतर्नियाघाट रेंज में ढहाए गये सभी निर्माण 20 से 30 वर्ष पुराने थे। सभी में परिवार रहते थे। बताया जा रहा है कि बीते वर्षों में कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन किसी ने कब्जा नहीं हटाया। ऐसे में मजबूर होकर वन विभाग को बुलडोजर ले जाकर कार्रवाई करनी पड़ी।
बुलडोजर से अवैध कब्जे ढहाने की कार्रवाई आनन-फानन में हुई। गांव वालों को भी भनक नहीं लग सकी। जब कार्रवाई शुरू हुई तो लोग गांव के बाहर कामों में व्यस्त थे। थोड़ी देर में बुलडोजर पहुंचने की जानकारी मिली तो लोगों ने घरों से सामान निकालना शुरू कर दिया। वहीं, वन विभाग व पुलिस कर्मियों की जल्दबाजी का आलम यह रहा कि जहां बुलडोजर नहीं पहुंचा वहां हथौड़े का प्रयोग कर अवैध कब्जे तोड़ दिए गये। बताया जा रहा है कि कार्रवाई से लोगों में गुस्सा तो काफी था, लेकिन वे विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। मौके पर पहुंचे समाजवादी पार्टी के कुछ नेता अनशन पर बैठ जरूर, लेकिन इन्हें पुलिस ने हटा दिया।
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दरअसल, कई लोगों ने वन विभाग की जमीन पर अवैध निर्माण करवा लिए थे। चार माह पूर्व विभाग ने कब्जेदारों को नोटिस जारी कर कब्जा हटाने को कहा था। इसके बावजूद कब्जे नहीं हटाए गये थे। इसी के बाद बृहस्पतिवार को वन क्षेत्राधिकारी, मोतीपुर महेंद्र मौर्या व वन क्षेत्राधिकारी, ककरहा राम कुमार की अगुवाई में वन विभाग व पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। बुलडोजर के साथ पहुंची टीम को देखकर वहां अफरातफरी मच गई। टीम ने पक्के निर्माण के साथ ही व सड़क किनारे रखी गुमटियों व ढाबलियों पर भी बुलडोजर चलाया।
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कब्जा हटाने के दौरान किसी तरह का विरोध नहीं हुआ। प्रभागीय वन अधिकारी आकाशदीप बधावन ने बताया कि अतिक्रमण को लेकर सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है। इसी का पालन करते हुए अवैध कब्जे हटवाए गये। उन्होंने बताया कि अवैध रूप से अतिक्रमण कर रहे 20 लोगों को चार माह पूर्व नोटिस देकर कब्जे हटाने का आदेश दिया गया था। इसके बावजूद कब्जे नहीं हटाए गये। सभी को एक सप्ताह पूर्व फिर से नोटिस देकर कब्जा हटाने के लिए कहा गया था, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। ऐसे में बुलडोजर से कब्जे हटवाने पड़े। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वन विभाग की जमीन पर जहां भी अवैध कब्जा है वहां बुलडोजर से हटवाया जाएगा।
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स्थानीय लोगों के मुताबिक, कतर्नियाघाट रेंज में ढहाए गये सभी निर्माण 20 से 30 वर्ष पुराने थे। सभी में परिवार रहते थे। बताया जा रहा है कि बीते वर्षों में कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन किसी ने कब्जा नहीं हटाया। ऐसे में मजबूर होकर वन विभाग को बुलडोजर ले जाकर कार्रवाई करनी पड़ी।
बुलडोजर से अवैध कब्जे ढहाने की कार्रवाई आनन-फानन में हुई। गांव वालों को भी भनक नहीं लग सकी। जब कार्रवाई शुरू हुई तो लोग गांव के बाहर कामों में व्यस्त थे। थोड़ी देर में बुलडोजर पहुंचने की जानकारी मिली तो लोगों ने घरों से सामान निकालना शुरू कर दिया। वहीं, वन विभाग व पुलिस कर्मियों की जल्दबाजी का आलम यह रहा कि जहां बुलडोजर नहीं पहुंचा वहां हथौड़े का प्रयोग कर अवैध कब्जे तोड़ दिए गये। बताया जा रहा है कि कार्रवाई से लोगों में गुस्सा तो काफी था, लेकिन वे विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। मौके पर पहुंचे समाजवादी पार्टी के कुछ नेता अनशन पर बैठ जरूर, लेकिन इन्हें पुलिस ने हटा दिया।